[1] हे धर्मियों, यहोवा के कारण जयजयकार करो। क्योंकि धर्मी लोगों को स्तुति करना शोभा देता है।
[2] वीणा बजा-बजाकर यहोवा का धन्यवाद करो, दस तारवाली सारंगी बजा-बजाकर उसका भजन गाओ। (इफि. 5:19)
[3] उसके लिये नया गीत गाओ, जयजयकार के साथ भली भाँति बजाओ। (प्रका. 14:3)
[4] क्योंकि यहोवा का वचन सीधा है ; और उसका सब काम निष्पक्षता से होता है।
[5] वह धार्मिकता और न्याय से प्रीति रखता है; यहोवा की करुणा से पृथ्वी भरपूर है।
[6] आकाशमण्डल यहोवा के वचन से, और उसके सारे गण उसके मुँह की श्वास से बने। (इब्रा. 11:3)
[7] वह समुद्र का जल ढेर के समान इकट्ठा करता ; वह गहरे सागर को अपने भण्डार में रखता है।
[8] सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें!
[9] क्योंकि जब उसने कहा, तब हो गया; जब उसने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया।
[10] यहोवा जाति-जाति की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश-देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है।
[11] यहोवा की योजना सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएँ पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी।
[12] क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो!
[13] यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है;
[14] अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहनेवालों को देखता है,
[15] वही जो उन सभी के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।
[16] कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।
[17] विजय पाने के लिए घोड़ा व्यर्थ सुरक्षा है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है।
[18] देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करुणा की आशा रखते हैं, बनी रहती है,
[19] कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उनको जीवित रखे ।
[20] हम यहोवा की बाट जोहते हैं; वह हमारा सहायक और हमारी ढाल ठहरा है।
[21] हमारा हृदय उसके कारण आनन्दित होगा, क्योंकि हमने उसके पवित्र नाम का भरोसा रखा है।
[22] हे यहोवा, जैसी तुझ पर हमारी आशा है, वैसी ही तेरी करुणा भी हम पर हो।