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[1] जे हम आमदिय न आउर स रगदूतवन के बोली बोलिअई आउर परेम नञ रखिअई, त हम ठनठनाइत पीतर, आउर झंझनाइत झाल हिअई।

[2] आउर जे हम भबिसबानी कर स किअई, आउर सब भरम आउर सब तरह के गियान स मझिअई, आउर हमरा हीयाँ ले परतीत होय कि हम पहाड़ के घस का स कबई, बाकि परेम नञ रखिअई, त हम कुच्छो नञ।

[3] जे हम अप्पन स उँसे दउलत कंगालवन के खिया दिअई, चाहे अप्पन देह ज रावे लेल दे दिअई, आउर परेम नञ रखिअई त हमरा कुच्छो प फाय दा नञ।

[4] परेम स हनसील हे, आउर दयालु हे, परेम डाह नञ करऽ, परेम अप्पन बड़ाइ नञ करऽ, आउर घमण्ड नञ,

[5] ऊ डेहडंल नियर नञ करय, ऊ अप्पन भलाइ नञ चाहय, झुझलाव नञ, बुरा नञ मानय।

[6] कुकरम से खुस नञ होवऽ, बाकि सच से खुस होवऽ हे।

[7] ऊ सभ बात सह ले हे, सब बात के पशीतत करऽहे, सब बात के आसा रखऽहे, सब बात में धीरज धरऽ हे।

[8] परेम कहियो नञ हे, भबिसबानी होय, त खतम हो जयतइ; भासा हो, त खतम हो जयतइ; गियान हो, तो मेटा जयतइ।

[9] काहेकि हमनी के गियान अधूरा हे, आउर हमनी के भबिसबानी अधूरा;

[10] बाकि जब स रब सि द्ध हो जयतई, त अधूरा मेटा जयतइ।

[11] जब हम बुतरू हली, त हम बुतरू ए नियर बोलऽ हलिई, बुतरू ए नियन मन हलए, बुतरू ए नियर स मझ हलइ, बाकि जब सि यान हो गेलिअई त बुतरू के बात छोड़ देलिअई।

[12] अखनी हमरा अइना में धुँधला नियर देखाय दे हइ, बाकि तखनी सोझा-सोझी देखबई, अखनी हमर गियान अधूरा हे, बाकि तखनी अयसन पूरा ढंग से चिन्हवई, जयस न हम चिन्हल गेलिअई।

[13] बाकि अब परतीत, आसा, परेम ई तीनो अस्थायी हइ, बाकि एकरा में सबसे बड़ परेम हे।

1 कुरिनि्थयन — Chapters