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[1] ऊ कउनो जगह पराथाना करइत हलथी। जब ऊ परारथाना कर चुकलथी, तो उनखर चेलमन में से एगो उनखा से कहलकय, “हे परभु, जइसे यूहन्‍ना अप्पन चेलमन के पराथाना करे सि खय लथी ओय सही हमनियो के तूँ सि खा देहू।”

[2] ऊ ओखनी से कहलथी, “जब तू पराथाना करहू तो कहू: ‘हे पिता तोहर नाँव पबित्तर मानल जाय, तोहर राज आवे।

[3] ‘हमनी के दिन भर के रोटी रोज हमनी के देल करऽ,

[4] ‘आउर हमनी के पाप के माफ करऽ, काहेकि हमनियो अप्पन सब अप राधी के छमा करऽ ही, आउर हमनी के परीछा में नञ लावऽ।’

[5] तब ऊ ओखनी से कहलथी, “तोरा में से के हइ कि ओकर एगो दोस्त होय, आउर उ आधा रात के ओकरा भीरी जाके ओकरा से कहय, “हे दोस्त; हमरा तीन रोटी दहू।

[6] काहेकि एगो जातरी दोस्त हमरा भीरी आयल हे, आउर ओकरा आगे रखे लागी हमरा पाले कुछ नञ हइ।

[7] आउर उ भीतर से ज बाब देवे, “हमरा तकलीप फ नञ देहू, अब तो दुआर बन्द हे आउर हमर लइका हमरा भीरी बिछौना पर हे, एहिसे हम उठके तोरा दे नञ स क हि?”

[8] हम तोरा से कहऽ हियो, जे ओकर दोस्त होवइयो पर ओकरा उठके नञ दे, तइयो ओकर लाज छोड़के माँगे के ओज ह से ओकरा जेत्ते जरू रत होय ओतना उठके देतइ।

[9] आउर हम तोरा से कहऽ हियो कि माँगहू, त तोरा देल जयतइ; खोज वहू, तो तूँ पय वहू खटखटय वहू, तो तोरा लेल खोलल जयतइ।

[10] काहेकि जे कोइ माँगऽ हइ, ओकरा मिलऽ हे आउर जे खोजऽ हे, उ पावऽ हे, आउर जे खटखटावऽ हे ओकरा लागी खोलल जएतइ।

[11] तोहनी में से अयसन कउन बाप होतइ, कि जब ओकर बेटा रोटी माँगय, तो ओकरा पत्थार दे चाहे मछरी माँगय, तो मछरी के बदला ओकरा साँप दे?

[12] चाहे अण्डा माँगे तो ओकरा बिच्छा दे?

[13] ईसे जब तूँ बुरा होके अप्पन लइकन के नीमन चीज देवे जानऽ हू, त स रगीय पिता अप्पन माँगेवाला के पबित्तर आतमा काहे नञ देतथी।”

[14] फिन ऊ एगो गोंग दुष्टआतमा के निकास लथी। जब दुष्टआतमा निकस गेलइ त गोंगा बोले लगलय; आउर लोग के तज्जुब होलइ।

[15] बाकि ओखनी में से कुछ कहलकय, “ई तो बालज बूल नाँव के दुष्टआतमवन के मेठ के मदत से दुष्टआतमवन के निकास ऽ हे।”

[16] दोसर लोग उनखर परीछा करे लागी उनखा से अकास के एगो चिन्हासी माँगलकय।

[17] बाकि ऊ ओखनी के मन के बात जानके, उनका से कहथी, “जे-जे राज में पूफट होबऽ हइ, उ राज उज ड़ जा हइ: आउर जे घर में पूफट होवऽ हे, उ बरबाद हो जा हे।

[18] जो अप्पने ही खिलाप फ हो जाय, तो ओकर राज कइसे बनल रहतई? काहेकि तूँ हमरा बारे में त कहइत हू कि ई सैतान के मदत से दुष्टआतमा निकास ऽ हे।

[19] भला जो हम सैतान के मदत से दुष्टआतमवन के निकास ऽ हिअई, तो तोहर अउलाद केकर मदत से निकास ऽ हे? एहिसे उहे तोहर नेयाय करतो।

[20] बाकि जे हम परमेसर के स मारथा से दुष्टआत्मवन के निकास ऽ ही, तो परमेसर के राज तोरा भीरी आ पहुँचल हे।

[21] जब बरियार आमदी हथिायार बाँध् ले अप्पन घर के रखवारी करऽ हे। तो ओकर दउलत बचल रहऽ हे।

[22] बाकि जब ओकरा से बढ़के कोइ आउर बरियार चढ़ाय करके ओकरा जीत ले हइ, तो ओकर उ हथिायार जेकरा पर ओकर भरोसा हल, छीन ले हइ आउर ओकर दउलत लूटके बाँट दे हइ।

[23] जे हमर संगे नञ उ हमरा खिलाप फ में हे, आउर जे हमरा संगे नञ बटोरइ उ छितरावऽ हे।

[24] “जब असुद्ध आतमा आमदी में से निकस जा हे तो सूखल जगह में आराम खोज इत फिरऽ हे, आउर जब नञ पावे तो कहऽ हे, “हम अप्पन उहे घर में ज हाँ से निकस ल हलिअई लउट ज ए बई।’

[25] आउर आके ओकरा भ्फाड़ल-बोहारल आउर स ज ल-स जावल पावऽ हे।

[26] तब उ जाके अपना से खराब सातगो आउर आतमवन के अपना जोरे ले आवऽ हे, आउर ओकरा में पइठ के रहऽ हइ, आउर उ आमदी के पि छला हालत पहिलहू से खराब हो जा हे।”

[27] जब ऊ ई बात कहिये रहलथी हल तो भीड़ में से कउनो अउरत जोर से कहलकय, “ध् न्‍न हे उ पेट जेकरा में तूँ रहलऽ आउर ओ छाती जे तूँ चूस लऽ।”

[28] ऊ कहलथी, “हाँ, बाकि धन्‍न ओ हथ जे परमेसर के बचन सुनऽ आउर मानऽ हथ।”

[29] जब बड़का भीड़ जमा होइत जाइत हल तो ऊ कहे लगलथी, “ई जुग के लोग खराब हथ, ओ चिन्हासी खोज इत हथ, बाकि योना के चिन्हासी के छोड़के कोइ आउर चिन्हासी ओखनी के नञ देल जएतइ।

[30] ज इस न योना नीनवे के लोग लागी चिन्हासी हलइ, ओइस ने आमदी के बेटो ई जुग के लोग लागी होतइ।

[31] दक्खिन के रानी नेयाय के दिन ई बखत के आमदिय न के ज उरे उठके उनका दोषी बतउतइ, काहेकि उ सुलैमान के गियान सुने लागी धरती के छोर से अइली, आउर देखहू हीयाँ उ हथ जे सुलैमानो से बड़ हथ।

[32] नीनवे के लोग नेयाय के दिन ई बखत के लोग के ज उरे खड़ा होके, ओखनी के दोसी बतउतइ; काहेकि ओखनी योना के परचार सुन के मन फिरय लन, आउर देखहू, हीयाँ उ हथ जे योनो से बड़ हथ।

[33] “कोइ आमदी दीया बार के तहखाना में चाहे कटोरा के नीचे नञ रक्खऽ, बाकि दीवट पर रखऽ हे कि भीतर आवे वाला अंजोर पावे।

[34] तोर देह के दीया तोर आँखि हे, एहिसे जब तोर आँखि साप फ हे तो तोर सँउसे देहो अंजोर से भरल हे बाकि जब उ खराब हे तो तोर देहो अन्धार हे।

[35] एहिसे चउकस रहिअहू कि जे अंजोर तोरा में हे उ अन्धार नञ हो जाय।

[36] एहिसे जे तोहर सँउसे देह अंजोर होय आउर ओकर कोइ हिस्सा अन्धार नञ रहे त सभ के सब अयसन अंजोर होतइ, ज इस न तखनी होवऽ हइ जब दीया अप्पन चमक से तोरा अंजोर दे हइ।”

[37] जब ऊ बातियावइत हलथी तो कउनो फरीसी उनखा से बिनती कय लकय कि हमरा हीयाँ खाना खा। ऊ भीतर जाके खाना खाय बइठलथी।

[38] फरीसी के ई देखके तज्जुब होलइ कि ऊ खाना खाय से पहिले नहाय लथी नञ।

[39] परभु उनका से कहलथी, “हे फरीसियन तूँ कटोरा आउर थारी के ऊप रे ऊपर से मांज ऽ हे, बाकि तोहर भीतर अन्धार आउर दोष भरल हे।

[40] हे निरबुदिय न, जे बाहर के हिस्सा बनय लक, का उ भीतर के हिस्सा नञ बनय लकय?

[41] बाकि हाँ, भीतर वाला चीज के दान कर देहू, तो देखहू, सब कुछ तोरा लागी सुद्ध हो जएतइ।

[42] “बाकि हे फरीसियन, तोहनी पर हाय। तूँ पोदीना आउर सुदाब के आउर सब किसि म के साग-पात के दस मा हिस्सा दे हू, बाकि नेयाय के आउर परमेसर के परेम के मटिया देहू चाहि त हल कि एकरो करइत रहतऽ आउर ओकरो नञ छोड़तऽ।

[43] हे फरीसियन, तोहनी पर अ फसोस! तूँ अ रध् नालय न में मुख-मुख आस न आउर बजार में नमस्ते चाहऽ हू।

[44] अ फसोस तोहनी पर! काहेकि तूँ ओ लुकाय ल कब्बर के नीय न हू, जेकरा पर लोग चलऽ हथ बाकि नञ जानऽ हथ।”

[45] तब एगो बेबस थाप क उनखा ज बाब देलकय, “हे गुरू, ई बात कहे से तूँ हमनी के ओलहना देहू।”

[46] ऊ कहलथी, “हे बेबस थाप क, तोहनी पर अ फसोस तूँ अ य स न बोझा हू जेकरा उठानाय मोस किल हे, आमदिय न पर लादऽ हू बाकि तोहनी अप्पने ओ बोझा के अप्पन एगो अंगुरियो से नञ छूअ हू।

[47] अ फसोस तोहनी पर! तोहनी ओ भबिसवक्तवन के कब्बर बनावऽ हू, जेकरा तोहनिये के पुरबज मार देलन हल।

[48] ईसे तू गवाह हू, आउर अप्पन पुरखन के काम से स हमत हू काहेकि ओखनी उनका मार देलन आउर तूँ उनकर कब्बर बनावऽ हू।

[49] एहिसे परमेसर के बुदि्धओ कहलकय हे, “हम उनका भीरी भबिसवक्तवन आउर परेरितवन के भेज वई, आउर ओ उनका में से कुछ के मार देतइ, आउर कुछ के स तउतइ।”

[50] जे से जेतना भबिसवक्तवन के खून दुनिया के पैदा करे में बहावल गेलइ हे, सब के हिसाब ई जुग के लोग से लेल जाय:

[51] हाबील के हतिया से लेके ज करयाह के हतिया ले, जे बेदी आउर मनि्दल के बीच में घात कयल गेलन। हम तोरा से सच कहऽ हियो, ई सब के हिसाब एही बखत के लोग से लेल जएतई।

[52] अ फसोस तूँ बेबस थाप कवन प र! तूँ गियान के कुंजी ले त लेल्हु, बाकि तूँ अपनही नञ पइस लऽ, आउर प इस वैइयो के रोक देलऽ।”

[53] जब उ हुआँ से निकस लथी, तो सास तिरी आउर फरीसी बड़ी जोर से उनखा पीछू पड़ गेलन आउर तंग करे लगलन कि ऊ ढ़ेर बात के चरचा करथा,

[54] आउर ताक में लगल रहलन कि उनखा मुंह के कोइ बात ध् रिअई।

लूका — Chapters