[1] भाइयो-बहनो, आत्मिक लोगों की तरह मैं तुम से बातें न कर सका। मैं तुम से शारीरिक या मसीह में शिशुओं की तरह ही बातें कर सका।
[2] ठोस खाने के बजाए, मैंने तुम्हें पीने के लिए दूध दिया था, क्योंकि तुम मेरा भोजन खाने के लायक नहीं थे। सच पूछा जाए, तो अभी भी तुम तैयार नहीं हो।
[3] अभी तक तुम शारीरिक हो। इसलिए जब कि तुम्हारे बीच अब तक ईर्ष्या और झगड़े हैं, तो तुम क्या अविश्वासियों की तरह पुराने स्वभाव में नहीं जी रहे हो?
[4] जब तुम में से एक कहता है, "मैं पौलुस का हूँ" दूसरा कहता है, "मैं अपुल्लोस का हूँ" तो क्या तुम संसारिक मनुष्य की तरह नहीं हो?
[5] पौलुस और अपुल्लोस कौन है? मात्र सेवक जिनके द्वारा तुम ने विश्वास किया है। प्रभु ने जो काम हमें दिया, हम ने किया।
[6] बोने का काम मैंने किया था और अपुल्लोस ने सींचने का, लेकिन बढ़ाने का काम परमेश्वर ने किया।
[7] इसलिए न बोने वाला कुछ है न सींचने वाला, क्योंकि बढ़ाने वाले तो परमेश्वर ही हैं।
[8] बोने वाले और सींचने वाले का मकसद एक ही होता है, लेकिन हर जन अपनी मेहनत के अनुसार मज़दूरी पाएगा।
[9] हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं। तुम परमेश्वर की खेती और रचना हो।
[10] मैंने परमेश्वर के अनुग्रह (असीम कृपा) की वजह से एक योग्य राजमिस्त्री की तरह नींव रखी। दूसरा उस के ऊपर बनाता जाता है। बनाते समय उसे चाहिए कि सावधानी बरते।
[11] यीशु मसीह को छोड़कर जो नींव हैं कोई दूसरी नींव नहीं रखी जा सकती है।
[12] यदि कोई इस नींव पर सोना, चाँदी, कीमती पत्थर, लकड़ी या घास-फूस रखता है
[13] तो हर एक का काम उस दिन दिख जाएगा, क्योंकि वह दिन प्रकट कर देगा। ऐसा आग के कारण होगा। आग ही जाँचेगी, कि हर एक जन ने कैसा काम किया है।
[14] नींव पर बना हुआ काम यदि बचा रहेगा तो बनाने वाले को मजदूरी मिलेगी।
[15] यदि वह काम जल जाएगा, तो बनाने वाला नुकसान उठाएगा। बनाने वाला तो बच जाएगा लेकिन इस तरह जैसे कोई लपटों से बच जाता है।
[16] क्या तुम्हें नहीं मालूम कि तुम परमेश्वर का भवन हो और परमेश्वर का आत्मा तुम्हारे भीतर रहता है।
[17] यदि कोई परमेश्वर के भवन को बर्बाद करे, परमेश्वर उस व्यक्ति को बर्बाद करेगा। इसलिए कि परमेश्वर का भवन पवित्र है और तुम्हीं वह भवन हो।
[18] गलत या झूठे विचारों को मन में जगह मत दो। वर्तमान में यदि कोई अपने आपको अक्लमन्द समझता है, तो उसे बेवकूफ़ बन जाना चाहिए, ताकि वह सचमुच में अक्लमन्द बन सके।
[19] परमेश्वर की निगाह में इस दुनिया का ज्ञान बेवकूफ़ी है। जैसा कि लिखा है, "वह बुद्धिमान को उसकी चतुराई में फँसा देते हैं"
[20] फिर से, "प्रभु बुद्धिजीवियों के तर्क को जानते हैं, कि वे सब बेकार हैं।"
[21] इसलिए कोई भी इन्सानी अगुवों पर घमण्ड न करे, क्योंकि सब कुछ तुम्हारा ही है।
[22] चाहे पौलुस हो या अपुल्लोस, कैफ़ा हो या संसार, जीवन हो या मौत, वर्तमान हो या भविष्य-सब कुछ तुम्हारा ही तो है।
[23] तुम मसीह के हो और मसीह परमेश्वर के हैं।