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[1] अब जो बातें हम कह रहे हैं, उन में से सब से खास बात यह है, कि हमारा ऐसा प्रधान पुरोहित है, जो स्वर्ग पर महा-महिम के सिंहासन पर अधिकार के साथ है,

[2] और पवित्र स्थान और उस सच्चे तम्बू का सेवक हुआ, जिसे किसी मनुष्य ने नहीं, किन्तु प्रभु ने खड़ा किया था।

[3] क्योंकि हर एक प्रधान पुरोहित भेंट, और बलिदान चढ़ाने के लिए ठहराया जाता है, इस कारण ज़रूर है, कि उसके पास भी कुछ चढ़ाने के लिए हो।

[4] यदि वह पृथ्वी पर होता, तो कभी पुरोहित न होता, इसलिए कि नियमशास्त्र के अनुसार भेंट चढ़ाने वाले तो हैं,

[5] जो स्वर्ग में की वस्तुओं के प्रतिरूप और प्रतिबिम्ब की सेवा करते हैं, जैसे जब मूसा तम्बू बनाने पर था, उसे यह चेतावनी मिली कि ध्यान से जो नमूना उसे पहाड़ पर दिखाया गया था, उसी के अनुसार सब कुछ बनाए।

[6] परन्तु यीशु को उसकी सेवकाई से बढ़कर सेवा मिली, क्योंकि वह और भी उत्तम वाचा के मध्यस्थ ठहरे, जो और उत्तम प्रतिज्ञाओं के सहारे बान्धी गई है।

[7] क्योंकि यदि वह पहली वाचा बिना किसी खोट और कमी की होती, तो दूसरी के लिए अवसर न ढूँढा जाता।

[8] किन्तु वह उन पर दोष लगाकर कहता है, "कि प्रभु कहता है, देखो, वे दिन आते हैं, कि मैं इस्राएल के घराने के साथ, और यहूदा के घराने के साथ, नई वाचा बान्धूँगा।

[9] यह उस वाचा के समान न होगी, जो मैंने उनके पूर्वजों के साथ उस समय बान्धी थी, जब मैं उनका हाथ पकड़कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया, क्योंकि वे मेरी वाचा में बने नहीं रहे, और मैंने उनका ख्याल न रखा,

[10] फिर प्रभु कहते हैं कि "जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने के साथ बान्धूँगा, वह यह है, कि मैं अपने नियमों को उनके मनों में डालूँगा, और उसे उनके आत्मा पर लिखूँगा, और मैं उनका परमेश्‍वर ठहरूँगा, और वे मेरे लोग ठहरेंगे।

[11] और हर एक अपने देश वासी को और अपने भाई को यह शिक्षा न देगा कि तुम प्रभु को पहचानो, क्योंकि छोटे से बड़े तक सब मुझे जान लेंगे।

[12] क्योंकि मैं उनकी बुराई के विषय में दयावन्त होऊँगा, और उनकी बुराई को फिर याद न करूँगा।

[13] नई वाचा की स्थापना से उन्हों ने प्रथम वाचा को रद्द कर दिया, और जो वस्तु पुरानी और कमज़ोर हो जाती है उसका मिट जाना ज़रूरी है।

इब्रानियों — Chapters