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[1] यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;

[2] प्रातःकाल को तेरी करुणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,

[3] दस तारवाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।

[4] क्योंकि, हे यहोवा, तूने मुझ को अपने कामों से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूँगा।

[5] हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े है! तेरी कल्पनाएँ बहुत गम्भीर है; (प्रका. 15:3, रोम. 11:33,34)

[6] पशु समान मनुष्य इसको नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:

[7] कि दुष्ट जो घास के समान फूलते-फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिए होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएँ,

[8] परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।

[9] क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हाँ तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तितर-बितर होंगे।

[10] परन्तु मेरा सींग तूने जंगली साँड़ के समान ऊँचा किया है; तूने ताजे तेल से मेरा अभिषेक किया है।

[11] मैं अपने शत्रुओं पर दृष्टि करके, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूँ।

[12] धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे , और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे।

[13] वे यहोवा के भवन में रोपे जाकर, हमारे परमेश्वर के आँगनों में फूले फलेंगे।

[14] वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,

[15] जिससे यह प्रगट हो, कि यहोवा सच्चा है; वह मेरी चट्टान है, और उसमें कुटिलता कुछ भी नहीं।

भजन संहिता — Chapters