[1] एकरा बाद हम एगो स रगदूत के सरग से उतरइत देखली, जेकरा बड़ स मारथा मिलल हलइ; आउर धरती ओकर तेज से चमक उठलइ।
[2] ऊ हँकार के कहलन, “गिर गेलइ, बड़का बेबीलोन गिर गेलइ हे! ऊ दुष्ट आतमवन के डेरा, आउर हरेक असुद्ध आतमा के अड्डा, आउर हरेक असुद्ध आउर घिनावन चिडि़या के अड्डा हो गेलइ।
[3] काहेकि ओकर बेभिचार के भयानक दारू के मारे सब देस गिर गेल हइ, आउर धरती के राज वन ओकरा जोरे बेभिचार कयलन हे, आउर धरती के बेपारी ओकर बेसी बिलासी जिनगी के मारे ध् निक हो गेल हथ।
[4] फिन हम सरग से एगो आउर आवाज सुनली, “हे हमर लोग, ओकरा में से निकस आवहु कि तोहनी ओकर पाप में भागी नञ बनऽ, आउर ओकर बिप त्त में से कोइ तोहनी पर आ नञ जाए।
[5] काहेकि ओकर पाप के पुंज सरग ले पहुँच गेलइ हे, आउर ओकर अधरम परमेसर के इया द आय ल हइ।
[6] ज इस न ऊ तोहनी के देलक हे ओइस ही ओकरो दहु आउर ओकर काम के मोताबिक दुगुणा बदला दहु जे कटोरा में ऊ भर देलथी हल ओकरे में ओकरा लेल दुगुणा भर दहु।
[7] जेतना ऊ अप्पन बड़ाइ कय लक आउर सुख-बिलास कय लक, ओतने ओकरा पीड़ा आउर सोक दहु काहेकि ऊ अप्पन मन में कहऽ हे, ‘हम रानी हो गेल ही, बिध् वा नञ; आउर सोक में कहियो नञ पड़बइ।’
[8] ई मारे एक्के दिन में ओकरा पर बिप ति्त आ पड़तइ, मानो मउत, आउर सोक, आउर अकाल; आउर ऊ आग में भस म कर देल जएतई, काहेकि ओकर नेया यी परभु परमेसर सक्तिमान हथ।
[9] “ध् रती के राजा जे ओकरा जोरे बेभिचार आउर सुख-बिलास कयलन, ज ब ओकर ज रे के धुँइया देखतन, त ओकरा लागी रोतन आउर छाती पीटतन।
[10] ओकर पीड़ा के डर के मारे ओ ढेर दूर खड़ा होके कहतन, ‘हे बड़का स हर, बेबीलोन! हे मज गूत स हर, हाय! हाय! घड़ीए भर में तोरा सजा मिल गेल हे।’
[11] “ध् रती के बेपारी ओकरा लेल रोतन आउर कलप तन, काहेकि अब कोइ उनकर स मान नञ कीनतइ
[12] माने सोना, चानी, रतन, मोती, आउर मलमल, आउर बैंगनी, रेस मी, आउर लाल रंग के कपड़ा, आउर सभ तरह के सुगन्ध् वाला काठ, आउर हाँथी दाँत के सभ तरह के चीज, आउर बेस कीमती काठ आउर पीतर आउर लोहा आउर संगमरमर के सब तरह के चीज,
[13] आउर दालचीनी, मसाला, धूप, इत्तर, लोबान, दारू, तेल, मइदा, गोहूँम, गाय-बइल, भेड़-बकरिय न, घोड़ा, रथा आउर दास, आउर आमदिय न के परान।
[14] अब तोहर मनभावन फर तोरा भीरी से जाय त रहलो, आउर सुआदिष्ट आउर सुन्दर चीज वन तोरा से दूर होल हइ आउर ऊ फिन कहियो नञ मिलतो।
[15] ई चीज वन के बेपारी जे ओकरा दिया धनिक हो गेल हलन, ओकरा पीड़ा के डर के मारे दूर खड़ा होतइ, आउर रोइत आउर कलप इत कहतइ,
[16] ‘हाय! हाय! ई बड़का सहर जे मलमल, आउर बैंगनी आउर लाल रंग के कपड़ा पहिरले हल, आउर सोना आउर रतन आउर मोतिय न से स ज ल हल;
[17] घड़ीए भर में ओकर अइसन भारी आलमाल नष्ट हो गेल।’ हरेक आउर जातरी आउर मल्लाह, आउर जेतना समुन्दर से कमावऽ हथ, स ब दूर खड़ा होलन,
[18] आउर ओकर ज रे के धुइयाँ देखइत हँका के कहतन, “कउन सहर ई बड़का सहर ज इस न हे?”
[19] आउर अप्पन-अप्पन माथा पर धूरी डालतइ, आउर कानइत कलप इत चिचिया-चिचिया के कहतइ, ‘हाय! हाय! ई बड़का सहर जेकर स म्प ति्त के ज रिए समुन्दर के सब ज हाज वाला ध् नी हो गेल हलन, घडि़ए भर में उज ड़ गेल।’
[20] हे स रग, आउर हे स न्त लोग आउर परेरितमन, आउर भबिस वक्तवन, ओकरा पर खुसी मनावहु, काहेकि परमेसर नेया य करके ओकरा से तोहनी के बदला लेलथी हे!”
[21] फिन एगो बरियर स रगदूत बड़की चक्की के पाट के निय न एगो पत्थार उठइलन, आउर ई कहके समुन्दर में फेंक देलन, “बड़का सहर बेबीलोन अइस ही बड़ तागद से गिरावल ज ए तइ, आउर फिन कहियो ओकर पता नत्न चलतइ।
[22] बीणा बजावे वाला, आउर गवइया, आउर बांसुरी बजावेवाला, आउर तुरही प फूकेवाला के आवाज फिन कहियो तोहनी में सुनाइ नञ देतो आउर कोइ पेसा के कोइ कारीगरो फिन कहियो तोहनी में नञ मिलतो आउर चक्की के चले के आवाज फिन कहियो तोहनी में सुनाइ नञ देतो
[23] आउर दीया के रोसनी फिन कहियो तोहनी में नञ चमकतो, आउर दुल्हा आउर दुलि्हन के आवाज फिन कहियो तोहनी में सुनाइ नञ देतो काहेकि तोहर बेपारी धरती के परधान हलन, आउर तोहर टोना से सब देस भरमावल गेलइ हल।
[24] भबिस बक्तावन आउर स न्त लोग आउर धरती के सब मारल गेल के खून ओकरे में पाय ल गेलइ।”