Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:02

[1] तब ज़ूफ़र नामाती ने जवाब दे कर कहा,

[2] “यक़ीनन मेरे मुज़्तरिब ख़यालात और वह एहसासात जो मेरे अन्दर से उभर रहे हैं मुझे जवाब देने पर मज्बूर कर रहे हैं।

[3] मुझे ऐसी नसीहत सुननी पड़ी जो मेरी बेइज़्ज़ती का बाइस थी, लेकिन मेरी समझ मुझे जवाब देने की तहरीक दे रही है।

[4] क्या तुझे मालूम नहीं कि क़दीम ज़माने से यानी जब से इन्सान को ज़मीन पर रखा गया

[5] शरीर का फ़त्हमन्द नारा आरिज़ी और बेदीन की ख़ुशी पल भर की साबित हुई है?

[6] गो उस का क़द-ओ-क़ामत आसमान तक पहुँचे और उस का सर बादलों को छुए

[7] ताहम वह अपने फ़ुज़्ले की तरह अबद तक तबाह हो जाएगा। जिन्हों ने उसे पहले देखा था वह पूछेंगे, ‘अब वह कहाँ है?’

[8] वह ख़्वाब की तरह उड़ जाता और आइन्दा कहीं नहीं पाया जाएगा, उसे रात की रोया की तरह भुला दिया जाता है।

[9] जिस आँख ने उसे देखा वह उसे आइन्दा कभी नहीं देखेगी। उस का घर दुबारा उस का मुशाहदा नहीं करेगा।

[10] उस की औलाद को ग़रीबों से भीक माँगनी पड़ेगी, उस के अपने हाथों को दौलत वापस देनी पड़ेगी।

[11] जवानी की जिस ताक़त से उस की हड्डियाँ भरी हैं वह उस के साथ ही ख़ाक में मिल जाएगी।

[12] बुराई बेदीन के मुँह में मीठी है। वह उसे अपनी ज़बान तले छुपाए रखता,

[13] उसे मह्फ़ूज़ रख कर जाने नहीं देता।

[14] लेकिन उस की ख़ुराक पेट में आ कर ख़राब हो जाती बल्कि साँप का ज़हर बन जाती है।

[15] जो दौलत उस ने निगल ली उसे वह उगल देगा, अल्लाह ही यह चीज़ें उस के पेट से ख़ारिज करेगा।

[16] उस ने साँप का ज़हर चूस लिया, और साँप ही की ज़बान उसे मार डालेगी।

[17] वह नदियों से लुत्फ़अन्दोज़ नहीं होगा, शहद और बालाई की नहरों से मज़ा नहीं लेगा।

[18] जो कुछ उस ने हासिल किया उसे वह हज़म नहीं करेगा बल्कि सब कुछ वापस करेगा। जो दौलत उस ने अपने कारोबार से कमाई उस से वह लुत्फ़ नहीं उठाएगा।

[19] क्यूँकि उस ने पस्तहालों पर ज़ुल्म करके उन्हें तर्क किया है, उस ने ऐसे घरों को छीन लिया है जिन्हें उस ने तामीर नहीं किया था।

[20] उस ने पेट में कभी सुकून मह्सूस नहीं किया बल्कि जो कुछ भी चाहता था उसे बचने नहीं दिया।

[21] जब वह खाना खाता है तो कुछ नहीं बचता, इस लिए उस की ख़ुशहाली क़ाइम नहीं रहेगी।

[22] जूँ ही उसे कस्रत की चीज़ें हासिल होंगी वह मुसीबत में फंस जाएगा। तब दुख-दर्द का पूरा ज़ोर उस पर आएगा।

[23] काश अल्लाह बेदीन का पेट भर कर अपना भड़कता क़हर उस पर नाज़िल करे, काश वह अपना ग़ज़ब उस पर बरसाए।

[24] गो वह लोहे के हथियार से भाग जाए, लेकिन पीतल का तीर उसे चीर डालेगा।

[25] जब वह उसे अपनी पीठ से निकाले तो तीर की नोक उस के कलेजे में से निकलेगी। उसे दह्शतनाक वाक़िआत पेश आएँगे।

[26] गहरी तारीकी उस के ख़ज़ानों की ताक में बैठी रहेगी। ऐसी आग जो इन्सानों ने नहीं लगाई उसे भस्म करेगी। उस के ख़ैमे के जितने लोग बच निकले उन्हें वह खा जाएगी।

[27] आसमान उसे मुजरिम ठहराएगा, ज़मीन उस के ख़िलाफ़ गवाही देने के लिए खड़ी हो जाएगी।

[28] सैलाब उस का घर उड़ा ले जाएगा, ग़ज़ब के दिन शिद्दत से बहता हुआ पानी उस पर से गुज़रेगा।

[29] यह है वह अज्र जो अल्लाह बेदीनों को देगा, वह विरासत जिसे अल्लाह ने उन के लिए मुक़र्रर की है।”

अय्यूब — Chapters