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[1] पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित होने के लिए बुलाया गया और भाई सोस्थिनेस की ओर से

[2] उस चर्च के नाम जो कुरिन्थुस में है, अर्थात् उनके नाम जो मसीह में अलग किए गए और अलग होने के लिए बुलाए गए हैं।

[3] हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे।

[4] मैं तुम्हारे बारे में अपने परमेश्‍वर का सदा धन्यवाद करता हूँ इसलिए कि परमेश्‍वर का यह अनुग्रह तुम पर मसीह यीशु में हुआ

[5] कि उन्हीं (यीशु) की वजह से तुम लोग हर बात में अर्थात् बोलने मे और सारे ज्ञान में बहुत बढ़ गए।

[6] यही यीशु मसीह की सच्चाई का सबूत है।

[7] तुम में किसी वरदान की कमी नहीं है और तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के दूसरी बार आने का इन्तज़ार भी करते हो।

[8] वह तुम्हें आखिर तक मजबूत रखेंगे कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने पर निर्दोष (बिना किसी आरोप के) खड़े रह सको।

[9] परमेश्‍वर विश्‍वसनीय हैं, जिन्होंने तुम्हें अपने बेटे, हमारे प्रभु यीशु मसीह के साथ हिस्सेदार होने के लिए (या संगति में) बुलाया है।

[10] हे भाइयो बहनो, मसीह यीशु जो हमारे प्रभु हैं, उनकी तरफ़ से मैं बिनती करता हूँ कि तुम एक मत रखो, तुम में फूट न हो और एक उद्देश्य रखकर एकता बनाए रहो।

[11] खलोए के परिवार के लोग मुझे बता चुके हैं, कि तुम लोग आपस में लड़ रहे हो।

[12] तुम में से कुछ लोग अपने आपको पौलुस, कुछ अपुल्लोस, कुछ कैफ़ा और कुछ मसीह का अनुयायी बता रहे हैं।

[13] क्या यीशु मसीह बँट गये हैं? क्या पौलुस के नाम में तुम्हें बपतिस्मा दिया गया था?

[14] परमेश्‍वर की बड़ाई हो कि क्रिस्पुस और गयुस को छोड़कर तुम में से किसी और व्यक्‍ति को मैंने बपतिस्मा नहीं दिया;

[15] ताकि कहीं ऐसा न हो कि कोई यह कहे कि उसका बपतिस्मा मेरे नाम से हुआ है।

[16] मैंने स्तिफ़नास के परिवार को भी बपतिस्मा दिया, इसके अलावा मुझे याद नहीं कि किसी और को मैंने बपतिस्मा दिया।

[17] इसलिए कि मसीह ने मुझे बपतिस्मा देने नहीं बल्कि सुसमाचार (खुशी की खबर) सुनाने को भेजा है-वह भी चतुराई दिखाने के लिए नहीं ताकि लोगों का ध्यान मसीह के क्रूस से हट जाए।

[18] क्रूस की सच्चाई नाश हो जाने वाले लोगों के लिए बेवकूफ़ी है, लेकिन हम मुक्‍ति पाने वालों के लिए परमेश्‍वर की सामर्थ्य (शक्‍ति) है।

[19] लिखा है कि "मैं ज्ञानियों के ज्ञान को नाश कर डालूँगा और बुद्धिमान लोगों की बुद्धिमानी को रद्द कर डालूँगा।"

[20] कहाँ रहा बुद्धिमान? कहाँ गया मूसा की किताबों का विशेषज्ञ? इस युग का दर्शनशास्त्री कहाँ है? क्या परमेश्‍वर ने इस दुनिया के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया है?

[21] परमेश्‍वर ने अपनी बुद्धिमानी के अनुसार कभी यह नहीं चाहा कि इस दुनिया के ज्ञान से लोग उन्हें जानें। परमेश्‍वर को यह ठीक लगा कि (हमारे) दिए गए संदेश की मूर्खता के द्वारा उनको पाप-क्षमा दें, जो विश्‍वास करेंगे।

[22] यहूदी लोग अद्भुत चिन्ह की माँग करते हैं और यूनानी ज्ञान की बातों के पीछे पड़े रहते हैं।

[23] लेकिन हम उस क्रूस पर चढ़ाए गए मसीह के बारे में बताते हैं जिससे यहूदी नाखुश होते हैं और जिसे दूसरे सभी लोग मूर्खता समझते हैं।

[24] जिन्हें बुलाया गया है, चाहे वे यहूदी हों या यूनानी उनके लिए मसीह परमेश्‍वर की सामर्थ्य और ज्ञान हैं।

[25] बेकार (मूर्ख) दिखने वाली परमेश्‍वर की योजना, इन्सानी योजना से बढ़कर और परमेश्‍वर की निर्बलता मनुष्यों के बल (इन्सानी ताकत) से कहीं ज़्यादा है।

[26] भाइयो-बहनो, याद करो, जब तुम्हें बुलाया गया, उस समय दुनिया की दृष्टि में तुम में से कुछ ही बुद्धिमान समझे जाते थे और कुछ ही दौलतमंद और प्रभावशाली जाने जाते थे।

[27] लेकिन परमेश्‍वर ने उन लोगों का चुनाव किया जो संसारिक दृष्टिकोण से मूर्ख समझे जाते थे ताकि ज्ञानवान शर्मिंदा किए जाएँ। और उन्हें भी जिन्हें संसार निर्बल (छोटा) समझता है, ताकि बलवान (बड़े समझे जाने वाले) लज्जित हो जाएँ।

[28] परमेश्‍वर ने इस दुनिया में नीच, तुच्छ और शून्य समझे जाने वालों को चुन लिया, ताकि जो बड़े समझे जाते हैं, उन्हें कुछ न समझा जाए।

[29] ताकि कोई भी व्यक्‍ति परमेश्‍वर के सामने अहंकार (घमण्ड) न करे।

[30] परमेश्‍वर ने तुम्हें यीशु से जोड़ दिया है जो हमारे लिए परमेश्‍वर की तरफ़ से ज्ञान, खराई, शुद्धता और छुटकारा ठहरे हैं।

[31] ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि "जो घमण्ड करे वह प्रभु में घमण्ड करे।"

1 कुरिन्थियों — Chapters