[1] हे भाइयो-बहनो, हम अब परमेश्वर की उस महान कृपा (अनुग्रह) के बारे में बताना चाहते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं (चर्चों) पर हुआ है।
[2] हर तरह के क्लेश द्वारा उनकी जाँच में उनकी बड़ी खुशी और भारी गरीबी में उनकी उदारता बहुत बढ़ गयी।
[3] मैं उनके बारे में साक्षी देता हूँ कि उन्हों ने अपनी योग्यता से अधिक दिया और वह भी अपनी मर्ज़ी से।
[4] इस दान में और पवित्र लोगों की मदद करने में हिस्सेदार बनने के लिए उन्हों ने बार-बार हमसे बिनती की।
[5] हमारी आशा से बढ़कर उन लोगों ने पहले अपने आपको प्रभु के प्रति समर्पित किया और बाद में परमेश्वर की इच्छा से हमारे प्रति भी अपना समर्पण किया।
[6] इसलिए हम ने तीतुस को सलाह दी कि जैसी शुरूआत उसने पहले की थी, वैसी ही तुम्हारे बीच में इस दान के काम को भी पूरा कर ले।
[7] इसलिए जिस तरह तुम लोग हर दायरे में विश्वास, वचन, ज्ञान, सब तरह की कोशिश और उस प्रेम में जो हमसे रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी आगे बढ़ते जाओ।
[8] मैं आज्ञा की तरह नहीं लेकिन दूसरों के जोश से तुम्हारे प्यार की सच्चाई को परखने के लिए कहता हूँ।
[9] तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह को जानते हो कि वह धनी होने के बावजूद तुम्हारे लिए गरीब बन गए, ताकि उनकी गरीबी से तुम समृद्ध हो जाओ।
[10] इस बात में मेरी सलाह यह है, यह तुम्हारे लिए फ़ायदेमंद है कि जो कुछ तुम ने पिछले साल शुरू किया और जिसके चाहने में भी तुम ही प्रथम (पहले) थे।
[11] तुम्हारे लिए अच्छा यह है कि अब यह काम तुम पूरा करो। तुम्हारी शुरू में दिखायी गयी तत्परता तुम्हारे दान से मेल खाए और वह भी तुम्हारी पूंजी के अनुसार हो।
[12] क्योंकि जहाँ मन से दिया जाता है, वह ग्रहण योग्य होता है। जो तुम्हारे पास है उस आधार पर न कि इस पर कि किसी के पास क्या नहीं है।
[13] मैं यह नहीं कहना चाह रहा हूँ कि तुम्हारे दान से दूसरों को राहत मिले और तुम कमी झेलते बैठो।
[14] इस समय तुम्हारी अधिकता (समृद्धि) से उन लोगों की ज़रूरतें पूरी होती हैं, ताकि भविष्य में उन लोगों की अधिकता (समृद्धि) से तुम्हारी ज़रूरतें पूरी हो सकें और बराबरी हो जाए।
[15] जैसा कि लिखा है, जिसने ज़्यादा बटोरा (जमा किया) उसके पास बहुत ज्य़ादा नहीं बचा। जिसने कम बटोरा, उसके लिए उतना ही काफ़ी था (या कमी नहीं हुयी)।
[16] मैं परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि जिस तरह से तुम्हारे लिए मुझे चिन्ता है, ठीक उसी तरह तीतुस को भी है।
[17] उसने हमारी यह बिनती (सलाह) मान ली कि वह तुम लोगों से मिलेगा। सच्चाई तो यह है कि वह खुद तुम लोगों से मिलने को लालायित था।
[18] सुसमाचार सुनाने के सम्बन्ध में सभी कलीसियाओं में बहुचर्चित भाई को हम उसके साथ भेज रहे हैं।
[19] भेंट पहुँचाए जाने के लिए की गयी यात्रा पर जाने के लिए, उसे चर्च ने नियुक्त किया - एक सेवा जो प्रभु की महिमा करती है और हमारी मदद करने की लालसा को दिखाती है।
[20] ऐसा हम ने इसलिए किया ताकि स्वेच्छा-दान को लोगों तक पहुँचाने में सावधानी बरती जाए और कोई हमारे ऊपर ऊँगली न उठा सके।
[21] इसलिए कि हमें इस बात की चिन्ता है कि वही किया जाए जो न केवल प्रभु की दृष्टि में सही है। लेकिन मनुष्यों की दृष्टि में भी।
[22] हम ने उसके साथ अपने भाई को भी भेजा है जिसे बार-बार जाँचा गया और बहुत सी बातों में जोशीला है। अभी तुम्हारे ऊपर उसको बड़ा भरोसा होने की वजह से उसका जोश भी बढ़ गया है।
[23] यदि कोई तीतुस के बारे में पूछे तो वह मेरा साथी और तुम लोगों के लिए मेरा सहकर्मी है। यदि सवाल दूसरे भाइयों का है, तो वे मण्डलियों (चर्चों) के भेजे हुए मसीह को आदर देने वाले हैं।
[24] इसलिए अपना प्यार और हमारा वह घमण्ड जो तुम्हारे बारे में है, उसको मण्डलियों (चर्चों) के सामने सबूत के साथ दिखाओ।