Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:33

[1] मेरे बेटे, मेरी बात क़बूल करके मेरे अह्काम अपने दिल में मह्फ़ूज़ रख।

[2] अपना कान हिक्मत पर धर, अपना दिल समझ की तरफ़ माइल कर।

[3] बसीरत के लिए आवाज़ दे, चिल्ला कर समझ माँग।

[4] उसे यूँ तलाश कर गोया चाँदी हो, उस का यूँ खोज लगा गोया पोशीदा ख़ज़ाना हो।

[5] अगर तू ऐसा करे तो तुझे रब के ख़ौफ़ की समझ आएगी और अल्लाह का इर्फ़ान हासिल होगा।

[6] क्यूँकि रब ही हिक्मत अता करता, उसी के मुँह से इर्फ़ान और समझ निकलती है।

[7] वह सीधी राह पर चलने वालों को कामयाबी फ़राहम करता और बेइल्ज़ाम ज़िन्दगी गुज़ारने वालों की ढाल बना रहता है।

[8] क्यूँकि वह इन्साफ़ पसन्दों की राहों की पहरादारी करता है। जहाँ भी उस के ईमानदार चलते हैं वहाँ वह उन की हिफ़ाज़त करता है।

[9] तब तुझे रास्ती, इन्साफ़, दियानतदारी और हर अच्छी राह की समझ आएगी।

[10] क्यूँकि तेरे दिल में हिक्मत दाख़िल हो जाएगी, और इल्म-ओ-इर्फ़ान तेरी जान को प्यारा हो जाएगा।

[11] तमीज़ तेरी हिफ़ाज़त और समझ तेरी चौकीदारी करेगी।

[12] हिक्मत तुझे ग़लत राह और कजरौ बातें करने वाले से बचाए रखेगी।

[13] ऐसे लोग सीधी राह को छोड़ देते हैं ताकि तारीक रास्तों पर चलें,

[14] वह बुरी हरकतें करने से ख़ुश हो जाते हैं, ग़लत काम की कजरवी देख कर जश्न मनाते हैं।

[15] उन की राहें टेढ़ी हैं, और वह जहाँ भी चलें आवारा फिरते हैं।

[16] हिक्मत तुझे नाजाइज़ औरत से छुड़ाती है, उस अजनबी औरत से जो चिकनी-चुपड़ी बातें करती,

[17] जो अपने जीवनसाथी को तर्क करके अपने ख़ुदा का अह्द भूल जाती है।

[18] क्यूँकि उस के घर में दाख़िल होने का अन्जाम मौत, उस की राहों की मन्ज़िल-ए-मक़सूद पाताल है।

[19] जो भी उस के पास जाए वह वापस नहीं आएगा, वह ज़िन्दगीबख़्श राहों पर दुबारा नहीं पहुँचेगा।

[20] चुनाँचे अच्छे लोगों की राह पर चल फिर, ध्यान दे कि तेरे क़दम रास्तबाज़ों के रास्ते पर रहें।

[21] क्यूँकि सीधी राह पर चलने वाले मुल्क में आबाद होंगे, आख़िरकार बेइल्ज़ाम ही उस में बाक़ी रहेंगे।

[22] लेकिन बेदीन मुल्क से मिट जाएंगे, और बेवफ़ाओं को उखाड़ कर मुल्क से ख़ारिज कर दिया जाएगा।

अम्साल — Chapters