[1] हरेक आमदी स रकारी अधिकारी के अधीन रहय, काहेकि कोइ अधिकार अय स न नञ जे परमेसर के दन्न से नञ हो, आउर जे अधिकार हइ, ओ परमेसर के दन्ने से काय म करल हइ।
[2] एहिसे जे कोइ अधिकार के बिरोध् करऽ हे, ऊ परमेस र के विधि के सामना करऽ हे, आउर सामना करेवाला सजा पय तन।
[3] काहेकि हाकिम अच्छा काम के नञ, बाकि खराब काम लागी डर के ओज ह हे, ईसे जे तोहनी हाकिम से निडर रहे चाहऽ हे, त खाटी काम करहु, आउर उनका दन्न से तोहनी के बड़ाइ होतइ;
[4] काहेकि ऊ तोहनी के भलाइ लेल परमेसर के सेवक हे। बाकि जे तोहनी बुराइ करवहु, त डेरा, काहेकि ऊ तरवार बेरथा लेले नञ; आउर परमेसर के सेवक हे कि उनकर किरोध् के मोताबिक खराब काम करेवाला के सजा देवे।
[5] एहिसे बस में रहनाय नञ खाली ऊ किरोध् के डर से जरू री हे, बलुक बुदि्धयो इहे गवाही दे हइ।
[6] एहिसे चुंगियो दहु काहेकि सास न करे वाला परमेसर के सेवक हथ आउर हरमेसा इहे काम में लगल रहऽ हथ।
[7] एहिसे हरेक के बाजि व चुकावल करहु जेकरा चुंगी चाही, ओकरा चुंगी दहु जेकरा लगान चाही, ओकरा लगान दहु जेकरा से डरे के चाही, ओकरा से डेरा, जेकर आदर करे के चाही, ओकर आदर करहु।
[8] अपना में परेम के छोड़ आउर कोइ बात में केकरो करज दार नञ बनहु काहेकि जे दोस रा से परेम रखऽ हे, उहे बेबसथा पूरा कय लक हे।
[9] काहेकि ई कि “बेभिचार नञ करनाय, हतिया नञ करनाय, चोरी नञ करनाय, लालच नञ करनाय,” आउर एकरा छोड़ आउर कोइयो आग्यां हो त सब के सार ई बात में पाय ल जा हे, “अप्पन पड़ोसी से अपने नीयर परेम रखऽ।”
[10] परेम पड़ोसी के कुछ बुराइ नञ करऽ, जे एहिसे परेम रखनाय बेबसथा के पूरा करनाय हे।
[11] बखत के चिन्ह के अय स ने करहु, एहिसे कि अब तोहनी लेल नींद से ज ग जाय के बखत आ गेलइ हे काहेकि ज खनी हमनी बिसवास कय लिअई हल, तखनी के बिचार से अब हमनी के उद्धार नगीच हे।
[12] रात ढेर बीत गेल हइ, आउर दिन निकसे पर हइ; एहिसे हमनी अन्हार के काम के तियारा के इजोर के हथिायार बाँध लिअई।
[13] जयस न दिन के सोहात दे हे, ओय सही हमनी सोझ चाल चलिअई, नञ कि खेलवाड़ आउर पि य क्कडइ में, नञ बेभिचार आउर लुचप न में, आउर नञ झगड़ा आउर डाह में।
[14] बलुक परभु यीसु मसीह के पहिर लऽ, आउर देह के लालसा के पूरा करे के उपाय नञ करहु।