[1] काहेकि नेम, जेकरा में आवेवाला बेस चीज मन के परछाइं हइ बाकि अस ल रू पनञ, एहिसे ओ एक्के तरह के बलिदान से जे हर साल अनवरत चढ़ावल जा हइ, भीरी आवेवाला के कहियो नञ सि द्ध कर स कऽ हे।
[2] नञ त उनकर चढ़ानाय बन्द काहे नञ हो जा हे? एहिसे जब सेवा करेवाला एक्के बेर सुद्ध हो जाय, त फिन उनकर मन ओखनी के पापी नञ कहतइ।
[3] बाकि उनका दिया हर साल पाप के इयाद करल जा हे।
[4] काहेकि ई नञ स म्भव हइ कि बइलमन आउर खस्सि मन के खून पाप के दूर करय।
[5] ईहे ओज ह से ऊ दुनिया में आवे बखत कहऽ हथी, “बलि आउर भेंट तूँ नञ चाहलऽ, बाकि हमरा लेल एगो देह तइयार कय लऽ।
[6] हमन आउर बलि से तूँ खुस नञ होलऽ।
[7] तब हम कहली, ‘देखऽ, हम आ गेल ही, पवित्तर सास्न्न में हमरा बारे में लिखल हइ, जेसे हे परमेस र, अपने के हिच्छा पूरा करिअई’।”
[8] ऊपर त ऊ कहऽ हथ, “नञ अपने बलि, भेंट, होम आउर पाप के बलि के चाहलिअइ, आउर नञ ओकरा से खुस होलिअइ,” हलांकि ई बलि त बेबस्था के मोताबिक चढ़ावल जा हइ।
[9] फिन ईहो कहऽ हथ, “देखऽ, हम आ गेल ही, जेसे अपने के हिच्छा पूरा करिअई,” ईसे ऊ पहिलका के हटा दे हथ, जेसे दूस रका के तैनात करथा।
[10] ऊहे हिच्छा से हम यीसु मसीह के देह के एक्के बेर बलि चढ़ावल जाय से पवित्तर कयल गेल ही।
[11] हरेक याज क त खड़ा होके रोज सेवा करऽ हइ, आउर एक्के तरह के बलि बेर-बेर चढ़ाव हइ जे पाप के कहियो दूर नञ कर स कतइ।
[12] बाकि ई आमदी त पाप के बदला एक्के बलि चढ़ाके हरमेसा लेल परमेसर के दाहिना जा बइठलथी, आउर ऊ बखत से इनकर राह ताकइत हे कि उनकर बइरी उनकर गोड़ तरे के पीढ़ीया बने।
[14] काहेकि ऊ एक्के चढ़ावा से उनकनी के, जे पवित्तर कयल जा हथ, हरमेसा लेल सि द्ध कर देलथी हे।
[15] आउर पवित्तर आतमो हमरा ईहे गवाही दे हइ; काहेकि ऊ पहिले कहलथी हल,
[16] “प रभु कहऽ हथ कि जे वाचा हम ऊ दिन के बाद उनका से बाँध् वइ ऊ ई हइ कि हम अप्पण नेमवन के उनकर हिया पर लिखबइ। आउर हम उनकर मन में पइस य बइ।
[17] फिन ऊ ई कहऽ हथ, “हम उनकर पाप के आउर उनकर अध् रम के कामवन के फिन कहियो इयाद नञ करबइ।”
[18] आउर जब इनकर छमा हो गेल हइ, त फिन पाप के बलि नञ रहल।
[19] एहिसे ऐ भाइवन, जब हमनी के यीसु के खून से ऊ नया आउर जि न्दे राहता से पवित्तर अस्थान में पइसे के हियाव हो गेल हे,
[20] जे ऊ परदा माने अप्पण देह में से होके, हमनी ला अभिषेक कय लथी हे,
[21] आउर एहिसे कि हमनी के अइस न महान याज क हथ, जे परमेसर के घर के अधिकारी हथ,
[22] त आवहु, हमनी स च्चा मन आउर पूरा बिसवास जोरे, आउर मन के दोष दूर करे ला करेजा पर छींटवा के, आउर देह के सुद्ध पानी से धोलवाके परमेसर के भीरी जयअई।
[23] आवहु हमनी अप्पण आस रा के स कारे के मज बूती से थामले रहिअई, काहेकि जे परतिग्यां कय लथी हे, ऊ स च्चा हथ;
[24] आउर परेम, आउर भल काम से उस कावे ला हम एक दोस रा के फिकिर कयल करिअई,
[25] आउर एक दोस रा के जोरे ए कट्ठा होनाय नञ छोडि़अई, जइसे केतना के ढंग हे, बाकि एक दोस रा के स मझाय ते रहऽ, आउर ज इसे-ज इसे ऊ दिन नगीच आवते देखहु तइसे-तइसे अउरो बेसी ई कयल करहु।
[26] काहेकि स च्चाइ के जाने के बाद जे हमनी जान बूझ के पाप करइत रहिअई, त पापो लेल फिन कोइ बलि बाकी नञ।
[27] हाँ, सजा के एगो भयानक राह देखनाय आउर आग के धाह बाकी हे जे बिरोधि् य न के भस म कर देतइ।
[28] जब मूसा के बेबस्था के नञ मानेवाला, दू चाहे तीन गो लोग के गवाही पर, बिना दया के मार देल जा हे,
[29] त सोच ल कि ऊ केतना आउरो भारी सजा के जोम होतइ, जे परमेसर के बेटा के गोड़ से धांगलक आउर वाचा के खून के, जि नखा ज रिये ऊ पवित्तर कैल गेल हल, अ पवित्तर बुझलक हे, अउर किरपा के आतमा के अ पमान कय लक।
[30] काहेकि हमनी उनखा जानऽ ही, जे कहलथी, “बदला लेनाय हमर काम हे, हम्हीं बदला लेवइ।” आउर फिन ई कि “प रभु अप्पण लोग के नेयाय करतथी।”
[31] जि न्दे परमेसर के हाँथा में पड़नाय भयानक बात हे।
[32] बाकि ऊ पहिले के दिन के इयाद करहु, जेकरा में तोहनी अंजोर पाके दुखो के विकट अ सि्थाति में अड़ल रहल।
[33] कहियो-कहियो त अइसन कि तोहनी निन्दा आउर दुख स हइत तमासा बनलऽ, आउर कहियो अइसन कि तोहनी उनकर साझीदार बनलहु जि नकर दुरदसा कयल जा हल।
[34] काहेकि तोहनी कइदिय न के दुखो में दुखी होलऽ, आउर अप्पण दउलतो खुसी से लूटे देलऽ; ई जानके कि तोहनी भीरी एगो आउरो उति्तम आउर हरमेसा रहेवाला दउलत हे।
[35] एहिसे अप्पण हियाव नञ छोड़हु काहेकि ओकर नतीजा बड़ हे।
[36] काहेकि तोहनी के स बर करनाय जरू री हे, जेसे परमेसर के मरजी पूरा करके तोहनी प रतिग्यां के फर पराप त करहु।
[37] “काहेकि अब बहुते थोर बखत रह गेल हे, जबकि आवेवाला अय तइ आउर देर नञ करतइ।
[38] बाकि हमर धरमी लोग बिसवास से जि न्दा रहतन, आउर जे ऊ पीछे हट जएतन त हमर मन ओकरा से पस न्न नञ होतइ।”
[39] बाकि हम हटेवाला नञ कि नास हो जाय अई बाकि बिसवास करे वाला हीअइ कि परान बचय अई।