[1] मै तानाज़न का बाप और शराब शोर-शराबा की माँ है। जो यह पी पी कर डगमगाने लगे वह दानिशमन्द नहीं।
[2] बादशाह का क़हर जवान शेरबबर की दहाड़ों की मानिन्द है, जो उसे तैश दिलाए वह अपनी जान पर खेलता है।
[3] लड़ाई-झगड़े से बाज़ रहना इज़्ज़त का तुर्रा-ए-इम्तियाज़ है जबकि हर अहमक़ झगड़ने के लिए तय्यार रहता है।
[4] काहिल वक़्त पर हल नहीं चलाता, चुनाँचे जब वह फ़सल पकते वक़्त अपने खेत पर निगाह करे तो कुछ नज़र नहीं आएगा।
[5] इन्सान के दिल का मन्सूबा गहरे पानी की मानिन्द है, लेकिन समझदार आदमी उसे निकाल कर अमल में लाता है।
[6] बहुत से लोग अपनी वफ़ादारी पर फ़ख़र करते हैं, लेकिन क़ाबिल-ए-एतिमाद शख़्स कहाँ पाया जाता है?
[7] जो रास्तबाज़ बेइल्ज़ाम ज़िन्दगी गुज़ारे उस की औलाद मुबारक है।
[8] जब बादशाह तख़्त-ए-अदालत पर बैठ जाए तो वह अपनी आँखों से सब कुछ छान कर हर ग़लत बात एक तरफ़ कर लेता है।
[9] कौन कह सकता है, “मैं ने अपने दिल को पाक-साफ़ कर रखा है, मैं अपने गुनाह से पाक हो गया हूँ”?
[10] ग़लत बाट और ग़लत पैमाइश, रब दोनों से घिन खाता है।
[11] लड़के का किरदार उस के सुलूक से मालूम होता है। इस से पता चलता है कि उस का चाल-चलन पाक और रास्त है या नहीं।
[12] सुनने वाले कान और देखने वाली आँखें दोनों ही रब ने बनाई हैं।
[13] नींद को प्यार न कर वर्ना ग़रीब हो जाएगा। अपनी आँखों को खुला रख तो जी भर कर खाना खाएगा।
[14] गाहक दुकानदार से कहता है, “यह कैसी नाक़िस चीज़ है!” लेकिन फिर जा कर दूसरों के सामने अपने सौदे पर शेख़ी मारता है।
[15] सोना और कस्रत के मोती पाए जा सकते हैं, लेकिन समझदार होंट उन से कहीं ज़्यादा क़ीमती हैं।
[16] ज़मानत का वह लिबास वापस न कर जो किसी ने परदेसी का ज़ामिन बन कर दिया है। अगर वह अजनबी का ज़ामिन हो तो उस ज़मानत पर ज़रूर क़ब्ज़ा कर जो उस ने दी थी।
[17] धोके से हासिल की हुई रोटी आदमी को मीठी लगती है, लेकिन उस का अन्जाम कंकरों से भरा मुँह है।
[18] मन्सूबे सलाह-मश्वरे से मज़बूत हो जाते हैं, और जंग करने से पहले दूसरों की हिदायात पर ध्यान दे।
[19] अगर तू बुह्तान लगाने वाले को हमराज़ बनाए तो वह इधर उधर फिर कर बात फैलाएगा। चुनाँचे बातूनी से गुरेज़ कर।
[20] जो अपने बाप या माँ पर लानत करे उस का चराग़ घने अंधेरे में बुझ जाएगा।
[21] जो मीरास शुरू में बड़ी जल्दी से मिल जाए वह आख़िर में बरकत का बाइस नहीं होगी।
[22] मत कहना, “मैं ग़लत काम का इन्तिक़ाम लूँगा।” रब के इन्तिज़ार में रह तो वही तेरी मदद करेगा।
[23] रब झूटे बाटों से घिन खाता है, और ग़लत तराज़ू उसे अच्छा नहीं लगता।
[24] रब हर एक के क़दम मुक़र्रर करता है। तो फिर इन्सान किस तरह अपनी राह समझ सकता है?
[25] इन्सान अपने लिए फंदा तय्यार करता है जब वह जल्दबाज़ी से मन्नत मानता और बाद में ही मन्नत के नताइज पर ग़ौर करने लगता है।
[26] दानिशमन्द बादशाह बेदीनों को छान छान कर उड़ा लेता है, हाँ वह गाहने का आला ही उन पर से गुज़रने देता है।
[27] आदमज़ाद की रूह रब का चराग़ है जो इन्सान के बातिन की तह तक सब कुछ की तहक़ीक़ करता है।
[28] शफ़्क़त और वफ़ा बादशाह को मह्फ़ूज़ रखती हैं, शफ़्क़त से वह अपना तख़्त मुस्तह्कम कर लेता है।
[29] नौजवानों का फ़ख़र उन की ताक़त और बुज़ुर्गों की शान उन के सफ़ेद बाल हैं।
[30] ज़ख़्म और चोटें बुराई को दूर कर देती हैं, ज़र्बें बातिन की तह तक सब कुछ साफ़ कर देती हैं।