[1] मैं चाहता था कि तुम मेरी थोड़ी-सी मूर्खता में धीरज रखते, हाँ वैसे तो तुम मेरे साथ धीरजवन्त हो।
[2] इसलिए कि मैं परमेश्वर की सी जलन तुम्हारे लिए रखता हूँ, मैंने एक पवित्र दुल्हन की तरह तुम्हारी बात यीशु से की है ताकि तुम्हें पवित्र कुवाँरी की तरह मसीह को सौंप दूँ।
[3] लेकिन इस बात का मुझे डर है कि जिस तरह से साँप ने हव्वा को छला था, तुम्हारे मन मसीह के प्रति शुद्ध और निष्कपट समर्पण से दूर न हो जाएँ।
[4] यदि कोई आकर तुम्हें प्रचार किए गए यीशु मसीह के अलावा किसी और यीशु के बारे में सिखाए या तुम्हें कोई और आत्मा मिले जो पहले नहीं मिला था या तुम्हारे द्वारा अपनाए गए सुसमाचार से भिन्न सुसमाचार सुनाए, तो तुम उसे बड़ी आसानी से स्वागत करने हो लेते हो
[5] बड़े से बड़े प्रेरितों से मैं अपने आपको कम नहीं समझता हूँ।
[6] मैं हालांकि संदेश देने में निपुण नहीं हूँ, फिर भी मैं ज्ञान में कम नहीं हूँ। हर तरह से सभी बातों में हम ने यह साफ़ साफ़ बता दिया है।
[7] वापस बिना कुछ अपेक्षा किए दीनता से सुसमाचार सुनाकर तुम्हें ऊपर उठाकर क्या मैंने गुनाह कर दिया?
[8] दूसरी कलीसियाओं (मण्डलियों या चर्चों) से आर्थिक मदद लेकर मैंने तुम्हारी सेवा की।
[9] तुम्हारे साथ रहते हुए जब मैं आवश्यकता में था, तब किसी पर भार न बना, क्योंकि मकिदुनिया से आए हुए भाइयों ने मेरी ज़रूरत को पूरा किया था। मैं न तुम्हारे ऊपर बोझ बना था और न ही बनूँगा।
[10] यदि मसीह की सच्चाई मुझ में है, तो अखाया देश में कोई मुझे इस घमण्ड से न रोकेगा।
[11] क्यों? क्या इसलिए कि मैं तुम लोगों से प्रेम नहीं करता? परमेश्वर को मालूम है कि मैं प्रेम करता हूँ।
[12] मैं जो कर रहा हूँ, करता रहूँगा, ताकि मैं हर एक ऐसे अवसर को खत्म कर सकूँ, जो वे लोग अपने घमण्ड की बातों में हमारे समान होने का दावा करते हैं।
[13] इसलिए कि ऐसे लोग झूठे प्रेरित, धोखेबाज़ कार्यकर्ता हैं, जो मसीह के प्रेरितों का रूप धारण करते हैं।
[14] इस में कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि शैतान खुद ज्योतिर्मय स्वर्गदूत का सा रूप ले लेता है।
[15] इसलिए इस में कोई बड़ी बात नहीं कि उसके (शैतान के) सेवक मसीह के सेवकों का रूप धारण करें। अन्त में उन्हें उनके बुरे कामों की सज़ा जो मिलनी चाहिए, ज़रूर मिलेगी।
[16] मैं फिर कहना चाहूँगा कि कोई यह न समझे कि मैं बेवकूफ़़ हूँ। लेकिन अगर समझता है, तो कम से कम मुझे बेवकूफ़ समझकर अपना ले, ताकि मैं भी थोड़ा बहुत घमण्ड कर सकूँ।
[17] ऐसा गर्व प्रभु की आज्ञा से नहीं है, लेकिन मैं एक मूर्ख की तरह कह रहा हूँ।
[18] इसलिए बहुत से लोग सांसारिक, शारीरिक, या जिस भी तरह से गर्व करते हैं, मैं भी करूँगा।
[19] इसलिए कि तुम इतने अक्लमन्द हो, तुम बेवकूफ़ों को सह लेते हो।
[20] यदि तुम्हें कोई गुलाम बना लेता है, शोषण करता है, या फँसा लेता है या अपने आप को बड़ा बनाता है या चपत लगाता है, तो तुम सह लेते हो।
[21] मुझे यह कहते हुए शर्म आती है कि ऐसा करने में हम बहुत कमज़ोर थे। लेकिन जो कोई भी किसी तरह का घमण्ड करने की हिम्मत करे, मैं भी उस बात के लिए घमण्ड कर सकता हूँ।
[22] क्या वे इब्री हैं? मैं भी हूँ। क्या वे इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ। क्या वे अब्राहम के वंश के हैं? मैं भी हूँ।
[23] क्या वे मसीह के सेवक हैं? - मैं पागल की तरह कह रहा हूँ। मैं उन से बढ़कर हूँ। ज्य़ादा मेहनत करने में, बार-बार जेल जाने में, कोड़े खाने में, बार-बार मौत के जोखिमों में
[24] यहूदियों द्वारा मैंने पाँच बार उन्तालीस, उन्तालीस कोड़े खाए।
[25] मुझ पर तीन बार डंडे पड़े, मुझ पर एक बार पथराव किया गया, तीन बार जहाज़ टूट गए थे, एक रात मैंने समुद्र में बितायी।
[26] बार-बार यात्रा में, नदियों के जोखिमों में, डाकुओं के जोखिमों में, अपनी जाति वालों से जोखिमों में, अन्य जातियों से जोखिमों में, शहर के खतरों में, जंगल के खतरों में, समुन्दर के खतरों में, झूठे भाइयों से खतरों में।
[27] कड़ी मेहनत करने में, बिना सोए रातें काटने में, भूख-प्यास में, सर्दी में बिना कपड़ों के
[28] इसके अलावा प्रतिदिन सब कलीसियाओं (मसीही विश्वासियों का झुण्ड या चर्च) का ख्याल (चिन्ता का बोझ) मेरे मन पर बना रहता है।
[29] किसकी कमज़ोरी से मैं कमज़ोर नहीं होता? किसके ठोकर खाने से मेरा मन नहीं दुखता?
[30] यदि मुझे गर्व करना ही है, मैं उन्हीं बातों के लिए करूँगा, जो मेरी कमज़ोरी को दिखाती हैं।
[31] प्रभु यीशु मसीह के पिता और परमेश्वर को जो सदा बड़ाई (स्तुति, प्रशंसा) के लायक हैं, यह पता है कि मैं झूठ नहीं कह रहा हूँ।
[32] मुझे पकड़ने के लिए दमिश्क में अरितास राजा के आधीन में नियुक्त गवर्नर ने शहर के दरवाज़ों पर चौकीदार तैनात किए थे।
[33] लेकिन मुझे रस्सी की बनी टोकरी में बैठाकर एक खिड़की से उतारा गया। इस तरह से मैं उसके हाथों से बच निकला।