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[1] हालांकि घमण्ड करना अच्छी बात नहीं है, लेकिन यह ज़रूरी है कि कुछ बातों में घमण्ड किया जाए। इसलिए मैं प्रभु द्वारा दिए गए दर्शनों और प्रकाशनों के बारे में बतलाऊँगा।

[2] मसीह में एक व्यक्‍ति को मैं जानता हूँ, जिसे चौदह साल पहले तीसरे स्वर्ग पर उठा लिया गया था। ऐसा देह सहित हुआ था या बिना देह, यह मुझे नहीं मालूम। परमेश्‍वर को इस बात की जानकारी है।

[3] और यह आदमी देह के साथ या देह के बगैर नहीं मालूम, यह तो परमेश्‍वर ही जानते हैं

[4] स्वर्ग पर उठा लिया गया और वहाँ ऐसी बातें सुनीं, जो बयान से बाहर तो है हीं, उन्हें बताना भी ठीक नहीं है।

[5] ऐसे व्यक्‍ति के बारे में तो मैं गर्व करूँगा, लेकिन जहाँ तक खुद का सवाल है, मैं अपनी कमज़ोरियों को छोड़ और किसी बात पर गर्व न करूँगा।

[6] यदि मैं गर्व करूँ भी तो मैं मूर्ख न ठहरूँगा, क्योंकि सच ही कहूँगा। फिर भी रूक जाता हूँ, ताकि ऐसा न हो कि जैसा कोई मुझे देखता है या मुझ से सुनता है, मुझे उससे बढ़कर समझे।

[7] परमेश्‍वर ने मुझे असाधारण प्रकाशन दिए। इसलिए उनकी वजह से मैं कहीं घमण्ड से न भर जाऊँ, मेरी देह (शरीर) में एक काँटा चुभाया गया। शैतान का एक दूत (संदेशवाहक) मुझे पीड़ित करता था, ताकि मैं अहंकार से भर न जाऊँ।

[8] मैं अलग-अलग तीन समयों में प्रभु के सामने गिड़गिड़ाया, "प्रभु इसे मुझ से दूर कर दीजिए।"

[9] लेकिन प्रभु यीशु बोले, "मेरा अनुग्रह तुम्हारे लिए काफ़ी है। इसलिए कि मेरी सामर्थ निर्बलता ही में ज्य़ादा काम करती है।" इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी कमजोरियों में गर्व करूँगा, ताकि मसीह की ताकत मुझ में बनी रहे।

[10] इसलिए मैं मसीह के लिए कमज़ोरियों, निन्दाओं, गरीबी, सताव और कठिनाईयों में सन्तुष्ट हूँ, क्योंकि जब कभी मैं कमज़ोर हूँ, तभी मैं बलवान होता हूँ।

[11] मैं मूर्ख तो बना, लेकिन तुम ही ने मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। तुम्हें तो मेरी बड़ाई करनी चाहिए थी। क्योंकि हालांकि मैं कुछ भी नहीं हूँ फिर भी उन बड़े से बड़े प्रेरितों में से किसी बात में कम नहीं हूँ।

[12] सचमुच बड़े धीरज के साथ एक प्रेरित के सबूत - चिन्ह, अद्भुत काम और सामर्थी काम तुम्हारे बीच दिखाए गए थे।

[13] किस बात में तुम दूसरे चर्चों (कलीसियाओं) से कम समझे गए, केवल इस बात में कि तुम पर मैं बोझ न हुआ? मेरी इस गलती के लिए मुझे माफ़ करो।

[14] तीसरी बार मैं तुम्हारे यहाँ आने पर हूँ। लेकिन मैं तुम पर बोझ न बनूँगा। इसलिए कि मैं तुम्हारी दौलत नहीं पर तुम्हें चाहता हूँ। बच्चों को अपने माता-पिता के लिए बचत नहीं करनी पड़ती है, लेकिन माता-पिता बच्चों के लिए बचत करते हैं।

[15] अब मैं खुशी से तुम्हारे लिए खर्च करूँगा और खर्च भी हो जाऊँगा जब कि मैं तुम लोगों से अधिक प्रेम करता हूँ, क्या मेरे लिए तुम्हारा प्रेम कम रहेगा?

[16] तुम में से कुछ तो यह मानते हैं कि मैं तुम पर बोझ न बना, फिर भी कुछ सोचते हैं कि चालाकी से मैंने तुम से फ़ायदा उठाया।

[17] जिन लोगों को मैंने तुम्हारे पास भेजा था, क्या उनके ज़रिए से मैंने तुम से कुछ लाभ उठाया?

[18] मैंने तीतुस को ज़बरदस्ती और साथ में दूसरे भाई को भेजा था। क्या तीतुस ने तुम्हें लाभ का निशाना बनाया था? क्या उसी की तरह हमारा व्यवहार नहीं था और हमारे कदम भी उसकी तरह नहीं थे?

[19] शायद तुम लोग यह समझ रहे होगे कि हम यह सब अपने बचाव के लिए कह रहे हैं। जो कुछ मैं कह रहा हूँ वह सब परमेश्‍वर को मौजूद जानकर मसीह में कह रहा हूँ। प्रिय भाइयो, जो हम करते हैं, वह सब तुम्हारी तरक्की के लिए है।

[20] मेरे भीतर, यह डर है कि कहीं ऐसा न हो, कि जैसा मैं चाहता हूँ, मेरे आने पर तुम्हें वैसा न पाऊँ। और तुम भी जैसी मुझ से आशा कर रहे हो, न पाओ। शायद तुम्हारे बीच झगड़ा-फ़साद, गुस्सा, विरोध, ईर्ष्या, चुगली, घमण्ड और बखेड़े हों।

[21] कहीं ऐसा न हो कि मेरे परमेश्‍वर फिर से तुम्हारे यहाँ आने पर मुझे दीन करें और मुझे बहुतों के लिए दुखी होना पड़े, जिन्होंने पिछले समयों में गुनाह (पाप) किया और गंदे काम, यौन-अनैतिकता और कामुकता को छोड़ा नहीं।

2 कुरिन्थियों — Chapters