Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:53

[1] क्या हम ने फिर अपनी बड़ाई करनी शुरू कर दी? या हमें दूसरे लोगों की तरह सिफ़ारिश की चिट्ठियाँ तुम्हारे पास लानी हैं या तुम से लेनी हैं?

[2] हमारे मनों पर लिखी हुयी चिट्ठी तो तुम ही हो। सब लोग उन्हें पहचानते और पढ़ते हैं।

[3] यह दिख ही रहा है कि तुम मसीह की चिट्ठी हो, जिसको हम सेवकों ने न तो स्याही से, न पत्थर की पटियाओं पर, लेकिन जीवित परमेश्‍वर के आत्मा से दिल की मांस रूपी पटियों पर लिखा है।

[4] मसीह में होकर परमेश्‍वर पर हमारा ऐसा ही भरोसा है।

[5] यह नहीं कि हम अपने आप में इस लायक हैं, हमारी योग्यता के स्त्रोत तो परमेश्‍वर हैं।

[6] उन्हीं ने हमें नयी वाचा के सेवक होने के योग्य बनाया। शब्द के सेवक नहीं लेकिन आत्मा (पवित्र आत्मा) के, क्योंकि शब्द मारता है, किन्तु आत्मा जीवन देता है।

[7] यदि मौत की वह वाचा जिसके अक्षर पत्थरों पर खोदे गए थे, इतने प्रकाश से दमक रही थी, कि मूसा के चेहरे पर के तेज के कारण जो कम होता जा रहा था, इस्त्राएली उसके चेहरे को देख तक नहीं सकते थे,

[8] तो आत्मा की वाचा और ज्य़ादा तेज से भरी क्यों न होगी?

[9] क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेज से भरी थी, तो धर्मी (निर्दोष) ठहराने वाली वाचा और अधिक तेज से भरी क्यों नहीं होगी?

[10] नयी वाचा की भव्य (अद्वितीय) महिमा से यदि पुरानी वाचा की महिमा की तुलना की जाए तो उसके सामने पुरानी वाचा ठहर ही नहीं सकती।

[11] क्योंकि जब तेजोमय की चमक कम होती जाती थी तो जो स्थिर (कायम) रहेगा, वह और ज़्यादा चमक (तेज) से क्यों नहीं दमकेगा?

[12] इसलिए ऐसी आशा रखकर हम हिम्मत से बोलते हैं।

[13] मूसा की तरह नहीं जिसने अपने चेहरे पर कपड़ा डाल लिया था, ताकि इस्त्राएली उस कम होते हुए तेज के समाप्त होने को न देख सकें।

[14] लेकिन उनकी अक्ल मारी गयी, क्योंकि आज तक मूसा द्वारा पहुँचाया नियमशास्त्र (आज्ञाएँ, नियम आदि) पढ़ते समय उनके मनों पर वही परदा पड़ा रहता है, लेकिन मसीह में वह उठ जाता है।

[15] आज तक जब कभी मूसा की किताब पढ़ी जाती है, तो उनके मनों पर परदा पड़ा रहता है।

[16] लेकिन जब कभी उनका दिल प्रभु की तरफ़ मुड़ेगा, तब वह परदा उठ जाएगा

[17] प्रभु तो आत्मा है और जहाँ कहीं प्रभु का आत्मा है, वहीं आज़ादी है।

[18] लेकिन जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का तेज (प्रकाश) इस तरह दिखता है, जिस प्रकार आइने में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा हैं हम उस तेजस्वी रूप में थोड़ा-थोड़ा बदलते जाते हैं।

2 कुरिन्थियों — Chapters