[1] पेन्टिकॉस्ट के दिन आने पर वे सभी एक स्थान पर इकट्ठे थे
[2] अचानक ही आसमान से एक बड़ी आँधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ और उससे पूरा घर जहाँ वे बैठे थे, गूँज उठा।
[3] और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उन में से हर एक जन पर आ ठहरीं।
[4] वे सभी पवित्र आत्मा से भर गए और जिस तरह आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य-अन्य भाषा बोलने लगे।
[5] उस समय आसमान के नीचे हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरुशलेम में रहा करते थे।
[6] इस आवाज़ को सुनकर एक बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गयी और सभी घबराए हुए थे, क्योंकि प्रत्येक को यही सुनाई देता था कि ये लोग मेरी भाषा में ही बोल रहे हैं।
[7] आश्चर्य से भरकर उन्हों ने एक दूसरे से कहा, "क्या ये सभी बोलने वाले गलील के नहीं हैं?
[8] तब हम उनके मुँह से मातृ भाषा क्यों सुन रहे हैं?
[9] पारथी, मादी, एलामी, मेसोपोटामिया के रहने वाले, यहूदिया, कप्पदुकिया, पुन्तुस और एशिया
[10] फ़्रिगिया, पंफ़ूलिया, मिस्र, लिबिया के कुछ भाग और रोम के निवासी, यहूदी और यहूदी मत को स्वीकारने वाले,
[11] क्रेती और अरबी को भी हम परमेश्वर के अद्भुत कामों का बखान अपनी भाषा में करते सुन रहे हैं।"
[12] वे सभी आश्चर्य और दुविधा में पड़ गए और एक दूसरे से पूछने लगे, "यह सब क्या है?"
[13] कुछ लोगों ने मज़ाक करते हुए कहा, "ये लोग ताज़ी शराब के नशे में हैं।"
[14] लेकिन पतरस ने उन ग्यारहों के साथ खड़े होकर बुलन्द आवाज़ में कहा, "यहूदिया के निवासियो और वे सभी जो यरुशलेम में ठहरे हुए हो, मेरी ध्यान से सुनो
[15] जैसा तुम सोच रहे हो कि ये लोग नशे में हैं, ऐसी बात बिल्कुल नहीं है, क्योंकि अभी तो सुबह के नौ बजे हैं।
[16] लेकिन यह वही बात है, जिसके बारे में योएल नबी ने कहा थाः
[17] "आखिर के दिनों में क्या होगा, इसके बारे में परमेश्वर कहते हैं - सभी लोगों पर मैं अपना आत्मा उण्डेलूँगा। तुम्हारे बेटे-बेटियाँ भविष्यद्वाणी करेंगे। तुम्हारे नौजवान दर्शन देखेंगे। तुम्हारे बुज़ुर्ग लोग स्वप्न देखेंगे।
[18] मैं उन दिनों में अपने आत्मा में से अपने सेवकों और सेविकाओं पर भी आत्मा उण्डेलूँगा और वे भी नबूवत करेंगे
[19] साथ ही मैं आकाश में आश्चर्यचकित करने वाली बातें और इस ज़मीन के ऊपर चिन्ह जैसे रक्त, आग और धुएँ का बादल दिखाऊँगा। इसके पहले कि वह बड़ा और मशहूर प्रभु का दिन आए,
[20] सूरज अँधेरे में और चाँद खून में बदल जाएगा,
[21] जो कोई प्रभु के नाम को लेगा, वही मुक्ति पाएगा।'
[22] "हे इस्त्राएलियो सुनोः जैसा कि तुम जानते हो परमेश्वर ने यीशु के द्वारा तुम में आश्चर्यकर्म, सामर्थ के कार्य और चिन्ह दिखाकर यह प्रगट कर दिया था कि नासरत में रहने वाले यही यीशु (खरे व्यक्ति) थे।
[23] उन्हें परमेश्वर के पूर्व ज्ञान और निश्चित उद्देश्य के आधार पर सुपुर्द किया गया। तुम ने उन्हें लेकर दुष्ट हाथों से सूली पर चढ़ाकर मार डाला।
[24] लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था कि यीशु मौत के वश में रहते, परमेश्वर ने उन्हें मौत के बन्धनों से मुक्त करके ज़िन्दा कर दिया।
[25] क्योंकि दाऊद उनके बारे में कहता है, "मैं अपने सामने हमेशा प्रभु को देखता रहा, क्योंकि वह मेरे दाएँ बाजू में हैं ताकि मैं डावाँडोल न होऊँ
[26] इसलिए मैं खुश हुआ, मेरी जीभ प्रभु की बड़ाई करने लगी और देह भी आशा रखे रहेगी।
[27] क्योंकि आप न मेरे प्राण को मरे हुओं की जगह में छोड़ेंगे और न अपने पवित्र जन को सड़ने देंगे।
[28] आप ने मुझे ज़िन्दगी के रास्तों से जानकारी करायी है। अपनी मौजूदगी (दर्शन, उपस्थिति) से आप मुझे खुशी से भर देंगे।"
[29] "भाई लोगो, मैं अपने पूर्वज दाऊद के बारे में साहस से बतलाना चाहता हूँ कि उसके मरने के बाद उसे दफ़ना दिया गया और उसकी कब्र आज तक हमारे बीच में है।
[30] इसलिए एक नबी होने के नाते और यह जानते हुए कि परमेश्वर ने दाऊद से शपथ खायी है, वह यह थी कि मैं तुम्हारे वंश में से एक व्यक्ति को तुम्हारे सिंहासन पर बैठाऊँगा।
[31] इसे पहले ही से जानते हुए, दाऊद ने मसीह के जी उठने के बारे में कहा था। यह कि न उनकी आत्मा मरे हुओं की जगह में छोड़ी जाएगी न ही उनकी देह सड़ेगी।
[32] "इसी यीशु को स्वर्गिक पिता याहवे ने जिलाया, जिसके हम गवाह हैं।
[33] इसीलिए, परमेश्वर के दाहिने हाथ (सृष्टिकर्ता की सर्वश्रेष्ठ शक्ति और अधिकार) तक उठाए जाने और स्वर्गिक पिता से वायदा किए हुए पवित्र आत्मा को लेकर उन्हों ने उण्डेल दिया है, जिसे तुम लोग देखते और सुनते हो।
[34] क्योंकि दाऊद स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, लेकिन खुद उसने कहा, "प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा मेरे दाहिने बाजू पर बैठो जब तक मैं तुम्हारे दुश्मनों को तुम्हारे पैरों की चौकी न कर दूँ।"
[36] इसलिए इस्त्राएल का सारा परिवार यह जान ले कि याहवे परमेश्वर ने इसी यीशु को जिसे तुम ने सूली पर चढ़ाया था, मालिक और मुक्ति देने वाला ठहराया।
[37] जब लोगों ने यह सब सुना, उनके मन कायल हो गए और पतरस और बाकी प्रेरितों से पूछा, "हे भाइयों, हम करें क्या?"
[38] पतरस ने उन्हें जवाब दिया, "अपना मन बदलो और तुम में से हर एक यीशु मसीह के नाम से गुनाहों की मुआफ़ी के लिए बपतिस्मा ले। ऐसा करने से तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।
[39] क्योंकि यह वायदा तुम, तुम्हारे वंश और जो दूर-दराज़ के लोग हैं उनके लिए है, जिन्हें हमारे प्रभु और परमेश्वर बुलाएँगे।"
[40] दूसरी और बातें कहकर उसने गवाही दी और कहा, "अपने आप को इस टेढ़ी जाति (भ्रष्ट पीढ़ी) से बचा कर रखो।"
[41] तब जिन लोगों ने खुशी से उसकी बातों को स्वीकार किया था, उन्हें बपतिस्मा दिया गया। उसी दिन लगभग तीन हज़ार लोग उन में मिल गए।
[42] वे सभी प्रेरितों से सीखने, संगति करने, रोटी तोड़ने और प्रार्थना (आराधना) करने में लगे रहे।
[43] वहाँ रहने वाले हर एक व्यक्ति पर डर छा गया। प्रेरितों के हाथों से तमाम अद्भुत काम और चमत्कारिक काम किए जाते थे।
[44] सभी जिन्होंने यीशु पर विश्वास किया था साथ रहते थे।
[45] वे अपनी वस्तुओं और सम्पत्ति को बेच बेचकर, जैसी जिस को ज़रुरत हुआ करती थी बाँट लिया करते थे।
[46] वे यहूदी प्रार्थना भवन में हर दिन एक मन से इकट्ठा हुआ करते थे। घर-घर में जाकर यीशु की याद में रोटी तोड़ते थे। वे मन की सच्चाई और खुशी से अपना खाना खाया करते थे।
[47] वे परमेश्वर की बड़ाई किया करते थे। सभी लोग उन से खुश थे। जो लोग मुक्ति पाते जा रहे थे, उन्हें प्रभु, मण्डली (झुण्ड) में जोड़ते जाते थे।