Listen to this chapter • 0:49
[1] यहोवा राजा है; उसने माहात्म्य का पहरावा पहना है; यहोवा पहरावा पहने हुए, और सामर्थ्य का फेटा बाँधे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का।
[2] हे यहोवा, तेरी राजगद्दी अनादिकाल से स्थिर है, तू सर्वदा से है।
[3] हे यहोवा, महानदों का कोलाहल हो रहा है, महानदों का बड़ा शब्द हो रहा है, महानद गरजते हैं।
[4] महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है।
[5] तेरी चितौनियाँ अति विश्वासयोग्य हैं; हे यहोवा, तेरे भवन को युग-युग पवित्रता ही शोभा देती है।
भजन संहिता — Chapters
10:5821:3431:0241:1151:5161:1572:1581:1392:39102:35111:04121:13130:54141:04150:50161:28172:14186:19192:05201:11211:45224:08230:57241:21252:34261:24272:21281:33291:27301:44313:33321:47332:35342:26353:52361:32374:42382:30392:08402:47411:46422:08431:02443:11452:31461:28471:10481:40492:39502:44512:22521:25531:12540:57553:12562:00571:48581:31592:25601:29611:03621:46631:31641:26652:02662:18671:00685:00694:33700:49713:20722:35733:14743:05751:20761:28772:24788:28792:02802:24811:57820:57832:05841:46851:29862:20870:56882:12895:58902:14911:59921:49930:49942:39951:28961:48971:35981:19991:221000:441011:171023:231032:391044:251054:551065:291074:421081:431093:281101:061111:211121:191130:551140:581152:041161:581170:231182:5811918:591200:441210:481220:561230:451240:501250:461260:491270:511280:461290:591300:571310:381322:051330:331340:261352:221362:181371:161381:151392:521401:391411:321421:091431:491442:081452:221461:241472:181481:441491:091500:57