[1] इन बातों के बाद यीशु ने अपने आप को तिबिरियास झील के किनारे शिष्यों पर प्रगट किया।
[2] शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, और गलील के काना नगर का नतनएल, ज़ब्दी के पुत्र और उनके शिष्यों में से दो और लोग वहाँ इकट्ठे थे।
[3] शमौन पतरस ने उन से कहा, "मैं मछली पकड़ने जाता हूँ।" उन लोगों ने उससे कहा, "हम भी तुम्हारे साथ चलते हैं।" इसलिए वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात उन लोगों ने कुछ न पकड़ा।
[4] भोर होते ही यीशु किनारे पर खड़े थे, तौभी शिष्यों ने न पहचाना कि यह यीशु हैं।
[5] तब यीशु ने उन से कहा, "हे बच्चो, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने के लिये हे?" उन लोगों ने उत्तर दिया, "नहीं।"
[6] यीशु ने उन से कहा, "नाव की दाहिनी ओर जाल डालो, तो पकड़ोगे।" तब उन्हों ने जाल डाला, लेकिन मछलियों की बहुतायत के कारण उसे खींच न सके।
[7] इसलिए उस शिष्य ने जिससे यीशु प्यार करते थे, पतरस से कहा, "यह तो प्रभु हैं।" शमौन पतरस ने यह सुनकर कि प्रभु हैं, कमर में अंगरखा कस लिया, क्योंकि वह नंगा था। वह झील में कूद पड़ा,
[8] लेकिन बाकी शिष्य नाव पर मछलियों से भरा हुआ जाल खींचते हुए आए, क्योंकि वे किनारे से अधिक दूर नहीं, कोई दो सौ हाथ पर थे।
[9] जब वे किनारे पर उतरे, तो उन्हों ने कोयले की आग, और उस पर मछली रखी हुई और रोटी देखी।
[10] यीशु ने उन से कहा, "जो मछलियाँ तुम ने अभी पकड़ी हैं, उन में से कुछ लाओ।"
[11] शमौन पतरस ने नाव पर चढ़कर एक सौ तिर्पन बड़ी मछलियों से भरा हुआ जाल किनारे पर खींचा, और इतनी मछलियाँ होने से भी जाल न फटा।
[12] यीशु ने उन से कहा, "आओ, खाना खाएँ।" लेकिन शिष्यों में से किसी को हिम्मत न हुई कि उन से पूछे कि वह कौन हैं? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही हैं।
[13] यीशु आए, और उन्हों ने शिष्यों को रोटी और मछली दी।
[14] यह तीसरी बार था कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद शिष्यों को दर्शन दिए थे।
[15] खाना खा लेने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, "शमौन, यूहन्ना के बेटे, क्या तुम इन से बढ़कर मुझ से प्रेम करते हो?" उसने यीशु से कहा, "हाँ प्रभु, आप तो जानते हैं कि मैं आप से प्रेम करता हूँ।" यीशु ने उससे कहा, "मेरे मेम्नों को चराओ।"
[16] उन्हों ने फिर दूसरी बार उससे कहा, "शमौन यूहन्ना के बेटे, क्या तुम मुझ से प्रेम करते हो?" उसने उन से कहा, "हाँ प्रभु, आप जानते हैं कि मैं आप से प्रेम करता हूँ।" उन्हों ने उससे कहा, "मेरी भेड़ों की रखवाली करो।"
[17] यीशु ने तीसरी बार उससे कहा, "शमौन, यूहन्ना के बेटे, क्या तुम मुझ से प्रेम करते हो?" पतरस उदास हुआ कि यीशु ने उसे तीसरी बार ऐसा कहा, कि क्या वह उन से प्रेम करता है। वह उन से बोला, "हे प्रभु, आप तो सब कुछ जानते हैं। आप यह भी जानते हैं कि में आप से प्रेम करता हूँ।" यीशु ने उससे कहा, "मेरी भेड़ों को चराओ।
[18] मैं तुम से सच-सच कहता हूँ, जब तुम जवान थे, तो अपनी कमर बान्धकर जहाँ चाहते थे, वहाँ जाते थे। किन्तु जब तुम बूढ़े होगे, तो अपने हाथ फैलाओगे, और दूसरा तुम्हारी कमर बान्धकर जहाँ तुम न चाहोगे, वहाँ तुम्हें ले जाएगा।"
[19] यीशु ने इन बातों से बता दिया कि पतरस कैसी मौत से परमेश्वर की महिमा करेगा। यह कहकर यीशु ने उससे कहा, "मेरे पीछे हो लो।"
[20] पतरस ने मुड़कर उस शिष्य को पीछे आते देखा, जिससे यीशु प्रेम रखते थे, और जिसने खाने के समय उनके सीने की ओर झुककर पूछा कि, "हे प्रभु, आपका पकड़वाने वाला कौन है?"
[21] उसे देखकर पतरस ने यीशु से कहा, "हे प्रभु, इसका क्या होगा?"
[22] यीशु ने उससे कहा, "यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुम्हें क्या? तुम मेरे पीछे आओ।"
[23] इसलिए भाइयों में यह बात फैल गई कि वह शिष्य न मरेगा। यीशु ने उससे यह नहीं कहा था, कि वह न मरेगा। उन्हों ने यह कहा था कि यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुम्हें इस से क्या लेना-देना।
[24] यह वही शिष्य है, जो इन बातों की गवाही देता है। उसी ने इन बातों को लिखा है। हम जानते हैं, कि उसकी गवाही सच्ची है।
[25] और भी बहुत से काम यीशु ने किए, यदि वे एक-एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ, कि जो किताबें लिखी जातीं वे दुनिया में न समातीं।