[1] हीयाँ ले सुने में आवऽ हे कि तोहनी में बेभिचार होवइत हे, बलुक अयसन बेभिचार जे आन जातो में नञ होवऽ हे कि एगो आमदी अप्पन बाप के मेहरारू के रखऽ हइ।
[2] आउर तोहनी दुख त नञ करऽ, जेकरा से अयसन काम करे वाला तोहनी के बीच में से निकास ल जाय, बाकि घमण्ड करऽ हू।
[3] हम त देह के भाव से दूर हली, बाकि आतमा के भाव से तोहनी ज उरे होके जइसे हाजि री के हालत में अयसन काम करे वाला के बारे में ई आग्यां दे चुकली हे
[4] कि जब तोहनी के आउर हमर आतमा, हमर परभु यीसु के स मारथा के ज उरे ए कट्ठा होवे, त अयसन आमदी हमर प रभु यीसु के नाँव से
[5] देह के नास होवे ला सैतान के सँउप ल जाए, जेसे ओकर आतमा परभु यीसु के दिन में उद्धार पावय।
[6] तोहनी के घमण्ड करनाय अच्छा नञ, का तोहनी नञ जानहू कि थोरेक खमीर स उँसे सानल आँटा के खमीर कर दे हइ।
[7] पुरनका खमीर निकास के अपनही आप के सुद्ध करहु कि नयका सानल आँटा बन जाहू जेसे तोहनी अखमीरी हू। काहेकि हमरो प फस ह, जे मसीह हथ, बलिदान होलथी हे।
[8] एहिसे आवहु, हमनी परब में खुसी मनइअई, नञ त पुरान खमीर से आउर नञ बुराइ आउर बदमासी के खमीर से, बाकि सोझइ आउर स च्चाइ के अखमीरी रोटी से।
[9] हम अप्पन चिटठी में तोहनी के लिखलियो हे कि बेभिचारिय न के संगति नञ करिअहु।
[10] ई नञ कि तूँ एकदम ई दुनिया के बेभिचारी चाहे लोभिय न, चाहे अन्ध ार करे वाला, चाहे मूरती पूजे वाला के संगति नञ करहु काहेकि ई हालत में त तोहनी के दुनिया से निकस जाइये पड़तो।
[11] बाकि हमर कहनाय ई हे कि जे कोइ भाइ कहाके, बेभिचारी, चाहे लोभी, चाहे मूरती पूजे वाला, चाहे गारी देवे वाला, चाहे पि य क्कड़, चाहे अन्धार करे वाला होय, त ओकर संगति मत करिहऽ; बलुक अयसन आमदी के ज उरे खानो नञ खइय हु।
[12] काहेकि हमरा बाहिर वाला के नेयाय करे से का काम? का तोहनी भीतर वाला के नेयाय नञ करऽहू?
[13] बाकि बाहिर वाला के नेयाय परमेसर करऽ हथ। एहिसे ऊ कुकरमी के अप्पन बीच से निकास देहू।