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[1] आपस में किसी दूसरे के साथ तुम्हारा कोई झगड़ा होने पर अपने विश्‍वासी-भाइयों के पास सुलझाने के बावजूद सांसारिक अदालत में क्यों जाते हो?

[2] क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि यीशु के लोग इस दुनिया का न्याय करेंगे? इसलिए यदि तुम लोग इस दुनिया का न्याय करने वाले हो, तो क्या मामूली झगड़ों को निपटा नहीं सकते हो?

[3] क्या तुम्हें नहीं पता कि तुम स्वर्गदूतों का भी न्याय करोगे? फिर ये हल्के-फुल्के झगड़ों (संसारिक मुद्दों) को क्यों नहीं सुलझा सकते?

[4] इसलिए यदि तुम्हारे यहाँ लड़ाई-झगड़े हैं, तो तुम उनके पास क्यों जाते हो, जो चर्च के आत्मिक लोग नहीं हैं?

[5] मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ ताकि तुम शर्म महसूस करो। क्या तुम्हारे चर्च में ऐसा कोई बुद्धिमान इन्सान नहीं, जो तुम्हारे झगड़ों को हल कर सके।

[6] इसके विपरीत एक मसीही दूसरे की खिलाफ़त में अविश्‍वासियों के सामने अदालत में जाता है।

[7] तुम्हारे बीच मुकदमें इस बात का सबूत हैं कि तुम पहले ही से हार चुके हो। अन्याय क्यों नहीं सह लेते? नुकसान क्यों नहीं सह लेते?

[8] लेकिन तुम खुद अन्याय (गलत) करते और धोखा देते हो, वह भी अपने भाइयों बहनों को।

[9] क्या तुम्हें नहीं मालूम कि दुष्ट लोग परमेश्‍वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे? धोखे में मत रहो, वेश्यावृत्ति में लगे, मूर्तिपूजा में लगे, व्यभिचारी, पुरूषगामी और समलिंगी,

[10] चोर, लालची, पियक्कड़, गाली देने वाले और अंधेर करने वाले परमेश्‍वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे।

[11] तुम में से कितने ऐसा ही जीवन जी रहे थे। लेकिन प्रभु यीशु के नाम में हमारे परमेश्‍वर के आत्मा से तुम धोए गए, शुद्ध किए गए और निर्दोष ठहराए गए।

[12] तुम लोग कहते हो, "सब कुछ की इज़ाज़त है" लेकिन (मैं कहता हूँ) सब कुछ फ़ायदेमंद नहीं है। "सब कुछ की अनुमति है" -लेकिन मैं किसी भी बात का गुलाम न बनूँगा।

[13] खाना पेट के लिए है और पेट खाने के लिए, लेकिन परमेश्‍वर दोनों ही को बर्बाद करेंगे। यह देह यौन अनैतिकता के लिए नहीं, लेकिन प्रभु के लिए और प्रभु देह के लिए हैं।

[14] परमेश्‍वर ने जिस तरह से यीशु मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह हमें भी अपनी सामर्थ से जिला उठाएँगे।

[15] क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं? क्या मैं मसीह के अंगों को लेकर वेश्या के अंग बनाऊँ?

[16] क्या तुम्हें नहीं मालूम जो वेश्या से सम्बन्ध करता है, उसके साथ जुड़ जाता है? इसलिए कि ऐसा कहा गया है, "दो जन एक देह हो जाएँगे।"

[17] लेकिन जो व्यक्‍ति प्रभु से जुड़ जाता है, वह उनके साथ एक आत्मा हो जाता है।

[18] व्यभिचार (यौन गुनाह) से भागो। कोई गुनाह देह पर इतना असर नहीं डालता है जितना यौन अनैतिकता। यह गुनाह अपनी देह के विरोध में है।

[19] क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है? वह तुम में है, तुम्हें परमेश्‍वर से मिला है और तुम अपने नहीं हो।

[20] तुम बड़ी कीमत देकर खरीदे गए थे। इसलिए तुम्हें अपनी देह से परमेश्‍वर को आदर देना चाहिए।

1 कुरिन्थियों — Chapters