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[1] यीशु ये बातें कहकर अपने शिष्यों के साथ किद्रोन के नाले के पार में गए।

[2] उनका पकड़वाने वाला यहूदा भी उस जगह को जानता था, क्योंकि यीशु अपने शिष्यों के साथ वहाँ अक्सर जाया करते थे।

[3] तब यहूदा पलटन को और प्रधान पुरोहितों और फ़रीसियों की ओर से सेवकों को लेकर दीपक, मशालें और हथियार लेकर वहाँ आया।

[4] उनके साथ क्या होने वाला है यह जानते हुए, यीशु वहाँ से बाहर आए, और उन्हों ने उन लोगों से पूछा, "किसे ढूँढते हो?"

[5] उन्हों ने यीशु को उत्तर दिया, "यीशु नासरी को।" यीशु ने उन से कहा, "मैं ही हूँ।" उनका पकड़वाने वाला यहूदा भी उनके साथ खड़ा था।

[6] यीशु के यह कहते ही, कि मैं हूँ, वे पीछे हटे और जमीन पर गिर पड़े।

[7] तब यीशु ने फिर उन से पूछा, "तुम किसको ढूँढते हो?"

[8] वे बोले, "यीशु नासरी को।" यीशु ने उत्तर दिया, "मैं तो तुम से कह चुका हूँ कि वह मैं ही हूँ। यदि तुम मुझे ही चाहते हो तो इन्हें जाने दो।"

[9] यह ऐसा इसलिए हुआ कि वह बात पूरी हो, जो यीशु ने कही थी कि जिन्हें आप ने मुझे दिया है, उन में से मैंने एक को भी न खोया।

[10] शमौन पतरस ने अपने पास से तलवार निकाली और महायाजक के दास पर चलाकर उसका दाहिना कान काट दिया। उस दास का नाम मलखुस था।

[11] तब यीशु ने पतरस से कहा, "अपनी तलवार म्यान में रख। जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है, क्या मैं उसे न पीऊँ?"

[12] तब सिपाहियों, उनके अधिकारियों और यहूदियों के सेवकों ने यीशु को पकड़कर बान्ध लिया।

[13] वे पहिले उसे हन्ना के पास ले गए, क्योंकि वह उस साल के महापुरोहित काइफ़ा का ससुर था।

[14] यह वही काइफ़ा था, जिसने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिए एक पुरुष का मरना अच्छा है।

[15] शमौन पतरस तथा एक और शिष्य भी यीशु के पीछे चल पड़े। यह शिष्य महापुरोहित का जाना पहचाना था। वह यीशु के साथ महापुरोहित के आंगन में गया।

[16] परन्तु पतरस बाहर दरवाजे पर खड़ा रहा। तब वह दूसरा शिष्य जो महायाजक का जाना पहचाना था, बाहर निकला, और द्वारपालिन से कहकर पतरस को भीतर ले आया।

[17] उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, "क्या तुम भी इस मनुष्य के शिष्यों में से हो?" उसने कहा, "मैं नहीं हूँ।"

[18] दास और सेवक जाड़े के कारण कोयला जलाकर खड़े होकर आग ताप रहे थे। पतरस भी उनके साथ खड़ा हुआ ताप रहा था।

[19] तब प्रधान पुरोहित ने यीशु से उनके शिष्यों के विषय में और उनके उपदेश के विषय में पूछा।

[20] यीशु ने उसको उत्तर दिया, "मैंने जगत से खुलकर बातें की। मैंने सभाओं और आराधनालय में जहाँ सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं, सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा

[21] तुम मुझ से क्यों पूछते हो? सुनने वालों से पूछो कि मैंने उन से क्या कहा? देखो, वे जानते हैं कि मैंने क्या-क्या कहा"

[22] जब यीशु ने यह कहा, तो सेवकों में से एक ने जो पास खड़ा था, यीशु को थप्पड़ मारकर कहा, "क्या तू प्रधान पुरोहित को इस प्रकार उत्तर देता है?"

[23] यीशु ने उसे उत्तर दिया, "यदि मैंने बुरा कहा, तो मुझे बताओ कि क्या बुरा कहा, परन्तु यदि ठीक कहा, तो मुझे क्यों मारते हो?"

[24] हन्ना ने उन्हें बन्धे काइफ़ा प्रधान पुरोहित के पास, भेज दिया।

[25] तब उन लोगों ने पतरस से कहा, "क्या तुम भी उनके शिष्यों में से हो?" उसने इन्कार करके कहा, "मैं नहीं हूँ।"

[26] प्रधान पुरोहित के दासों में से एक जो उसके कुटुम्ब में से था और जिसका कान पतरस ने काट डाला था, बोला, "क्या मैंने तुम्हें यीशु के साथ बगीचे में न देखा था?"

[27] पतरस ने फिर इन्कार किया और तुरन्त मुर्गे ने बाँग दी।

[28] वे यीशु को काइफ़ा के पास से किले में ले गए। वह सुबह का समय था, परन्तु वे खुद किले के भीतर न गए ताकि अशुद्ध न हों, परन्तु फ़सह खा सकें।

[29] तब पिलातुस उनके पास बाहर निकल आया और उसने कहा, "तुम इस मनुष्य पर किस बात का दोष लगाते हो?"

[30] उन लोगों ने उसे उत्तर दिया, "यदि वह अपराधी न होता, तो हम उसे आपके हाथ न सौंपते।"

[31] पिलातुस ने उन से कहा, "तुम ही ले जाकर अपनी व्यवस्था (नियमशास्त्र) के अनुसार उसका न्याय करो।" यहूदियों ने उससे कहा, "हमें अधिकार नहीं कि किसी की जान लें।"

[32] यह इसलिए हुआ कि यीशु की वह बात पूरी हो जो उन्हों ने कही थी कि उनका मरना कैसा होगा।

[33] तब पिलातुस फिर किले के भीतर गया और यीशु को बुलाकर, उसने उन से पूछा, "क्या तुम यहूदियों के राजा हो?"

[34] यीशु ने जवाब में कहा, "क्या आप यह बात अपनी ओर से कहते हैं या दूसरों ने मेरे विषय में आप से कही?"

[35] पिलातुस ने उत्तर दिया, "क्या मैं यहूदी हूँ? तुम्हारी ही जाति और महापुरोहितों ने तुम्हें मेरे हाथ सौंपा हैं। तुम ने ऐसा क्या किया है?"

[36] यीशु ने उत्तर दिया, "मेरा राज्य इस जगत का नहीं। यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता। परन्तु अभी मेरा राज्य यहाँ का नहीं।"

[37] पिलातुस ने उन से कहा, "तो क्या तुम राजा हो?" यीशु ने उत्तर दिया, "तुम ठीक कहते हो, क्योंकि मैं राजा हूँ। मैंने इसलिए जन्म लिया, और मैं इसलिए जगत में आया हूँ कि सत्य पर गवाही दूँ। जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्द सुनता है।

[38] पिलातुस ने उन से कहा, "सत्य क्या है?" यह कहकर वह फिर यहूदियों के पास निकल गया और उन से कहने लगा, "में तो उसमें कुछ दोष नहीं पाता।

[39] परन्तु तुम्हारा यह रिवाज़ है कि मैं फ़सह में तुम्हारे लिए एक व्यक्‍ति को छोड़ दूँ। क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?"

[40] तब उन्हों ने फिर चिल्लाकर कहा, "यीशु को नहीं, परन्तु हमारे लिए बरअब्बा को छोड़ दो।" बरअब्बा एक डाकू था।

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