Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:51

[1] मेरे लिए तुमको पवित्र लोगों की इस सेवा के बारे में लिखना ज़रूरी नहीं है।

[2] क्योंकि मदद करने की तुम्हारी लालसा (चाहत) को मैं पहले ही से जानता हूँ। मैं मकिदुनिया के सभी चर्च (कलीसियाओं) में तुम्हारी तारीफ़ करता रहा हूँ कि एक साल पहले ही तुम यूनान (अखया) के लोग दान देने के लिए तैयार थे। सच पूछा जाए तो तुम्हारे जोश ने बहुत से विश्‍वासियों को दान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

[3] लेकिन मैं इन भाइयों को भेज रहा हूँ ताकि इस बारे में तुम्हारे लिए हमारा आनन्द बेकार न ठहरे। जैसा मैंने उन से कहा है, वैसे ही तुम तैयार रहो।

[4] इसलिए कि यदि कोई मकिदुनी मेरे साथ आने पर तुम्हें तैयार न पाए, तब हमें तुम्हारे ऊपर किए गए विश्‍वास के कारण शर्मिन्दगी उठानी पड़ेगी।

[5] इसलिए मैंने यह ज़रूरी समझा है, कि ये भाई पहले ही से तुम्हारे पास आएँ। और तुम्हारे प्रतिज्ञा किए हुए स्वेच्छित दान (या उदारता के फल) पहले ही से इकट्ठा कर लें।

[6] जो इन्सान बड़ी मात्रा (बड़े पैमाने) में बोता है, वह बड़ी मात्रा में काटेगा। जो उदारता (बड़े मन) से बोता है, वह ज़्यादा काटेगा भी।

[7] हर एक जन जैसा मन में इरादा करता है, उसी तरह से दान दे, न ही कुढ़-कुढ़ के, न दबाव से, क्योंकि परमेश्‍वर प्रसन्नता से देने वाले से प्रेम करते हैं।

[8] परमेश्‍वर सब तरह का अनुग्रह तुम्हें भरपूरी से दे सकते है। तब हर समय, सब कुछ जो तुम्हारी ज़रूरत है, पूरी होगी और हर एक भले काम के लिए तुम्हारे पास बहुत कुछ होगा।

[9] जैसा कि लिखा है, "उसने बहुत दूर बिखराया, उसने गरीबों को दिया, उसके अच्छे कामों को हमेशा तक याद किया जाएगा ।

[10] इसलिए परमेश्‍वर जो बोने वाले को बीज और खाने के लिए रोटी देते हैं, तुम्हे बीज मुहैया कराने के साथ उसे कई गुना बढ़ाएँगे। और तुम में उदारता की बड़ी फ़सल (धार्मिकता की फ़सल) पैदा करेंगे।

[11] तुम हर तरह से भरपूर किए जाओगे, ताकि हर मौके पर उदार बन सको और जब हम तुम्हारे दान को ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँचाए, तो वे परमेश्‍वर को धन्यवाद दें।

[12] क्योंकि इस आर्थिक सहायता का काम (सेवा) पवित्र लोगों की मात्र ज़रूरतों ही को पूरा नहीं करती हैं, लेकिन आनन्द के साथ परमेश्‍वर को बहुत धन्यवाद दिया जाना भी होता है।

[13] इस सेवा का नतीजा यह होगा कि लोग परमेश्‍वर की बड़ाई करेंगे। इसलिए कि सभी विश्‍वासियों के लिए तुम्हारी उदारता यह साबित करेगी कि तुम मसीह के सुसमाचार को अपनाकर उसके आधीन रहते हो और उनको (गरीब विश्‍वासियों) तथा सब के लिए उदारता से दान देते हो।

[14] वे लोग तुम्हें अपनी प्रार्थनाओं में याद करते हैं, इसलिए कि तुम पर परमेश्‍वर का बड़ा ही अनुग्रह है, तुम्हारी लालसा करते रहते हैं।

[15] जिस दान (अनुग्रह) की बड़ाई शब्दों में नहीं की जा सकती, उसके लिए परमेश्‍वर का धन्यवाद हो।

2 कुरिन्थियों — Chapters