[1] अय्यूब ने जवाब दे कर कहा,
[2] “लगता है कि तुम ही वाहिद दानिशमन्द हो, कि हिक्मत तुम्हारे साथ ही मर जाएगी।
[3] लेकिन मुझे समझ है, इस नाते से मैं तुम से अदना नहीं हूँ। वैसे भी कौन ऐसी बातें नहीं जानता?
[4] मैं तो अपने दोस्तों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गया हूँ, मैं जिस की दुआएँ अल्लाह सुनता था। हाँ, मैं जो बेगुनाह और बेइल्ज़ाम हूँ दूसरों के लिए मज़ाक़ का निशाना बन गया हूँ!
[5] जो सुकून से ज़िन्दगी गुज़ारता है वह मुसीबतज़दा को हक़ीर जानता है। वह कहता है, ‘आओ, हम उसे ठोकर मारें जिस के पाँओ डगमगाने लगे हैं।’
[6] ग़ारतगरों के ख़ैमों में आराम-ओ-सुकून है, और अल्लाह को तैश दिलाने वाले हिफ़ाज़त से रहते हैं, गो वह अल्लाह के हाथ में हैं।
[7] ताहम तुम कहते हो कि जानवरों से पूछ ले तो वह तुझे सहीह बात सिखाएँगे। परिन्दों से पता कर तो वह तुझे दुरुस्त जवाब देंगे।
[8] ज़मीन से बात कर तो वह तुझे तालीम देगी, बल्कि समुन्दर की मछलियाँ भी तुझे इस का मफ़्हूम सुनाएँगी।
[9] इन में से एक भी नहीं जो न जानता हो कि रब के हाथ ने यह सब कुछ किया है।
[10] उसी के हाथ में हर जानदार की जान, तमाम इन्सानों का दम है।
[11] कान तो अल्फ़ाज़ की यूँ जाँच-पड़ताल करता है जिस तरह ज़बान खानों में इम्तियाज़ करती है।
[12] और हिक्मत उन में पाई जाती है जो उम्ररसीदा हैं, समझ मुतअद्दिद दिन गुज़रने के बाद ही आती है।
[13] हिक्मत और क़ुदरत अल्लाह की है, वही मस्लहत और समझ का मालिक है।
[14] जो कुछ वह ढा दे वह दुबारा तामीर नहीं होगा, जिसे वह गिरिफ़्तार करे उसे आज़ाद नहीं किया जाएगा।
[15] जब वह पानी रोके तो काल पड़ता है, जब उसे खुला छोड़े तो वह मुल्क में तबाही मचा देता है।
[16] उस के पास क़ुव्वत और दानाई है। भटकने और भटकाने वाला दोनों ही उस के हाथ में हैं।
[17] मुशीरों को वह नंगे पाँओ अपने साथ ले जाता है, क़ाज़ियों को अहमक़ साबित करता है।
[18] वह बादशाहों का पटका खोल कर उन की कमरों में रस्सा बांधता है।
[19] इमामों को वह नंगे पाँओ अपने साथ ले जाता है, मज़बूती से खड़े आदमियों को तबाह करता है।
[20] क़ाबिल-ए-एतिमाद अफ़राद से वह बोलने की क़ाबिलियत और बुज़ुर्गों से इम्तियाज़ करने की लियाक़त छीन लेता है।
[21] वह शुरफ़ा पर अपनी हिक़ारत का इज़हार करके ज़ोर-आवरों का पटका खोल देता है।
[22] वह अंधेरे के पोशीदा भेद खोल देता और गहरी तारीकी को रौशनी में लाता है।
[23] वह क़ौमों को बड़ा भी बनाता और तबाह भी करता है, उम्मतों को मुन्तशिर भी करता और उन की क़ियादत भी करता है।
[24] वह मुल्क के राहनुमाओं को अक़ल से महरूम करके उन्हें ऐसे बयाबान में आवारा फिरने देता है जहाँ रास्ता ही नहीं।
[25] तब वह अंधेरे में रौशनी के बग़ैर टटोल टटोल कर घूमते हैं। अल्लाह ही उन्हें नशे में धुत शराबियों की तरह भटकने देता है।