Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:57

[1] सो हे पवित्र भाइयो, तुम जो ऊपरी बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महापुरोहित यीशु पर ध्यान करो, जिसे हम कबूल (अंगीकार) करते हैं।

[2] वह अपने नियुक्‍त करने वाले के लिए भरोसेमंद थे, जैसा मूसा भी परमेश्‍वर के सारे घराने में था।

[3] क्योंकि वह मूसा से इतना बढ़कर महिमा के लायक समझे गये हैं, जितना कि घर का बनाने वाला घर से बढ़कर आदर पाता है।

[4] हर एक घर को कोई न कोई बनाने वाला होता है, परन्तु जिस ने सब कुछ बनाया वह परमेश्‍वर हैं।

[5] मूसा उनके सारे घर में सेवक के समान विश्‍वासयोग्य रहा, ताकि जिन बातों का बाद में बताया जाने वाला था, उनकी गवाही दे।

[6] परन्तु मसीह बेटे के समान उनके घर के अधिकारी हैं, और उनका घर हम हैं, अगर हम साहस में, और अपनी आशा के आनन्द में अन्त तक मज़बूती से स्थिर रहें।

[7] इसलिए जैसा पवित्र आत्मा कहता है कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो,

[8] तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा जंगल में विद्रोह के समय और परीक्षा के दिनों में इस्राएलियों ने किया था,

[9] जहाँ तुम्हारे पूर्वजों ने मुझे जाँचकर परखा और चालीस साल तक मेरे काम देखे।

[10] इस कारण मैं उस समय के लोगों से नाराज़ था, और मैंने कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्होंने मेरे रास्तों को नहीं पहचाना।

[11] तब मैंने गुस्से में आकर शपथ खायी कि वे मेरे आराम में प्रवेश करने न पाएँगे।

[12] हे भाइयो-बहनो, सावधान रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्‍वासी मन न हो, जो जीवित परमेश्‍वर से दूर हट जाए।

[13] लेकिन जब तक इसे आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे की हिम्मत बढ़ाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई व्यक्‍ति गुनाह के छल में आकर सख़्त हो जाए।

[14] क्योंकि हम मसीह के साथ हिस्सेदार हुए हैं, यदि हम अपने शुरू के विश्‍वास से आखिर तक मज़बूती में बने रहें।

[15] जैसा कि कहा जाता है कि अगर आज तुम उसकी आवाज़ सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि गुस्सा दिलाने के समय इस्राएलियों ने किया था।

[16] किन लोगों ने सुनकर गुस्सा दिलाया? क्या उन सब ने नहीं, जो मूसा के द्वारा मिस्र से निकले थे?

[17] वह चालीस साल तक किन लोगों से नाराज़ रहे? क्या उन्हीं से नहीं, जिन्होंने बलवा किया, और उनके शव जंगल में पड़े रहे?

[18] उन्हों ने किन से शपथ खाई कि तुम मेरे आराम में प्रवेश करने न पाओगे? क्या केवल उन से नहीं जिन्होंने आज्ञा न मानी?

[19] इसलिए हम देखते हैं कि वे अविश्‍वास के कारण दाखिल न हो सके।

इब्रानियों — Chapters