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[1] यहोवा की स्तुति करो! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है!

[2] उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा ; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी।

[3] उसके घर में धन-सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा।

[4] सीधे लोगों के लिये अंधकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है।

[5] जो व्यक्ति अनुग्रह करता और उधार देता है, और ईमानदारी के साथ अपने काम करता है, उसका कल्याण होता है।

[6] वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा।

[7] वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है।

[8] उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिए वह न डरेगा, वरन् अपने शत्रुओं पर दृष्टि करके सन्तुष्ट होगा।

[9] उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया , उसका धर्म सदा बना रहेगा; और उसका सींग आदर के साथ ऊँचा किया जाएगा। (2 कुरि. 9:9)

[10] दुष्ट इसे देखकर कुढ़ेगा; वह दाँत पीस-पीसकर गल जाएगा; दुष्टों की लालसा पूरी न होगी। (प्रेरि. 7:54)

भजन संहिता — Chapters