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[1] “सचेत रहु! तूँ आमदी के देखावे लगी अप्पन धरम के करहु नञ करीहे, नञ त अप्पन स रगीय पिता से कुच्छो फर नञ मिलतो।

[2] “एहिसे जब तूँ दान करवऽ, त अपना आगू तुरही नञ बज बावऽ, जइसे कप टी, स भा आउर गलिय न में करऽ हइ, जे से लोग उनकर बड़ाइ करय। हम तोरा से सच कहऽ हियो कि ऊ अप्पन फर पा चुकलन।

[3] बाकि जब तूँ दान करऽ, तो जे तोरा दहिना हाँथा करऽ हइ, ओकर तोहर बाँया हाँथा नञ जानो।

[4] जे से तोहर दान गुपुत रहो, आउर तब तोहर पिता जे अन्तरजामी हथ, तोरा फर देथुन।

[5] “जब तूँ परारथाना करहु, त कपटियन के नियन नञ होय, काहेकि लोग के देखावे लगी मनि्दल में आउर रहता के मोड़वन पर खड़ा होके परारथाना करनाय उनका बेस लगऽ हे। हम तोरा से सच कहऽ हियो कि ऊ अप्पन फर पा चुकलन।

[6] बाकि जब तूँ परारथाना करहु, त अप्पन कोठरी में जा; आउर दुआर बन्द कर के अप्पन पिता से जे गुपुत में हथ परारथाना करऽ। तब तोहर पिता जे गुपुत में देखइत हथ, तोरा ओकर फर देविन।

[7] पराथाना करे बखत आन जात नियर बकबक न करि य ह, काहेकि ऊ बुभ्फऽ हथिान कि उनखर बेसी बोलला से उनकर सुनल जयतइ।

[8] एहिसे तूँ उनके नियन नञ बनहु, तोहर पिता तोहर माँगे से पहिले ही जानऽ हथ कि तोरा कउची-कउची जरू रत हइ।

[9] “ई से तूँ ई तरे पराथाना कयल करऽ ‘हे हम्मर पिता, तूँ जे सरग में हे तोहर नाम पवितर मानल जाय।

[10] ‘तोहर राज आवे। तोहर हिच्छा जइसे सरग में पुरा होवऽ हे, ओय सही ध् रतीयो पर होय।

[11] हम्मर दिन भर के रोटी आझ हमरा देहु।

[12] ‘आउर जइसे हम अप्पन दुस मन के माप फ कइली हे, ओय सही तूँहो हम्मर कसूर के माप फ करऽ।

[13] ‘आउर हमरा परीछा में नञ डालऽ, बाकि बुराइ से बचावऽ, (काहेकि राज आउर पराकरम आउर महिमा हरमेसा तोहरे होय। आमीन।)

[14] “एहिसे जे तूँ आमदी के कसूर माप फ करवहु, त तोहर स रगीय पिता तोरा माप फ करथुन।

[15] आउर जे तूँ आमदी के कसूर माप फ नञ करवहु, तो तोहर पिता तोहरो कसूर माप फ नञ करथुन।

[16] “जब तूँ उपास करहु, त कपटियन नियन मुँह पर उदासी नञ छाय ल रहे, काहेकि ओ अप्पन मुँह बनवले रहऽ हथ, जे से लोग उनका उपास ल बुभ्फे। हम तोहरा से सच कहऽ हियो कि ओ अप्पन फर पा चुकलन।

[17] बाकि जब तूँ उपास करऽ त अप्पन माथा पर तेल लगावऽ आउर मूँह धोवऽ,

[18] जे से लोग नञ बाकि तोहर पिता जे गुप्त हथ, तोरा उपास लय जाने। ई दसा में तोर पिता जे छिप ल में देखइत हथ, तोरा ओकर फर देथुन।

[19] “अपना लेल धरती पर धन जौरे नञ करहु, ज हँ कीड़ा अउर काइ बिगाड़ऽ हइ, आउर ज हँ चोर सेंघ लगावऽ आउर चोरावऽ हइ।

[20] बाकि अपना ले सरग में धन जमा करहु, ज हँ चोर नञ सेंघ लगउतइ आउर नञ चोरय तइ।

[21] काहेकि जहिं तोहर धन हे उहें तोहर मनो लगल रहतइ।

[22] “देह के दीया आँखि हे: एहिसे जे तोहर आँखि साफ रहतो, त तोहर स उँसे देहो इंजोर होतइ।

[23] बाकि जे तोहर आँखि में खराबी हो, त तोर स उँसे देहो अन्धार होतइ, एहिसे ऊ इंजोर जे तोरा में हे जे अन्धार होय त ऊ अन्धार कयसन बड़ होइत।

[24] “कोइ आमदी दूगो मलिकवन के सेवा नञ कर स कऽ हे, काहेकि ऊ एगो से बइर आउर दोस रा से परेम रखतइ, चाहे एगो से मिलल रहतइ आउर दोस रा के हेय बुझतइ। तूँ परमेसर आउर धन दुन्नो के सेवा नञ कर स कऽ हु।

[25] एहिसे हम तोरा से कहऽ हियो कि अप्पन परान लागी ई चिनता न करिय हु कि हम का खाय म आउर का पीय म; आउर नञ अप्पन देह लगी कि का पहिरम। का परान खाना से, आउर देह कपड़ा से बढ़के नञ?

[26] अस मान के चिडि़मन के देखहु! ऊ नञ बोव हइ, न छेवऽ हइ, आउर नञ खेतमन में बटोरऽ हइ, तइयो तोहर स रगीय पिता उनका खिलावऽ हथ। का तूँ उनका से बेसी महत्ता नञ रखऽ हु?

[27] तोरा में कउन हे, जे चिनता करके अप्पन उमिर में एगो घड़ी बढ़ा स कऽ हे?

[28] “आउर बस तर लागी काहे चिनता करइत हऽ? जंगली सोस नो पर धि् यान करहु कि ऊ कइसे बढ़ऽ हइ, ऊ नञ तो मेहनत कर हइ, न कातऽ हइ।

[29] तइयो हम तोरा से कहऽ हियो कि सुलैमानो, अप्पन स उँफसे अमीरी में उनका से केकरो नियर बस तर पहिरले नञ हलन।

[30] एहिसे जब परमेसर मैदान के घास के, जे आझ हे आउर काल्ह भाड़ में झोंका जयतइ, अइसन बस तर पहिराव हथ, त हे कम विस वास करे बाला, तोरा ऊ एकरा से बढ़के काहे नञ पहिरइतो?

[31] “एहिसे तूँ चिनता करके ई नञ कहिय हु कि हम का खाय म, चाहे का पीय म, चाहे का पहिरम।

[32] काहेकि आन जात ई सब चीज वन के खोज में रहइत हथ, बाकि तोहर स रगीय पिता जानऽ हथ कि तोरा ई सब चीज वन के जरू रत हे।

[33] एहिसे पहिले तूँ परमेसर के राज आउर उनखर धरम के खोज करहु त ई सब चीज वनो तोरा मिल जाय तो।

[34] ऐहिसे काल्ह के चिनता नत करहु, काहेकि काल्ह के दिन अप्पन चिनता आपे कर लेतइ; आभ्फ के दिन आझे के दुःख ढे़र हइ।

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