Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:35

[1] इन्सान दिल में मन्सूबे बांधता है, लेकिन ज़बान का जवाब रब की तरफ़ से आता है।

[2] इन्सान की नज़र में उस की तमाम राहें पाक-साफ़ हैं, लेकिन रब ही रूहों की जाँच-पड़ताल करता है।

[3] जो कुछ भी तू करना चाहे उसे रब के सपुर्द कर। तब ही तेरे मन्सूबे कामयाब होंगे।

[4] रब ने सब कुछ अपने ही मक़ासिद पूरे करने के लिए बनाया है। वह दिन भी पहले से मुक़र्रर है जब बेदीन पर आफ़त आएगी।

[5] रब हर मग़रूर दिल से घिन खाता है। यक़ीनन वह सज़ा से नहीं बचेगा।

[6] शफ़्क़त और वफ़ादारी गुनाह का कफ़्फ़ारा देती हैं। रब का ख़ौफ़ मानने से इन्सान बुराई से दूर रहता है।

[7] अगर रब किसी इन्सान की राहों से ख़ुश हो तो वह उस के दुश्मनों को भी उस से सुलह कराने देता है।

[8] इन्साफ़ से थोड़ा बहुत कमाना नाइन्साफ़ी से बहुत दौलत जमा करने से कहीं बेहतर है।

[9] इन्सान अपने दिल में मन्सूबे बांधता रहता है, लेकिन रब ही मुक़र्रर करता है कि वह आख़िरकार किस राह पर चल पड़े।

[10] बादशाह के होंट गोया इलाही फ़ैसले पेश करते हैं, उस का मुँह अदालत करते वक़्त बेवफ़ा नहीं होता।

[11] रब दुरुस्त तराज़ू का मालिक है, उसी ने तमाम बाटों का इन्तिज़ाम क़ाइम किया।

[12] बादशाह बेदीनी से घिन खाता है, क्यूँकि उस का तख़्त रास्तबाज़ी की बुन्याद पर मज़बूत रहता है।

[13] बादशाह रास्तबाज़ होंटों से ख़ुश होता और साफ़ बात करने वाले से मुहब्बत रखता है।

[14] बादशाह का ग़ुस्सा मौत का पेशख़ैमा है, लेकिन दानिशमन्द उसे ठंडा करने के तरीक़े जानता है।

[15] जब बादशाह का चेहरा खिल उठे तो मतलब ज़िन्दगी है। उस की मन्ज़ूरी मौसम-ए-बहार के तर-ओ-ताज़ा करने वाले बादल की मानिन्द है।

[16] हिक्मत का हुसूल सोने से कहीं बेहतर और समझ पाना चाँदी से कहीं बढ़ कर है।

[17] दियानतदार की मज़बूत राह बुरे काम से दूर रहती है, जो अपनी राह की पहरादारी करे वह अपनी जान बचाए रखता है।

[18] तबाही से पहले ग़ुरूर और गिरने से पहले तकब्बुर आता है।

[19] फ़रोतनी से ज़रूरतमन्दों के दरमियान बसना घमंडियों के लूटे हुए माल में शरीक होने से कहीं बेहतर है।

[20] जो कलाम पर ध्यान दे वह ख़ुशहाल होगा, मुबारक है वह जो रब पर भरोसा रखे।

[21] जो दिल से दानिशमन्द है उसे समझदार क़रार दिया जाता है, और मीठे अल्फ़ाज़ तालीम में इज़ाफ़ा करते हैं।

[22] फ़हम अपने मालिक के लिए ज़िन्दगी का सरचश्मा है, लेकिन अहमक़ की अपनी ही हमाक़त उसे सज़ा देती है।

[23] दानिशमन्द का दिल समझ की बातें ज़बान पर लाता और तालीम देने में होंटों का सहारा बनता है।

[24] मेहरबान अल्फ़ाज़ ख़ालिस शहद हैं, वह जान के लिए शीरीं और पूरे जिस्म को तर-ओ-ताज़ा कर देते हैं।

[25] ऐसी राह भी होती है जो देखने में तो ठीक लगती है गो उस का अन्जाम मौत है।

[26] मज़दूर का ख़ाली पेट उसे काम करने पर मज्बूर करता, उस की भूक उसे हाँकती रहती है।

[27] शरीर कुरेद कुरेद कर ग़लत काम निकाल लेता, उस के होंटों पर झुलसाने वाली आग रहती है।

[28] कजरौ आदमी झगड़े छेड़ता रहता, और तोहमत लगाने वाला दिली दोस्तों में भी रख़ना डालता है।

[29] ज़ालिम अपने पड़ोसी को वरग़ला कर ग़लत राह पर ले जाता है।

[30] जो आँख मारे वह ग़लत मन्सूबे बांध रहा है, जो अपने होंट चबाए वह ग़लत काम करने पर तुला हुआ है।

[31] सफ़ेद बाल एक शानदार ताज हैं जो रास्तबाज़ ज़िन्दगी गुज़ारने से हासिल होते हैं।

[32] तहम्मुल करने वाला सूरमे से सब्क़त लेता है, जो अपने आप को क़ाबू में रखे वह शहर को शिकस्त देने वाले से बरतर है।

[33] इन्सान तो क़ुरआ डालता है, लेकिन उस का हर फ़ैसला रब की तरफ़ से है।

अम्साल — Chapters