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[1] भाईचारे का प्यार बना रहे।

[2] मेहमान-नवाज़ी करना न भूलना, क्योंकि इसके द्वारा कितनों ने अनजाने स्वर्गदूतों की आवभगत की है।

[3] कैदियों का ऐसा ध्यान रखो कि मानो उनके साथ तुम भी कैद में हो। जिनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उनका भी यह समझकर ध्यान रखा करो कि हमारी भी देह है।

[4] विवाह सब में इज़्ज़त की बात समझी जाए, और बिछौना निष्कलंक रहे, क्योंकि परमेश्‍वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का इन्साफ़ करेंगे।

[5] तुम्हारा स्वभाव बिना लालच का हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर सन्तोष करो, क्योंकि परमेश्‍वर ने आप ही कहा है, "मैं तुम्हें कभी न छोडूँगा, और न कभी तुम्हें त्यागूँगा।"

[6] इसलिए हम बिना झिझक के कहते हैं, कि प्रभु मेरे सहायक हैं, मै न डरूँगा। इन्सान मेरा क्या कर सकता है?

[7] जो तुम्हारे अगुवे हैं, और जिन्होंने तुम्हें परमेश्‍वर का वचन सुनाया है, उन्हें याद रखो और ध्यान से उनके चाल चलन का नतीजा देखकर उनके विश्‍वास की नकल करो।

[8] यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक से हैं।

[9] अनेक प्रकार के और ऊपरी (अजीब) उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्योंकि मन का अनुग्रह से स्थिर रहना भला है, न कि उन खाने की चीजों से जिनसे काम रखने वालों को कुछ फ़ायदा न हुआ।

[10] हमारी एक ऐसी वेदी है, जिस पर से खाने का हक उन लोगों को नहीं, जो तम्बू की सेवा करते हैं।

[11] क्योंकि जिन जानवरों का खून महा पुरोहित पाप-बलि के लिए पवित्र स्थान में ले जाता है, उन जानवरों की देह छावनी के बाहर जलाई जाती है।

[12] इसी कारण, यीशु ने भी लोगों को अपने ही खून के द्वारा पवित्र करने के लिए यरूशलेम के बाहर दुख उठाया।

[13] इसलिए आओ, उनकी निन्दा अपने ऊपर लिए हुए यहूदी मत के बाहर उनके पास निकल चलें।

[14] क्योंकि यहाँ हमारा कोई स्थिर रहने वाला शहर नहीं, वरन् हम एक आने वाले शहर की ताक में हैं।

[15] इसलिए हम यीशु के द्वारा स्तुति रूपी बलिदान, अर्थात् उन होठों का फल जो उनके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्‍वर के लिए हमेशा चढ़ाया करें।

[16] भलाई करना, और उदारता न भूलो, क्योंकि परमेश्‍वर ऐसे बलिदानों से खुश होते हैं।

[17] अपने अगुवों की मानो और उनके आधीन रहो, क्योंकि वे उन लोगों की तरह तुम्हारे लिए जागते रहते हैं, जिन्हें हिसाब देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्द से करें, न कि दुःख से, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कुछ फ़ायदा नहीं।

[18] हमारे लिए प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है कि हमारा विवेक शुद्ध है, और हम सब बातों में आदर के साथ जीवन बिताना चाहते हैं।

[19] और इसके करने के लिए मैं तुम्हें और भी समझाता हूँ, कि मैं जल्दी तुम्हारे पास फिर आ सकूँ।

[20] अब शान्तिदाता परमेश्‍वर जो हमारे प्रभु यीशु को, जो भेड़ों के महान रखवाले हैं, सनातन वाचा के खून के गुण से मरे हुओं में से जिलाकर ले आए,

[21] तुम्हें हर एक अच्छी बात में स्थिर करें, जिससे तुम उनकी इच्छा पूरी करो। जो कुछ उनको पसन्द है, उसे यीशु मसीह के द्वारा हम में उत्पन्न करें, जिनकी बड़ाई युगानुयुग होती रहे। ऐसा ही हो।

[22] हे भाइयो, मैं तुम से बिनती करता हूँ, कि इस शिक्षा की बातों को सह लो, क्योंकि मैंने तुम्हें थोड़ा सा ही लिखा है।

[23] तुम यह जान लो कि तीमुथियुस हमारा भाई छूट गया है और यदि वह जल्द आ गया, तो मैं उसके साथ तुम से भेंट करूँगा।

[24] अपने सब अगुवों और सब पवित्र लोगों को सलाम कहो। इटली वाले तुम्हें सलाम कहते हैं।

[25] तुम सब पर कृपा बनी रहे। ऐसा ही हो।

इब्रानियों — Chapters