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[1] सोर देश के राजा हूरम ने केदार के पेड़ की लकड़ी, राजमिस्त्री और बढ़ई के साथ अपने दूत भेजे. हूरम की इच्छा थी दावीद के लिए एक घर बनवाना.

[2] दावीद को यह साफ़ निश्चय हो गया था कि याहवेह ने उन्हें राजा के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया है और यह भी कि याहवेह की प्रजा इस्राएल के लिए उसका राज्य बहुत ही गौरवान्वित हो गया है.

[3] येरूशलेम में बसने के बाद दावीद ने और विवाह किए और उनके और संतान उत्पन्न हुईं.

[4] येरूशलेम में उत्पन्न उनकी संतान के नाम ये हैं: शम्मुआ, शोबाब, नाथान, शलोमोन,

[5] इबहार, एलिशुआ एलपेलेत,

[6] नोगाह, नेफ़ेग, याफिया,

[7] एलिषमा, बीएलिआदा और एलिफेलेत.

[8] जब फिलिस्‍तीनियों को यह मालूम हुआ कि सारे इस्राएल के लिए दावीद का राजाभिषेक किया गया है, सभी फिलिस्‍तीनी दावीद की खोज में निकल पड़े. दावीद को इसका समाचार मिल गया. वह उनसे युद्ध करने निकल पड़े.

[9] इस समय फिलिस्‍तीनी आकर रेफाइम घाटी में फैल गए.

[10] दावीद ने परमेश्वर से पूछा, “क्या मैं फिलिस्‍तीनियों पर हमला करूं? क्या आप उन्हें मेरे अधीन कर देंगे?” याहवेह ने दावीद को उत्तर दिया, “हमला करो! मैं उन्हें तुम्हारे अधीन कर दूंगा.”

[11] दावीद और उसके सैनिकों ने बाल-पेराज़िम नामक स्थान पर पहुंचे और वहां फिलिस्‍तीनियों को हरा दिया. वहां दावीद ने यह घोषित किया, “परमेश्वर ने मेरे शत्रुओं पर कुछ ऐसे टूट पड़े, जैसे बहुत से जल का बहाव,” इस पर उस स्थान का नाम पड़ गया, बाल-पेराज़िम.

[12] फिलिस्‍तीनी अपने देवता वहीं छोड़कर भागे थे. तब दावीद ने आदेश दिया और वे जला दिए गए.

[13] एक बार फिर फिलिस्‍तीनियों ने उस घाटी में छापा मारा.

[14] दावीद ने दोबारा परमेश्वर से पूछा और परमेश्वर ने उन्हें उत्तर दिया, “तुम उनका पीछा करते हुए हमला न करना, बल्कि घूमकर उनके पीछे जाओ और मोखा पेड़ों के सामने से उन पर हमला करो.

[15] हमला उस समय सही होगा, जब तुम्हें मोखा के पेड़ों के ऊपर से सेना की चहल-कदमी सुनाई देने लगें. तब तुम युद्ध शुरू कर देना, क्योंकि उस समय परमेश्वर तुम्हारे आगे-आगे फिलिस्‍तीनी सेना को मारते हुए आगे बढ़ रहे होंगे.”

[16] दावीद ने वैसा ही किया, जैसा परमेश्वर ने आदेश दिया था. उन्होंने गिबयोन से लेकर गेज़ेर तक फिलिस्‍तीनी सेना को मार गिराया.

[17] सभी देशों में दावीद की कीर्ति फैलती चली गई. याहवेह ने सभी देशों पर उनका आतंक फैला दिया.

1 इतिहास — Chapters