[1] फिन मनि्दर में हम केकरो जोर आवाज में ऊ सातो स रगदूतवन से ई कहइत सुनली, “जा, परमेसर के परकोप के सातो कटोरा के धरती पर उझल दहु।”
[2] ईसे पहिलका स रगदूत जाके अप्पन कटोरा धरती पर उझल देलन। तब ऊ आमदिय न के, जिनका पर ज नावर के छाप हलइ आउर जे ओकर मुरूत के उपास ना करऽ हलन, एक तरह के खराब आउर दुखदायी फोड़ा निकस ल।
[3] दूस रका स रगदूत अप्पन कटोरा समुन्दर में उझल देलन, आउर ऊ मरल आमदी के खून ज इस न बन गेलइ, आउर समुन्दर में के हरेक जीव मर गेलइ।
[4] तीस रका स रगदूत अप्पन कटोरा नदिवन आउर पानी के सोतवन पर उझल देलन, आउर ऊ खून बन गेलइ।
[5] तब हम पानी के स रगदूत के ई कहइत सुनली, “हे पवित्तर, जे हइ आउर जे हलइ, अपने नेयायी ही आउर अपने ई नेया य कय लिअइ।
[6] काहेकि उनखनी स न्त लोग आउर भबिसबक्तवन के खून बहए लन हल, आउर अपने उनकन्ही के खून पीलय लऽ, काहेकि ऊ ईहे लाय क हथ।”
[7] फिन हम बेदी से ई आवाज सुनली, “हाँ, हे सरब सक्तिमान परभु परमेसर, अपने के फैसला उचित आउर सच्चा हइ।”
[8] चउथा स रगदूत अप्पन कटोरा सुरू ज पर उझल देलन, आउर ओकरा आमदिय न के आग से झुलसा देवे के अखि तयार देल गेलइ।
[9] आमदी बड़ धाह से झुलस गेलन, आउर परमेसर के नाँव के जेकरा ई बिपति्तयन पर अखि तयार हे, निन्दा कयलन बाकि उनकर महिमा करे लेल मन के फिरय लन।
[10] पचमा स रगदूत अप्पन कटोरा ऊ ज नावर के सिंहास न पर उझल देलन, आउर ओकर राज पर अन्धार हो गेलइ। लोग दुख के मारे अप्पन-अप्पन जीभ चिबावे लगलन,
[11] आउर अप्पन दुखवन आउर फोड़वन के मारे सरग के परमेसर के निन्दा कयलन; बाकि अप्पन-अप्पन काम से मन नञ फिरय लन।
[12] छठा स रगदूत अप्पन कटोरा महानदी फरात पर उझल देलन, आउर ओकर पानी सूख गेलइ कि पुरूब दन्न के राज मन लेल राहता तइयार हो जाय।
[13] फिन हम ऊ अज गर के मुँह से, आउर ऊ ज नावर के मुँह से, ऊ झूठा भबिस वक्ता के मुँह से तीन गो असुद्ध आतमवन के बेंग के रू पमें निकस इत देखली।
[14] ई चिन्हासी देखावेवाली दुष्ट आतमवन हइ, जे सँऊसे दुनिया के राज मन के भीरी निकस के एहिसे जा हइ कि उनका स रब स क्तिमान परमेसर में ऊ बड़का दिन के लड़ाइ लेल जमा करय-
[15] “देखहु, हम चोर अइसन आवऽ ही; धन्न ऊ हइ जे जागइत रहऽ हइ, आउर अप्पन कपड़ा के रखवारी करऽ हइ कि लंगा नञ घुमे, आउर लोग ओकर लंगइ नञ देथे।”-
[16] आउर उनकन्ही उनका ऊ जगह जमा कयलन जे इबरानी में हर-मगिदोन कहावऽ हे।
[17] स तमा स रगदूत अप्पन कटोरा हवा पर उझल देलन, आउर मनि्दर के सिंहास न से ई जोर से आवाज होलइ, “हो चुकल।”
[18] फिन बिजुरी चमकलइ, आउर गड़गड़ाहट के आवाज आउर गरज न होलइ, आउर एगो अइसन भूकम्प आय ल कि ज ब से आमदी के पइदाइस धरती पर होलइ, तब से अइसन बड़ भूकम्प कहियो नञ आय ल हल।
[19] एकरा से ऊ बड़ सहर के तीन टुकड़ा हो गेलइ, आउर स ऊँसे देस के सहर गिर गेलइ; आउर बड़का बेबीलोन के इया द परमेसर के हीयाँ होलइ कि ऊ अप्पन खिस के ज लज लाहट के दारू ओकरा पीया वथा।
[20] आउर हरेक टापू अप्पन ज गह से हट गेलइ, आउर पहाड़मन के पता नञ चललइ।
[21] अस मान से आमदिय न पर मन-मन भर के बरप फ गिरलइ, आउर एहिसे कि ई बिप त्त बेसी भारी हलइ, लोग बरप फ के दुख के मारे परमेसर के सिकायत कयलन।