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[1] फिन हमरा नापे ला एगो स रकंडा देल गेलइ, आउर कोइ कहलकय, “उठ, परमेसर के मनि्दर आउर बेदी, आउर ओकरा में उपासना करे वाला के नाप लेहु।

[2] बाकि मनि्दर के बाहिर के अँगना छोड़ दिहऽ; ओकरा मत नाप हु काहेकि ऊ आन देस के देल गेलइ हे, आउर ओ बिया लीस महीना ले पवित्तर सहर के धांगतइ।

[3] हम अप्पन दूगो गवाह के ई अखि तयार देवई कि एक हजार दू सो साठ दिन ले टाट ओढ़ले भबिसबानी करय।

[4] ई ऊहे जैतून के दूगो फेड आउर दूगो दीअट हइ, जे धरती के परभु के सामने खड़ा रहऽ हइ।

[5] जे कोइ ओकरा नोकसान पहँचावे चाहऽ हे, त उनकर मुँह से आग निकस के उनकर बैरिय न के भस म करऽ हे आउर जे कोइ उनका नोकसान पहुँचावे चाहतइ, त ज रूर अइस ही मारल ज य तइ।

[6] ओखनी के अखि तयार हे कि आस मान के बन्द करय, कि उनकर भबिसबानी के दिन में पानी नञ बरसे आउर ओखनी के सब पानी पर अखि तयार हे कि ओकरा खून बनावे, आउर ज ब-जब चाहय तब-तब धरती पर सब तरह के बिप त लावे।

[7] जब ओ अप्पन गवाही दे चुकतन, त ऊ ज नावर जे अथाह कुण्ड में से निकसतइ, उनका से लड़ के उनका जीततई आउर उनका मार देतई।

[8] उनकर ल्हास ऊ बड़ सहर के चऊक में पड़ल रहतइ, जे आतमिक रू पसे स दोम आउर मिस्र कहाव हइ, ज हँ उनकर परभुओ कुरू स पर चढ़ावल गेलथी हल।

[9] सभ लोग आउर कुलवन आउर भासा आउर देस के लोग उनकर ल्हास के साढ़े तीन दिन ले देखइत रहतन, आउर उनकर ल्हास के कब्बर में रक्खे नञ देतन।

[10] ध् रती के रहवैइया, उनका मरे से खुस आउर मगन होतन, आउर एक दोस रा के भीरी भेंट पेठवतन, काहेकि ई दून्नो भबिस बक्तवन धरती के रहवैइया के स तय लन हल।

[11] बाकि साढ़े तीन दिन के बाद परमेसर दन्‍न से जि नगी के साँस उनका में पइठ गेलइ, आउर ओ अप्पन गोड़ पर खड़ा हो गेलन, आउर उनका देखवैइया पर बड़ डर वया प त हो गेल।

[12] तब उनका सरग से एगो बड़ आवाज सुनाइ देलकय, “हीयाँ ऊपर आवहु।” ई सुन ओ बादर पर स वार होके अप्पन बइरिय न के देखइत-देखइत सरग पर चढ़ गेलन।

[13] फिन ऊहे घड़ी एगो बड़ धरती डोललइ, आउर सहर के दस मा हिस्सा गिर पड़लइ; आउर ऊ भूकम्प से सात हजार आमदी मर गेलन, आउर बाकि डेरा गेलन आउर सरग के परमेसर के महिमा कयलन।

[14] दूसर बिप त बीत चुकलय; देखहु तीसर बिप त अवैइया हइ।

[15] जब स तमा दूत तुरही फूकलन, त सरग में ई बारे में बड़-बड़ आवाज होवे लगलय: “दुनिया के राज हमर परभु के आउर उनकर मसीह के हो गेलइ, आउर ऊ जुग-जुग ले राज करतथी।”

[16] तब चउबीसो पुरनिया जे परमेसर के सामने अप्पन-अप्पन सिंहास न पर बइठल हलन, मुँह के भर सुत के परमेसर के साष्टाँग करके

[17] ई कहे लगलन, “हे स रब स क्तिमान परभु परमेस र, जे हथ आउर जे हलन, हमनी अपने के ध् न्‍न वाद करऽ ही कि अप ने अप्पन बड़ स मारथा के काम में लाके राज कय ली हे।

[18] देस-देस के लोग किरोध् कयलन, बाकि अपने के परकोप आ गेलइ, आउर ऊ बखत आ गेल हे कि मरल के नेया य कयल जाय, आउर अपने के दास भबिस बक्तवन आउर सन्त लोग के आउर ऊ छोट-बड़ के जे अपने के नाँव से डरऽ हथ बदला देल जाय, आउर धरती के बरबाद करे वाला के नास कयल जाय।”

[19] तब परमेसर के जे मनि्दर सरग में हइ ऊ खोलल गेलइ, आउर उनकर मनि्दर में उनकर वाचा के स न्दूक देखाइ देलकय; आउर बिजुरी आउर आवाज आउर गड़गड़ाहट आउर धरती डोललय आउर ढेर ओला पड़लइ।

परकासित वाक — Chapters