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[1] इेसे ऐ दोष लगवैइया नँ कोई काहे नञ हु, तुँ निरू त्तर हऽ; काहेकि जे बात में तूँ दोस रा पर दील लगावऽ हे उहे बात में अपना आप के दोषी ठहरावँ हे, एहिसे कि तुँ जे दोष लगानऽ हु अप नेही उ काम करऽ हू।

[2] हम जानऽ हिअई कि अइस न-अइसन काम करे वाला पर परमेसर दन्‍न से ठीक-ठीक सजा के आग्यां होवऽ हे।

[3] हे आमदी, तूँ जे अइस न-अइसन काम करे वाला पर दोष बगावऽ हे आउर अप नेही ओ काम करऽ हे का ई स मझऽ हे कि तूँ परमेसर के सजा के आग्यां से बच जयबहू?

[4] का तूँ उनखर किरपा, आउर स हे के स क्ति आउर धीरज नियन धान के तुच्छ बुझऽ हे? का ई नञ स मझइत हे कि परमेसर के किरपा तोरा मन फिराव ला सिखावऽ हे?

[5] बाकि तूँ अप्पन कडि़य ल आउर अडिय ल मन के मारे ओकर किरोध् के दिन ला, जेकरा में परमेसर के स च्चा नेयाय परगट होतइ, अपना ला किरोध कमा रहलऽ हे।

[6] ऊ हरेक के ओकरा काम के मोताबिक देतथी:

[7] जे नीमन काम में असि्थार रहके महिमा, आउर आदर, आउर अमरता के खोज में हथ, ओखनी के ऊ अनन्त जि नगी देतथी,

[8] बाकि जे झगड़ालू हथ आउर सच के नञ मानऽ बलुक अध् रम के मानऽ हथ ओखनी के किरोध् आउर कोप पड़तई।

[9] आउर दुख आउर संकट सब आमदी के परान पर जे खराब करऽ हइ अय तई, पहिले य हूदी पर फिन यूनानी पर;

[10] बाकि महिमा आउर आदर आउर सुख-सानि्त सभ के मिलतई, जे भलाइ करऽ हे, पहिले य हूदी के फिन यूनानी के।

[11] काहेकि परमेसर केकरो तरफ्दारी नञ करऽ हू।

[12] एहिसे जि नकनी बिना बेबसथा पय ले पाप कयलन, ओ बिना बेबसथा के खतमो होतइ; आउर जि नकनी बेबसथा पाके पाप कयलन, उनका सजा बेबसथा के मोताबिक होतइ,

[13] (काहेकि) परमेसर के हीयाँ बेबसथा के सुने वाला धरमी नञ, बाकि बेबसथा पर चले वाला धरमी कहलय तइ।

[14] फिन जब आन जात के लोग जि नका पाले बेबसथा नञ सोभावे से बेबसथा के बात पर चलऽ हथ, तो बेबस था उनका पाले नञ होवइयो पर ओ अपना लेल अपनही बेबसथा हथ।

[15] ओ बेबस था के बात अप्पन-अप्पन हीया में लिखल देखावऽ हथ आउर उनकर मनो गवाही दे हइ, आउर उनकर बिचार आप स में दोष लगावऽ चाहे निरदोष बतावऽ हथ;)

[16] जे दिन परमेसर हमर सुभसमाचार के मोताबिक यीसु मसीह के ज रिये आमदिय न के गुप्त बात के नेयाय करतथी।

[17] जे तूँ य हूदी कहावऽ हे आउर बेबसथा पर भरोसा रखऽ हे, आउर परमेस र के बारे में घंमड करऽ हे,

[18] आउर उनखर हिच्छा जानऽ आउर बेबसथा के सिच्छा पाके उति्तम-उति्तम बात के खाटी जानऽ हे

[19] (आउर अपना पर भरोसा रखऽ हे कि हम अन्धवन के राह देखावे वाला, आउर अन्धाार में पड़ल के इजोर,

[20] आउर मुरू खवन के सि खावे वाला, आउर लइकमन के परचारक ही; आउर गियान, आउर स च के नमूना, जे बेबसथा में हे, हमार मिलल हे।

[21] ईसे का तूँ जे दोस रा के सि खावऽ हे, अपनही आप के नञ सि खावऽ? का तूँ जे चोरी नञ करे के उपदेस दे हे अपनही चोरी करऽ हे?

[22] तूँ जे कहऽ हे, “बेभिचार नञ करऽ,” का अप नही बेभिचार करऽ हे? तूँ जे मूरतवन से घिरना करऽ हे, का अप नी मनि्दलवन के लूटऽ हे?

[23] तूँ जे बेबसथा के बारे में घमंड़ करऽ हे का बेबसथा नञ माने के परमेस र के अप मान करऽ हे?

[24] “काहेकि तोरे मारे दोसर जात में परमेसर के नावँ के सि काय त कयल जा हे,” ज इस न लिखलो हे।

[25] जे तूँ बेबसथा पर चलऽ तो खतना से फाय दा तो हे, बाकि जो तूँ बेबस था के नञ मानऽ तो तोर खतना बिना खतना के हालत होतइ।

[26] एहिसे जो बिना खतना वाला आमदी बेबसथा के बिध के मानल करय, तो का ओकर बिन खतना के हालत खतना के बराबर नञ गिनल ज इतइ?

[27] आउर जे आमदी देह से बिन खतना रहय, जो ऊ बेबसथा के पूरा करय, तो का तोरा जे लेखा पावे आउर खतना कयल जाइयो पर बेबसथा के नञ मानल करऽ हे, दोषी न बतय तो?

[28] काहेंकि य हूदी ऊ नञ जे प रगट में य हूदी हे आउर नञ ऊ खतना हे जो परगट में हे आउर देह में हे।

[29] बाकि य हूदी ओही हे जो मन में हे आउर खतना ओही हे जो हिया के आउर आतमा में है, नञ कि लेखा के अइसन के बड़ाई आमदिय न दन्‍न से नञ, बाकि परमेसर दन्ने से होव हे।

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