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[1] मैं तीसरी बार तुम्हारे यहाँ आने पर हूँ। दो या तीन गवाहों के मुँह से हर एक बात की पुष्टि की जाए।

[2] पिछली बार जब मैं आया था, तब भी यही कह रहा था। अब जब कि मैं तुम्हारे बीच हाज़िर नहीं हूँ, जिन्होंने पहले पाप किया था, उन से और दूसरे सभी लोगों से मैं यह कहना चाहता हूँ कि यदि मैं फिर आऊँगा तो उन्हें नहीं छोडूँगा।

[3] क्योंकि तुम तो इस बात का सबूत चाहते हो, कि यीशु मसीह मुझ में होकर बोलते हैं। तुम से निबटने के लिए वह कमज़ोर नहीं हैं, लेकिन सामर्थी हैं।

[4] जब वह क्रूस पर चढ़ाए गए थे, तब कमज़ोर दिख रहे थे, लेकिन परमेश्‍वर की शक्‍ति (सामर्थ्य) से ज़िन्दा हैं। इसलिए कि हम भी उन में कमज़ोर हैं, लेकिन हम परमेश्‍वर की शक्‍ति से उनके (यीशु के) साथ जियेंगे (जीवित रहेंगे), ताकि तुम्हारी सेवा करते रहें।

[5] अपने आप को जाँचो कि विश्‍वास में हो या नहीं, अपने आपको परखो। क्या तुम्हें यह नहीं पता कि यीशु मसीह तुम में हैं? नहीं तो तुम जाँच में असफ़ल साबित हुए हो।

[6] मेरी आशा यह है कि तुम यह जान लो कि हम असफ़ल नहीं रहे हैं।

[7] हमारी प्रार्थना यह है कि तुम कुछ गलत मत करो, इसलिए नहीं कि तुम सिद्ध दिखो, लेकिन इसलिए कि भलाई करो, चाहे असफ़ल ही दिखो।

[8] इसलिए कि हम सच्चाई के विरोध में कुछ नहीं कर सकते, लेकिन सच्चाई के पक्ष में ही कर सकते हैं।

[9] जब हम कमज़ोर ठहरते हैं, लेकिन तुम बलवन्त हो, तब हमें खुशी मिलती है। हमारी प्रार्थना यह होती है कि तुम पूरी तरह से योग्य बन जाओ।

[10] इसलिए अभी मैं तुम्हारी गैरहाज़िरी में लिख रहा हूँ, ताकि जब मैं आऊँ, मुझे अपना अधिकार इस्तेमाल करके तुम्हारे साथ कठोरता से बर्ताव न करना पड़े - परमेश्‍वर ने मुझे तुमको बनाने (परिपक्‍व करने) के लिए दिया है, न कि बर्बाद करने के लिए

[11] आखिर में भाइयो-बहनो खुश रहो, सिद्ध हो जाओ, हिम्मत रखो, मेल से रहो, और प्रेम एंव शान्ति के परमेश्‍वर तुम्हारे संग होंगे।

[12] गले लगाते (पवित्र चुंबन से) एक दूसरे से मिलो।

[13] सभी पवित्र लोग तुम्हें सलाम कहते हैं।

[14] प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह, परमेश्‍वर का प्रेम और पवित्रात्मा की संगति तुम सभी के साथ रहे।

2 कुरिन्थियों — Chapters