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[1] सब चुंगी लेवे वाला आउर पापी उनखा भीरी आयल करऽ हल ताकि उनखर सुनय।

[2] बाकि फरीसी आउर सास तिरी कुड़कुड़ा के कहे लगलन, “ई तो पापि य न से मिलऽ हे आउर उनके जोरे खय बो करऽ हे।”

[3] तब ऊ ओखनी से ई परझो कहलथी:

[4] “तोहनी में से कउन हे जेकर सौ गो भेड़ होय, आउर ओकरा में से एगो भुला जाय, तो निनानवे के जंगल में छोड़के, उ भुलाय ल के जबले मिल नञ जाय खोज इत नञ रहे?

[5] आउर जब मिल जा हे, तब उ ढ़ेर खुसी से ओकरा कंधा पर उठा ले हे

[6] आउर घरे आके दोस्तवन आउर पड़ोसि य न के जमा करके कहऽ हे, ‘हमरा जोरे खुसी मनावऽ, काहेकि हमर भुलाय ल भेड़ मिल गेलइ हे।’

[7] हम तोरा से कहऽ हियो कि ई तरे से एगो मन फिरावे वाला पापीयो के बारे में सरग में एतने खुसी होतइ, जेतना कि निनानवे अ इस ने धरमिय न के बारे में नञ होवऽ हइ, जेकरा मन फिरावे के जरू रत नञ।

[8] “चाहे कउन अइसन अउरत होतइ जेकरा पाले दस गो सि क्‍का हो, आउर ओकरा में से एगो भुला जाय, तो उ दीया बार के आउर घर भ्फाड़-बहार के, ज बले मिल नञ जाय मन लगाके खोज इत नञ रहे?

[9] आउर जब मिल जा हइ, तो उ अप्पन स खिय न आउर पड़ोसि न के जमा करके कहऽ हइ, ‘हमरा जोरे खुसी मनावऽ, काहेकि हमर भुलाय ल सि क्‍का मिल गेलइ हे।’

[10] हम तोरा से कहऽ हियो कि ई तरे एगो मन फिरावे वाला पापी के बारे में परमेसर के स रगदूतवन के सामने खुसी होवऽ हे।”

[11] फिन ऊ कहलथी, “कउनो आमदी के दुगो बेटा हलइ।

[12] ओकरा में से छोटका बाप से कहलकय, हे बाउजी, दउलत में से जे हिस्सा हमर होवऽ हे उ हमरा दे देहु।’ उ ओकरा अप्पन दउलत बाँट देलन।

[13] ढ़ेर दिन नञ बीतल हल कि छोटका बेटा सब कुछ जमा करके दूर देस चल गेलइ, आउर हुआँ कुकरम में अप्पन दउलत उड़का देलकय।

[14] जब उ सब कुछ खरच कर चुकलय, तो उ देस में बड़ा अकाल पड़लय, अउर उ कंगाल हो गेलइ।

[15] एहिसे उ ओ देस के रहे वाला में से एगो के हीयाँ गेलइ। उ ओकरा अप्पन खेत में सूअर चरावे लेल भेज लकय।

[16] आउर उ चाहइत हल कि ओ फलिय न से जेकरा सूअर खा हलइ, अप्पन पेट भरय, आउर ओकरा कोइ कुछ नञ दे हलइ।

[17] जब उ अप न होस में आयल तब कहे लगलइ, ‘हमर बाऊजी के कत्ते मजूरवन के खाना से बेसी रोटी मिलऽ हे, आउर हम हियाँ भूखल मरइत ही।

[18] हम अब उठके अप्पन बाउजी के नगीच जयबइ आउर उनका से कहबइ कि बाउजी, हम सरग के खिलाप फ में आउर तोहर नजर में पाप कय लियो हे।

[19] अब ई जोग नञ रहलियो कि तोहर बेटा कहइयो, हमरा अप्पन एगो मजूर नीय र रख लऽ।’

[20] “तब उ उठके, अप्पन पिता के नगीच चललय; उ अखनी दूरे हल कि ओकर पिता ओकरा देखके तरस खय लन, आउर ध्उग के ओकरा अकवार लगय लन, आउर ढ़ेर चूमलन।

[21] बेटा उनका से कहलकय, ‘बाऊजी, हम सरग के खिलाप फ में आउर तोहर नजर में पाप कइली हे आउर अब ई जोग नञ रहलियो कि तोहर बेटा कहलइयो।”

[22] बाकि बाबूजी आके नउकरवन से कहलन, ‘ज ल्दी नीमन से नीमन कपड़ा निकास के ओकरा पहिरावहू, आउर ओकर हाँथा में अँगूठी, आउर गोड़ में जूत्ता प हिरावहू,

[23] आउर पोस ल ज नावर लाके मारऽ ताकि हम खाय अई आउर खुसी मनाइअई।

[24] काहेकि हमर ई बेटा मर गेलइ हल, अब जी गेलइ हे: भुला गेलइ हल, अब मिल गेलइ हे।’ आउर ओ खुसी मनावे लगलन।

[25] “बाकि ओकर जेठ बेटा खेत में हल। जब उ लउटे में घर के नगीच प हुँचल, तो उ गाना-बजाना आउर नाचे के आबाज सुनलकय।

[26] ई से उ एगो नउकर के बुलाके पूछलकय, ‘ई का हो रहलय हे?’

[27] उ ओकरा से कहलकय, “तोहर भाय आयल हे, आउर तोर पिता पोस ल ज नावर कटवय लन हे, एहिसे कि ओकरा भला चंगा पय लन हे।’

[28] ई सुनके उ खीस से भर गेलइ आउर भीतर जानाय नञ चाहलकय, बाकि ओकर पिता बाहिरे आके ओकरा मनावे लगलन।

[29] उ पिता के ज बाब देलकय, ‘देखऽ हम एत्ते बरिस से तोहर सेवा कर रहल हियो आउर कहियो तोहर आग्यां नञ टाललियो, तइयो तूँ कहियो एगो बकरी के बच्चो नञ देल्हु कि हम अप्पन दोस्त के जोरे खुसी करतिअइ।

[30] बाकि ज ब तोहर ई बेटा, जे तोर दउलत बेस वन में उड़ा देलकय हे, आय ल, तो ओकरा लागी तूँ पोस ल ज नावर कटवल्हु।’

[31] उ ओकरा से कहलन, ‘बेटा, तूँ हरमेसा हमरा जोरे हे आउर जे कुछ हमर हे सब तोरे हे।

[32] बाकि अब खुसी करे के आउर मगन होवे के चाही काहेकि ई तोहर भाय मर गेलइ हल, फिन जी गेलइ हे भुला गेलइ हल, अब मिल गेलइ हे’।”

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