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[1] अगर तू किसी हुक्मरान के खाने में शरीक हो जाए तो ख़ूब ध्यान दे कि तू किस के हुज़ूर है।

[2] अगर तू पेटू हो तो अपने गले पर छुरी रख।

[3] उस की उम्दा चीज़ों का लालच मत कर, क्यूँकि यह खाना फ़रेबदिह है।

[4] अपनी पूरी ताक़त अमीर बनने में सर्फ़ न कर, अपनी हिक्मत ऐसी कोशिशों से ज़ाए मत कर।

[5] एक नज़र दौलत पर डाल तो वह ओझल हो जाती है, और पर लगा कर उक़ाब की तरह आसमान की तरफ़ उड़ जाती है।

[6] जलने वाले की रोटी मत खा, उस के लज़ीज़ खानों का लालच न कर।

[7] क्यूँकि यह गले में बाल की तरह होगा। वह तुझ से कहेगा, “खाओ, पियो!” लेकिन उस का दिल तेरे साथ नहीं है।

[8] जो लुक़्मा तू ने खा लिया उस से तुझे क़ै आएगी, और तेरी उस से दोस्ताना बातें ज़ाए हो जाएँगी।

[9] अहमक़ से बात न कर, क्यूँकि वह तेरी दानिशमन्द बातें हक़ीर जानेगा।

[10] ज़मीन की जो हुदूद क़दीम ज़माने में मुक़र्रर हुईं उन्हें आगे पीछे मत करना, और यतीमों के खेतों पर क़ब्ज़ा न कर।

[11] क्यूँकि उन का छुड़ाने वाला क़वी है, वह उन के हक़ में ख़ुद तेरे ख़िलाफ़ लड़ेगा।

[12] अपना दिल तर्बियत के हवाले कर और अपने कान इल्म की बातों पर लगा।

[13] बच्चे को तर्बियत से महरूम न रख, छड़ी से उसे सज़ा देने से वह नहीं मरेगा।

[14] छड़ी से उसे सज़ा दे तो उस की जान मौत से छूट जाएगी।

[15] मेरे बेटे, अगर तेरा दिल दानिशमन्द हो तो मेरा दिल भी ख़ुश होगा।

[16] मैं अन्दर ही अन्दर ख़ुशी मनाऊँगा जब तेरे होंट दियानतदार बातें करेंगे।

[17] तेरा दिल गुनाहगारों को देख कर कुढ़ता न रहे बल्कि पूरे दिन रब का ख़ौफ़ रखने में सरगर्म रहे।

[18] क्यूँकि तेरी उम्मीद जाती नहीं रहेगी बल्कि तेरा मुस्तक़बिल यक़ीनन अच्छा होगा।

[19] मेरे बेटे, सुन कर दानिशमन्द हो जा और सहीह राह पर अपने दिल की राहनुमाई कर।

[20] शराबी और पेटू से दरेग़ कर,

[21] क्यूँकि शराबी और पेटू ग़रीब हो जाएंगे, और काहिली उन्हें चीथड़े पहनाएगी।

[22] अपने बाप की सुन जिस ने तुझे पैदा किया, और अपनी माँ को हक़ीर न जान जब बूढ़ी हो जाए।

[23] सच्चाई ख़रीद ले और कभी फ़रोख़्त न कर, उस में शामिल हिक्मत, तर्बियत और समझ अपना ले।

[24] रास्तबाज़ का बाप बड़ी ख़ुशी मनाता है, और दानिशमन्द बेटे का वालिद उस से लुत्फ़अन्दोज़ होता है।

[25] चुनाँचे अपने माँ-बाप के लिए ख़ुशी का बाइस हो, ऐसी ज़िन्दगी गुज़ार कि तेरी माँ जश्न मना सके।

[26] मेरे बेटे, अपना दिल मेरे हवाले कर, तेरी आँखें मेरी राहें पसन्द करें।

[27] क्यूँकि कस्बी गहरा गढ़ा और ज़िनाकार औरत तंग कुआँ है,

[28] डाकू की तरह वह ताक लगाए बैठ कर मर्दों में बेवफ़ाओं का इज़ाफ़ा करती है।

[29] कौन आहें भरता है? कौन हाय हाय करता और लड़ाई-झगड़े में मुलव्वस रहता है? किस को बिलावजह चोटें लगती, किस की आँखें धुन्दली सी रहती हैं?

[30] वह जो रात गए तक मै पीने और मसालेदार मै से मज़ा लेने में मसरूफ़ रहता है।

[31] मै को तकता न रह, ख़्वाह उस का सुर्ख़ रंग कितनी ख़ूबसूरती से प्याले में क्यूँ न चमके, ख़्वाह उसे बड़े मज़े से क्यूँ न पिया जाए।

[32] अन्जामकार वह तुझे साँप की तरह काटेगी, नाग की तरह डसेगी।

[33] तेरी आँखें अजीब-ओ-ग़रीब मन्ज़र देखेंगी और तेरा दिल बेतुकी बातें हकलाएगा।

[34] तू समुन्दर के बीच में लेटने वाले की मानिन्द होगा, उस जैसा जो मस्तूल पर चढ़ कर लेट गया हो।

[35] तू कहेगा, “मेरी पिटाई हुई लेकिन दर्द मह्सूस न हुआ, मुझे मारा गया लेकिन मालूम न हुआ। मैं कब जाग उठूँगा ताकि दुबारा शराब की तरफ़ रुख़ कर सकूँ?”

अम्साल — Chapters