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[1] तब हम एगो ज नावर के समुन्दर में से निकस ते देखली, जेकरा दस गो सींग आउर सात गो माथा हलइ। ओकर सींगवन पर दस गो मुकुट, आउर ओकर माथावन पर परमेसर के सिकायत के नाँव लिखल हल।

[2] जे ज नावर हम देखली ऊ चीता ज कत हलइ; आउर ओकर पइर भालू अइस न, आउर मुँह सिंह अइसन हलइ। ऊ अज गर अप्पन स मारथा आउर अप्पन सिंहास न आउर बड़ अखि तयार ओकरा दे देलकय।

[3] हम ओकर माथावन में से एगो पर अइसन बड़ घाव देखली मानो ऊ मरे पर हे, फिन ओकर जानलेवा घाव अच्छा हो गेलइ, आउर सँऊसे धरती के लोग ऊ ज नावर के पीछू-पीछू तज्जुब करइत चललन।

[4] लोग अज गर के उपासना कयलन, काहेकि ऊ ज नावर के अप्पन अखि तयार दे देलकय हल, आउर ई कहके ज नावर के उपास ना कय लक, “ई ज नावर के ज इस न के हइ? कउन एकरा से लड़ स कऽ हे?”

[5] डींग हाँके आउर सिकायत करे लेल ओकरा एगो मुँह देल गेलइ, आउर बिया लीस महीना ले काम करे के अखि तयार देल गेलइ।

[6] ऊ परमेसर के सि काय त करे लागी मुँह खोललकय कि ओकर नाँव आउर ओकर तम्बू माने सरग के रहवैइया के सिकायत करे।

[7] ओकरा ईहो अखि तयार देल गेलइ कि स न्त लोग से लड़े आउर उनका पर जीत पावे, आउर ओकरा हरेक कुल आउर लोग आउर भासा आउर देस पर अखि तयार देल गेलइ।

[8] धरती के ओ सभ रहवैइया ऊ ज नावर के उपासना करतई जि नकर नाँव ऊ मेमना के जि नगी के किताब में लिखल नञ गेलइ जे दुनिया के सि रज न के बखत से मारल गेल हइ।

[9] जिनका कान हो ऊ सुनथा।

[10] जेकरा कइद में पडनाय हे, ऊ कइद में पड़तई जे तरवार से मारतइ, जरू री हइ कि ऊ तरवार से मारल जएतई। सन्त लोग के धीरज आउर आस्था ए करे में हे।

[11] फिन एगो आउर ज नावर के धरती में से निकस इत देखली, ओकरा मेमना ज इस न दूगो सींग हल, आउर ऊ अज गर के निय न बोलऽ हल।

[12] ऊ पहिलका ज नावर के सँऊसे अधिकार ओकरा सामने काम में लावऽ हल; आउर धरती आउर ओकर रहवैइया से ऊ पहिलका ज नावर के, जेकर जानलेवा घाव अच्छा हो गेलइ हल, उपासना करावऽ हल।

[13] ऊ बड़का-बड़का चिन्हासी देखावऽ हल, हीयाँ ले कि आमदिय न के सामने सरग से धरती पर आग बरसा दे हल।

[14] उ चिन्हासी के मारे, जेकरा ऊ ज नावर के सामने देखावे के अखि तयार ओकरा देल गेलइ हल, ऊ धरती के रहवैइया के भरमावऽ हल आउर धरती के रहवैइया से कहऽ हल कि जे ज नावर के तरवार लगल हल ऊ जी गेलइ हे, ओकर मुरूत बनावहु।

[15] ओकरा ऊ ज नावर के मुरूत में परान डाले के अखि तयार देल गेलइ कि ज नावर के मुरूत बोले लगे, आउर जेतना लोग उ ज नावर के मुरूत के उपासना नञ करे, ओखनी के मरवा दे।

[16] ऊ छोट-बड़, ध् निक-गरीब, आजाद-दास सब के दहिना हाथा चाहे उनकर माथा पर ए क-ए कगो छाप करा देलकय,

[17] कि ओकरा छोड़ जेकरा पर छाप माने ऊ ज नावर के नाँव चाहे ओकर नाँव के गिनती होय, आउर कोइ लेन-देन नञ कर स कय।

[18] ग्या न ए करे में हे: जेकरा बुदि्ध होय ऊ ई ज नावर के गिनती जोड़ ले, काहेकि ऊ आमदी के गिनती हे, आउर ओकर गिनती छो सो छिया स ठ हइ।

परकासित वाक — Chapters