[1] ऊ बात के बारे में जे तूँ लिखलऽ, ई अच्छा हे कि मरद अउरत के नञ छूअई।
[2] बाकि बेभिचार के डर के मारे हरेक मरद के मेहरारू, आउर हरेक अउरत के दूल्हा होय।
[3] दूल्हा अप्पन मेहारू के हक पूरा करे, आउर ओय सही मेहरारू ओ अप्पन दूल्हा के।
[4] मेहारू के अप्पन देह पर अखि तयार नञ बाकि ओकर दूल्हा के अखि तयार हे, ओय सही दूल्हो के अप्पन देह पर अखि तयार नञ, बाकि मेहारू के हे।
[5] तोहनी एक दोस रा से अलग नञ रहऽ, बाकि खाली कुछ बखत ले अपना स लाह से कि परारथाना लेल खाली बखत मिले, आउर फिन एक ज उरे रहु अयसन नञ होय कि तोहनी के संय म के अभाव के ओज ह से सैतान तोहनी के परखय।
[6] बाकि हम जे ई कहऽ हियो ऊ स लाह हे नञ कि आग्यां।
[7] हम ई चाहऽ हियो कि जयस न हम हिअई, ओय सही सभ आमदी होय; बाकि हरेक के परमेसर दने से खास-खास बरदान मिलल हइ; केकरो कोइ तरह के, आउर केकरो कोइ आउर तरह के।
[8] बाकि हम कुमार आउर बिधवावन के बारे में कहऽ हियो कि उनका लेल अय स ने रहनाय अच्छा हे, जयस न हम ही।
[9] बाकि जे ओ संज म नञ कर स कय, त बिआह करय; काहेकि बिआह करनाय कामुक रहे से अच्छा हे।
[10] जि नकर बिआह हो गेलइ हे, उनका हम नञ, बलुक परभु आग्यां दे हथ मेहारू अप्पन दूल्हा से अलग नञ होय-
[11] आउर जे अलगो हो जाय, त बिन दोस र बिआह कयले रहे चाहे अप्पन दूल्हा से फिन मेल कर ले-आउर नञ दूल्हा अप्पन मेहरारू के छोड़े।
[12] दोस रा से परभु नञ बाकि हम्हीं कहऽ हियो, जे कोइ भाइ के मेहरारू बिस वास नञ रखइत हो आउर उनकरा जोरे रहे में खुस होवे, तो ऊ ओकरा नञ छोड़े।
[13] जे अउरत के मरद बिसवास नञ रखइत हो, आउर ओकरा जोरे रहे से पस न्न होय; उ दूल्हा के नञ छोड़य।
[14] काहेकि अयसन दूल्हा जे बिसवास नञ रखऽ हे, ऊ मेहरारू के ओज ह से पवित्तर होबऽ हे, आउर अयसन मेहरारू जे बिसवास नञ रखय, दूल्हा के ओज ह से पवित्तर रहऽ हे, नञ त तोहर बाल-बच्चा असुद्ध होतइ, बाकि अब तो पवित्तर हइ।
[15] बाकि जे मरद बिसवास नञ रखऽ, जे ऊ अलग होय तो अलग होवे देहु, अयसन हालत में कोइ भाइ चाहे बहिन बन्ध् न में नञ। परमेसर हमरा मेल मिलाप लागी बोलय लथिान हे।
[16] काहेकि हे अउरत, तूँ का जानऽ हे कि तूँ अप्पन दूल्हा के उद्धार करा लेबऽ? आउर हे मरद, तूँ का जानऽ हे कि तूँ अप्पन मेहरारू के उद्धार करा लेबऽ?
[17] जयस न परभु हरेक के बाँटलथिान हे, आउर जयस न परमेसर हरेक के बोलय लथिान हे, ओय सही ऊ चलय। हम सब कलीसियावन में अय स ने बतावऽ ही।
[18] जे खतना कयल बोलावल गेल होय, ऊ बिना खतना के नञ बने। जे बिना खतना वाला बोलावल गेल होय, ऊ खतना नञ करावे।
[19] नत्न खतना कुछ हे आउर नञ बिना खतना वाला बाकि परमेसर के आंग्या के माननाइये स भकुछ हे।
[20] हरेक आमदी ज ऊन हालत में बोलावल गेल होय, ओकरे में रहय।
[21] जे तूँ दास के हालत में बोलावल गेल होय त फिकीर नञ करऽ, बाकि जे तूँ आजाद हो स कऽ, त अय स ने काम करऽ।
[22] काहेकि जे दास के हालत में परभु में बोलावल गेल हे, ऊ परभु के आजाद कयल हे। ओय सही जे आजाद के हालत में बोलावल गेल हे, ऊ मसीह के दास हे।
[23] तोहनी दाम देके मोल लेवल गेलऽ हे आमदी के दास नञ बनहू।
[24] हे भाइवन, जे कोइ जयस न हालत में बोलावल गेल होय, ऊ ओकरे में परमेसर के जोरे रहे।
[25] कुमारिय न के बारे में परभु के कोइ आग्यां हमरा नञ मिलल, बाकि बिस वास जोग होवे ला जयस न दया परभु हमरा पर कैलथिान हे, ओकरे मोताबिक स लाह दे हियो।
[26] हमरा स मझ में ई अच्छा हे कि आझकल्ह बेथा के मारे, आमदी ज य स न हे ओय स ने रहे।
[27] जे तोहनी के मेहरारू हइ, त ओकरा से अलग होवे के ज तन नञ करऽ। आउर जे तोहनी के मेहरारू नञ, त मेहरारू के खोज नञ करऽ।
[28] बाकि जे तूँ बिआहो करऽ, त पाप नञ; आउर जे कुमारी बिआहल जाय त कोइ पाप नञ। बाकि अय स ने के देह के तकलीप फ होतइ, आउर हम बचावे चाहऽ हियो।
[29] हे भाइवन, हम ई कहऽ हियो कि बखत कम कयल गेल हे, एहिसे चाही कि जि नका मेहरारू होय, ओ अयसन होय जइसे उनकर मेहरारू नञ;
[30] आउर रोवेवाला अय स न होय, जइसे रोवय नञ; आउर खुसी करेवाला अयसन होय, जइसे खुसी नञ करय; आउर किने वाला अयसन होय, जइसे उनका पाले कुछ हइये नञ।
[31] आउर ई दुनिया के जोरे बेवहार करे वाला अयसन होय, कि दुनिये के नञ हो जाय; काहेकि ई दुनिया के रिवाज आउर बेवहार बदलइत जा हइ।
[32] एहिसे हम ई चाहऽ हियो कि तोहनी के चिन्ता नञ होय। कुमार आमदी परभु के बात के फिकिर में रहऽ हे कि परभु के कइसे पस न्न रखय।
[33] बाकि बिआहल आमदी दुनिया के बात के फिकिर में रहऽ हे कि अप्पन मेहरारू के कइसे पस न्न रखय।
[34] बिआहल आउर कुमारियो में फरक हे: कुमारी परभु के सोच में रहऽ हे कि ऊ देह आउर आतमा दून्नो में पवित्तर होय, बाकि बिआहल दुनिया के चिन्ता में रहऽ हे कि अप्पन दुल्हा के पस न्न रखे।
[35] हम ई बात तोहनिये के फाय दा लागी कहऽ हियो, नञ कि तोहनी के फँसावे लेल, बलुक एहिसे कि जइसे सोभा दे हइ ओय सही कयल जाय, कि तूँ एक मन होके परभु के सेवा में लगल रहू।
[36] जे कोइ ई स मझे कि हम अप्पन ऊ कुमारी के हक मारइत ही, जेकर ज मानी ढलइत हे, आउर जरू रतो होय, त जयस न चाहे ओय स न करे, एकरा में पाप नञ, ऊ ओकर बिआह होवे दे।
[37] बाकि जे मन से मज गूत रहऽ हे, आउर ओकरा जरू रत नञ होय, बलुक अप्पन हिच्छा पर अखि तयार रखइत होय, आउर अप्पन मन में ई बात ठान लेले होय कि ऊ अप्पन कुमारी लइकी के बिनबिआहल रखतइ, ऊ अच्छा करऽ हे।
[38] एहिसे जे अप्पन कुमारी के बिआह कर दे हइ; ऊ अच्छा करऽ हे, आउर जे बिआह नञ कर दे हइ, ऊ अउरो अच्छा करऽ हे।
[39] जब ले कोइ अउरत के दूल्हा जि न्दा रहऽ हे, तबले ऊ ओकरा से बन्धाय ल हे बाकि जे ओकर दूल्हा मर जाय तो जेकरा से चाहे बिआह कर स कऽ हे, बाकि खाली परभु में।
[40] बाकि जयस न हे जे ओय सही रहे, त हमर बिचार में अउरो धन्न हे, आउर हम स मझऽ हियो कि परमेसर के आतमा हमरो में हइ।