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[1] “इपि फसुस के कलीसि या के दूत के ई लिखऽ: “जे सातो तारेगन अप्पन दाहिना हाँथा में लेले हइ, आउर सोना के सातो दीय टवन के बीच में फिरऽ हे, ऊ ई कहऽ हे कि

[2] हम तोहर काम, आउर तोहर मेहनत, आउर तोहर धीरज के जानऽ ही; आउर ईहो कि तूँ खराब आमदी के देख नञ स कऽ, आउर जे अपना आप के परेरित कहऽ हथ, आउर हथ नञ, उनका तूँ परख के झूट्‌ठा पाय लऽ।

[3] तूँ धीरज धरऽ हे, आउर हमर नाँव लागी दुख उठावइत-उठावइत थाकलऽ नञ।

[4] बाकि हमरा तोहर खिलाप फ ई कहना हे कि तूँ अप्पण पहिलका परेम छोड़ देल्हु हे।

[5] एहिसे इया द करहु कि तूँ काहाँ से गिरलऽ हे, आउर मन फिराव आउर पहिले के ज इस न काम करऽ। जे तूँ मन नञ फिरय बहु, त हम तोहनी भीरी आके तोहर दीय ट के ओकर जगह से हटा देबो।

[6] बाकि हाँ, तोरा में ई बात त हे कि तूँ नीकुलइय वन के काम से घिरना करऽ हे, जेकरा से हम्हुं घिरना करऽ ही।

[7] जेकरा कान होय ऊ सुन लेवे कि आतमा कलीसियवन से का कहऽ हे। जे जीत पय तई हम ओकरा ऊ जि नगी के फेड़ में से जे परमेसर के स रगलोक में हइ, फर खाय ला देबई।

[8] “स्मुरना के कलीसि या के दूत के ई लिखऽ: “जे पहिला आउर आखिरी हे, जे मर गेल हल आउर जे जि न्दा हो गेलइ हे, ऊ ई कहऽ हथ कि

[9] हम तोहर कष्ट आउर गरीबी के जानऽ ही (बाकि तूँ ध् निक हे), आउर जे लोग अपना आप के य हूदी कहऽ हथ आउर हथ नञ, बाकि सैतान के स भा हइ, उनकर सि काय तो के जानऽ ही।

[10] जे दुख तोरा झेले होतो, ओकरा से नत डरऽ। काहेकि देखहु, सैतान तोहनी में से कुछ के जेहल भेजे पर हे जेसे तोहनी परखल जाहु आउर तोहनी के दस दिन ले कष्ट उठावे होतो। परान देवे तक ले बिस वासी रहऽ, त हम तोरा जि नगी के मुकुट देवो।

[11] जेकरा कान होय ऊ सुन लेवे कि आतमा कलीसियवन से का कहऽ हे। जे जीत ज य तन, ओकरा दोसर मउत से नोकसान नञ पहुँचतई।

[12] “पि रगमुन के कलीसि या के दूत के ई लिखऽ: “जि नका पाले दूधारी आउर तेज तरवार हे, ऊ कहऽ हे कि

[13] हम ई जानऽ ही कि तूँ हुआँ रहऽ हे ज हँ सैतान के सिंघास न हे तोहनी हमर नाँव पर असि्थार रहऽ हे, आउर हमरा पर बिसवास करे से ऊ दिनों में पीछू नञ हटलऽ जे में हमर बिस वास जोग गवाह अनि्तपास, तोहनी बीच ऊ जगह पर मारल गेलइ ज हँ सैतान रहऽ हे।

[14] बाकि हमरा तोहनी के खिलाप फ कुछ बात कहे के हइ, काहेकि तोहनी हीयाँ कुछ अइसन हथ, जे बिलाम के सीख के मानऽ हथ, जे बालाक के इस राय लिय न के आगू ठोकर के ओज ह रखनाय सि खय लक कि ओ मुरूत पर चढ़ावल चीज वन के खाय आउर बेभिचार करय।

[15] ओइस ही तोहनी हीयाँ कुछ अइसन हथ, जे नीकुलइवन के सीख मानऽ हथ।

[16] ईसे मन फिरावऽ, नञ त हम तोहनी भीरी हाली से आके अप्पन मुँह के तरवार से उनकरा जोरे लड़वई।

[17] जेकरा कान हो ऊ सुन लेवे कि आतमा कलीसियवन से का कहऽ हे। जे जीत ज य तइ, ओकरा हम गुपुत मन्‍ना में से देबई, आउर ओकरा एगो उज्जर पत्थारो देबई आउर ऊ पत्थार पर एगो नाँव लिखल होतइ, जेकरा पावेवाला के अलावे ओकरा आउर कोइ नञ जानतइ।

[18] “थुआतीरा के कलीसि या के दूत के ई लिखऽ: “परमेसर के बेटा जेकर आँख ध् ध् कइत आग निय न, आउर जेकर पइर चमकइत पीतर नियर हइ, ऊ ई कहऽ हथ कि

[19] हम तोहनी के काम, तोहनी के प रेम आउर बिसवास आउर सेवा आउर धीरज के जानऽ ही आउर ईहो कि तोहनी के पि छुलका काम पहिलका से बढ़के हइ।

[20] बाकि हमरा तोहनी के खिलाप फ इ कहे के हइ कि तोहनी ऊ मेहरारू इजेबेल के रहे दे हु जे अपना आप के भबिस वक्तिन कहऽ हे, आउर हमर दासवन के बेभिचार करे आउर मुरू तिय न के आगे चढ़ावल चीज वन के खाय सि खाके भरमावऽ हे।

[21] हम ओकरा मन फिरावे लागी मउका देली, बाकि ऊ अप्पन बेभिचार से मन फिरावे नञ चाहऽ हइ।

[22] देखऽ हम ओकरा रोग के बिछौना पर सुतावऽ ही; आउर जे ओकरा जोरे बेभिचार करऽ हथ जो ऊहो ओकरा ज इस न काम में मन नञ फिराइतइ त हम ऊ लोग के बड़ दुख में डालबई।

[23] हम ओकर बचवन के मार देबई तब सब कलीसि य वन जान लेतई कि हीया आउर मन के परखवैइया हम्ही हिअई, आउर हम तोहनी में से हरेक के ओकर काम के मोताबिक बदला देबई।

[24] बाकि हम थुआतीर के बाकि लोग से, जेतना ई सीख के नञ मानऽ आउर ऊ बात के जेकरा सैतान के गहिर बात कहऽ हथ नञ जानय, ई कहऽ हियो कि हम तोहनी पर बोझ नञ देबो।

[25] बाकि हाँ, जे तोहनी भीरी हे ओकरा हमरा आवे तकले ध् इले रहु।

[26] जे जीत ज ए तइ आउर हमर काम के मोताबिक आखिर ले करइत रहे, हम ओकरा देस जात के लोग पर अखि तयार देवई,

[27] आउर ऊ लोहा के राज दण्ड लेले ओखनी पर राज करतइ, जइसे कुम्हार के मट्‌टी के बरतन चूर-चूर हो जा हइ: हम्हुं अइस ने अ खि तयार अप्पन पिता से पय ली हे

[28] आउर हम ओकरा भुरू कवा तारा देवई।

[29] जेकरा कान होय ऊ सुन लेवे कि आतमा कलीसियवन से का कहऽ हे।

परकासित वाक — Chapters