[1] तिबिरियास कैसर (रोमी राजा) के पंद्रहवें साल में पुन्तियुस पीलातुस यहूदिया का गवर्नर था और चौथाई का राजा हेरोदेस गलील का और उसका भाई फ़िलिप इतूरिया और त्रखोनीतिस का और लिसानियास अबिलेने का शासक था।
[2] हन्ना और कैफ़ा जब प्रधान पुरोहित थे, तभी जंगल में ज़कर्याह के बेटे यूहन्ना को प्रभु का संदेश मिला।
[3] और वह यरदन के आस-पास के इलाके से मनबदलाव के बपतिस्मे और गुनाहों (पापों) की मुआफ़ी की खुशखबरी सुनाने लगा।
[4] जैसे कि यशायाह नबी की किताब में लिखा है, "जंगल में एक पुकारने वाले की आवाज़ यह है, 'प्रभु के रास्ते को तैयार करो, उसे सीधा करो।
[5] हर एक घाटी भर दी जाएगी, प्रत्येक पहाड़ नीचा और पहाड़ी नीची की जाएगी, टेढ़ी-मेढ़ी सड़कें सीधी की जाएँगी। ऊबड़ - खाबड़ रास्ते चिकने बनाए जाएँगे।
[6] 'सभी लोग परमेश्वर पिता की मुक्ति को देखेंगे'।"
[7] तब यूहन्ना ने उस भीड़ से जो उसके पास बपतिस्मा पाने आई थी, कहा, "साँप के बच्चो, परमेश्वर के आने वाले दण्ड से दूर भागने के लिए तुम्हें किसने चेतावनी दी है?
[8] इसलिए मन बदलाव का सबूत दो और अपने आप से यह मत कहो, 'अब्राहम हमारे पिता हैं।' ऐसी डीगें मारना बेकार है। परमेश्वर पिता इन पत्थरों को अब्राहम की सन्तान में बदल सकते हैं।
[9] पेड़ों की जड़ पर कुल्हाड़ी पहले ही से रखी हुई है। हर एक वह पेड़ जिसमें अच्छा फल नहीं निकलता है, काटने के बाद आग में झोंका जाता है।"
[10] भीड़ ने सवाल किया, "हमें करना क्या चाहिए?"
[11] यूहन्ना ने उत्तर दिया, "अगर तुम्हारे पास दो कुरते हैं, एक गरीब को दे दो। अगर तुम्हारे पास खाना है, तो मिल-बाँटकर खाओ।"
[12] भ्रष्ट टैक्स जमा करने वाले भी बपतिस्मा पाने के लिए आए और पूछने लगे, "गुरूजी, हमें क्या करना चाहिए?"
[13] उसने उत्तर दिया, "ईमानदार रहो और जितना रोमी सरकार ने तय किया है उससे ज़्यादा मत लो।"
[14] कुछ फ़ौजियों ने पूछा, "हमें बताइए कि हम क्या करें?" उसने उन से कहा, "दबाव डालकर किसी से पैसा मत ऐंठना, या किसी पर झूठा आरोप मत लगाना। अपनी मज़दूरी से खुश रहना।"
[15] हर एक, मसीह के जल्दी आने का इन्तज़ार कर रहा था, इसीलिए लोग यह जानना चाहते थे कि कहीं यूहन्ना तो मसीह नहीं है।
[16] उनके सवालों के जवाब में यूहन्ना बोला, "मैं तुम्हें पानी में बपतिस्मा देता हूँ, लेकिन एक हैं जो मुझ से ज़्यादा अधिकार रखते हैं, - इतना ज़्यादा कि मैं उनकी जूती का फ़ीता भी खोलने के लायक नहीं हूँ। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देंगे।
[17] अपने सूप की मदद से वह गेहूँ और भूसी को अलग करने के लिए तैयार हैं, उसके बाद वह दाने को साफ़ करके अनाज को खत्ते में रखेंगे, लेकिन भूसे को कभी न बुझने वाली आग में डालेंगे।"
[18] सुसमाचार को सुनाते समय, यूहन्ना ने ऐसी तमाम चेतावनियाँ दीं।
[19] लेकिन अपने भाई फ़िलिप की पत्नी हेरोदियास से ब्याह करने और दूसरी बुराइयों की वजह से हेरोद अन्तिपास को यूहन्ना ने डाँटा।
[20] उसने सब से बुरी बात यह की कि यूहन्ना को जेल में डाल दिया।
[21] जब लोग वहाँ आकर बपतिस्मा ले रहे थे, यीशु को भी बपतिस्मा दिया गया। जब यीशु प्रार्थना कर रहे थे, आसमान खुल गया।
[22] एक फ़ाख्ते की शक्ल में पवित्र आत्मा उनके ऊपर उतरा और आसमान से एक आवाज़ आयी, "तुम मेरे प्रिय बेटे हो। मैं तुम से खुश हूँ।"
[23] यीशु ने अपनी सेवा का काम तीस साल की उम्र में शुरू किया। यीशु यूसुफ़ के बेटे समझे जाते थे; और यूसुफ़ एली का;
[24] और वह मत्तात का, और वह लेवी का, और वह मलकी का, और वह यन्ना का, और वह यूसुफ़ का;
[25] और वह मत्तित्याह का, और वह आमोस का, और वह नहूम का, और वह असल्याह का, और वह नोगह का;
[26] और वह मात का, और वह मत्तित्याह का, और वह शिमी का, और वह योसेख का, और वह योदाह का;
[27] और वह यूहन्ना का, और वह रेसा का, और वह ज़रुब्बाबिल का, और वह शलतियेल का, और वह नेरी का
[28] और वह मलकी का, और वह अद्दी का, और वह कोसाम का, और वह इलमोदाम का, और वह एर का
[29] और वह येशू का, और वह इलाज़ार का, और वह योरीम का, और वह मत्तात का, और वह लेवी का
[30] और वह शमौन का, और वह यहूदाह का, और वह यूसुफ़ का, और वह योनान का, और वह इलयाकीम का
[31] और वह मलेआह का, और वह मिन्नाह का, और वह मत्तता का, और वह नातान का, और वह दाऊद का
[32] और वह यिशै का, और वह ओबेद का, और वह बोअज का, और वह सलमोन का, और वह नहशोन का।
[33] और वह अम्मीनादाब का, और वह अरनी का, और वह हिस्रोन का, और वह फिरिस का, और वह यहूदाह का;
[34] और वह याकूब का, और वह इसहाक का, और वह अब्राहम का, और वह तेरह का, और वह नाहोर का।
[35] और वह सरुग का, और वह रऊ का, और वह फिलिग का, और वह एबिर का, और वह शिलह का।
[36] और वह केनान का, वह अरफज्ञद का, और वह शेम का, वह नूह का, वह लिमिक का;
[37] और वह मथूशिलह का, और वह हनोक का, और वह यिरिद का, और वह महललेल का, और वह केनान का;
[38] और वह इनोश का, और वह शेत का, और वह आदम का, और वह परमेश्वर का पुत्र था।