[1] तोह़नी हमरे स न चाल चलऽ जयस न हम मसीह स न चाल चलऽ ही।
[2] हे भाइवन, हम तोहनी के बड़ाइ करऽ हियो कि सब बात में तोहनी हमरा धियान करऽ हु आउर जे परथा हम तोहनी के देलियो हे, ओक़र निबाह करऽ हु।
[3] बाकि हम चाहऽ हियो कि तोहनी ई जान लऽ कि हरेक आमदी के माथा मसीह हे, आउर अउरत के माथा मरद हे, आउर मसीह के माथा परमेसर हथ।
[4] जे मरद माथा झाँप के परारथाना चाहे भबिसबानी करऽ हे, ऊ अप्पन माथा के बेइज्ज त करऽ हे।
[5] बाकि जे अउरत उघाड़े माथा परारथाना चाहे भबिसबानी करऽ हे, ऊ अप्पन माथा के अप मान करऽ हे, काहेकि ऊ बेलमुण्ड होवे के बराबर हे।
[6] जे अउरत ओढ़नी नञ ओढ़े त बालो कटा ले जे अउरत लागी बाल कटानाय चाहे मुंड़न करानाय लाज के बात हे, त ओढ़नी ओढे़।
[7] हाँ, मरद के अप्पन माथा झाँप ना सही नञ, काहेकि ऊ परमेसर क़े स रू पआउर महिमा हे, बाकि अउरत मरद के महिमा हे।
[8] काहेकि मरद अउरत से नञ होलइ, बाकि अउरत मरद से होलइ हे
[9] आउर मरद अउरत लागी नञ सि रज ल गेलइ, बाकि अउरत मरद लागी सि रज ल गेलइ हे।
[10] एहिसे स रगदूत के ओज ह से अउरत के बाजि व हे कि अ खि तयार अप्पन माथा पर रखे।
[11] तइयो परभु में नञ त अउरत बिना मरद, आउर नञ मरद बिना अउरत के हे।
[12] काहेकि जइसे अउरत मरद से हइ, ओय सही मरद अउरत के ज रिये हइ; बाकि सभ चीज परमेसर से हइ।
[13] तोहनी अपनही बिचार करहु, का अउरत के उघाड़े माथा परमेसर से परारथाना करनाय सोभा दे हइ?
[14] का सोभाविक ढंगो से तूँ नञ जानऽ कि जे मरद के लम्बा बाल रखे, त ओकरा ला बेइज्ज ती हे।
[15] बाकि जे अउरत लम्बा बाल रखय त ओकरा ला सोभा हे, काहेकि बाल ओकरा ओढ़नी ला देल गेल हइ।
[16] बाकि जे कोइ बहस करनाय चाहे, त ऊ जान ले कि नञ हमर आउर नञ परमेसर के कलीसियवन के अइस न रिवाज हे।
[17] बाकि ई आग्यां देइत हम तोहनी के बड़ाइ नञ करऽ ही, एहिसे कि तोहनी के ए कट्ठा होवे से भल नञ, बाकि घाटा होवऽ हे।
[18] काहेकि पहिले त हम ई सुनऽ ही कि जब तोहनी कलीसिया में ए कट्ठा होवऽ हु त तोहनी में फूट होवऽ हे, आउर हम एकरा पर थोरे-थोरे बिस वासो करऽ ही।
[19] काहेकि गुटबाजीयो तोहनी में ज रूर होतइ, एहिसे कि जे लोग तोहनी में खाटी हथ ओ परगट हो जाय।
[20] ईसे तोहनी जे एक जगह में ए कट्ठा होवऽ हु त ई परभु-भोज खाय ला नञ,
[21] काहेकि खाय बखत एगो दोस रा से पहिले अप्पन खाना खा ले हे, ई तरे कोइ त भूखल रहऽ हे आउर कोइ मता जा हे।
[22] का खाय-पीये ला तोहनी के घर नञ? चाहे परमेसर के कलीसिया के बेकार बुझऽ हु, आउर जिनका भीरी नञ हे उनका लजावऽ हु? हम तोहनी से का कहियो? का ई बात में तोहनी के बड़ाइ करिअई? नञ, हम बड़ाइ नञ करऽ ही।
[23] काहेकि ई बात हमरा परभु दिया पहुँचलय, आउर हम तोहनियो के पहुँचा देलियो कि परभु यीसु जे रात पकड़वायल गेलथी, रोटी लेलथी,
[24] आउर ध् नवाद करके ओकरा तोड़लथी आउर कहलथी, “ई हमर देह हे, जे तोहनी ला हे: हमर इयाद ला ईहे कयल करहु।”
[25] इहे ढंग से ऊ खाय के बाद कटोरो लेलथी आउर कहलथी, “ई कटोरा हमर खून में नया वाचा हे: जब कहियो पीय, त हमर इयाद ला इहे कयल करहु।”
[26] काहेकि जब कहियो तोहनी ई रोटी खाय आउर ई कटोरा में से पीय हु, त परभु के मउत के जबले ऊ नञ आय थी, परचार करइत हु।
[27] एहिसे जे कोइ गलत ढंग से परभु के रोटी खाय चाहे उन्हकर कटोरा से पीये, ऊ परभु के देह आउर खून के दोषी होतइ।
[28] एहिसे आमदी अपनही आप के जाँच ले आउर ईहे ढंग से ई रोटी में से खाय, आउर ई कटोरा में से पीये।
[29] काहेकि जे खाय-पीये बखत परभु के देह के नञ चिन्हे, ऊ ई खाय आउर पीये से अपना उपर सजा लावऽ हे।
[30] ईहे मारे तोहनी में ढेरेक अबर आउर रोगी हथ, आउर ढेरेक मरियो गेलन।
[31] जे हम अपनही आप के जाँचतिअई त सजा नञ पय तिअई।
[32] बाकि प रभु हमनी के सजा देके हमनी के डाँटऽ हथ, एहिसे कि हमनी दुनिया के जोरे दोषी नञ बनिअई।
[33] एहिसे, ऐ हमर भाइवन, जब तोहनी खाय ला ए कट्ठा होवऽ हु त एक दोस रा ला रू कल करहु।
[34] जे कोइ भूखल होय त अप्पन घरे खा ले, जेकरा से तोहनी के ए कट्ठा होनाय सजा के ओज ह नञ हो। बाकि बात के हम आके ठीक करबइ।