[1] जब यीसु मनि्दल से निकस के जा रहलथी हल, त उनखर चेलमन उनखा मनि्दल के बनावट देखावे लेल उनका भीरी अयलन।
[2] ऊ उनका से कहलथी, “तूँ ई सब देखइत हू नञ! हम तोरा से सच कहऽ हियो, हीयाँ पत्थाल पर पत्थालो नञ छूटतई जे ढाहल नञ जएतइ।” बिप त आउर दुख
[3] जब ऊ जयतून पहाड़ पर बइठल हलथी, त चेलमन एकान्त में उनखा भीरी आके कहलन, हमनी के बतावऽ कि ई बात कब होतइ? तोर आवे के आउर दुनिया के खतम होवे के का चिन्हासी होतइ?”
[4] यीसु उनका ज बाब देलथी, “सचेत रहऽ! कोइ तोरा नञ भरमावो,
[5] काहेकि ढेरस न अइसन होतइ जे हमर नाँव से आके कहतो, ‘हम मसीह ही’, आउर ढेरमनी के भरमय तई।
[6] तूँ लड़ाइ पर लड़ाइ के चर्चा सुनवहु, त घबरा नञ ज एइहऽ काहेकि एकर होनाय जरू री हे, बाकि तखनी अन्त नञ होतइ।
[7] काहेकि जात पर जात, आउर राज पर राज चढ़ाइ करतइ, आउर ठाँवे ठाँव अकाल पड़तइ, आउर धरती डोलतइ।
[8] ई सब बात बेथा के सुरू आत होतइ।
[9] तब ओ दुख देवे ला तोरा पकड़वइतइ आउर तोरा मार देतो, आउर हमर नाँव के लागी सभ जात के लोग तोहनी से बैर रखतइ
[10] तब ढेरमनी ठोकर खइतइ, आउर एक दोस रा के पकड़वइतइ, अउर एक दोस रा से बैर रखतइ।
[11] ढे़र स न झुठ्टा भबिस वक्ता खड़ा हो जयतइ, आउर ढ़ेरमनी के भरमइतइ।
[12] अध् रम के बढे़ से ढेरमनी के परेम ठंढा पड़ जएतइ,
[13] बाकि जे अनि्तम ले धीरज ध् इले रहतइ, ओकरे उद्धार होतइ।
[14] आउर राज के ई सुभस माचार सँउसे संसार में परचार कयल जएतइ, कि सब जात पर गवाही होय, तब अन्त आ जएतई। बड़का बिप त के सुरू आत
[15] “एहिसे जब तूँ उ उजाड़े वाला घिरना के चीज के जेकर चरचा दानिय्येल भबिस वक्ता के दिया होलइ हल, पवित्तर अस थान में खड़ा होइत देखहु (जे पढे, ऊ बुभ्फे),
[16] तब जे यहूदिया में होय ओ पहाड़वन पर भाग जाय।
[17] जे छत पर होय, उ अप्पन घर से स मान लेवे लागी नञ उतरे
[18] आउर जे खेत में हो, उ अप्पन कपड़ा लेवे ला पीछू नञ लउटे।
[19] ओ दिनन में जे पेट से हे आउर दूध् पि याबइत होथिान, उनका लेल हाय, हाय।
[20] प राथाना कइल करहु कि तोरा जाड़ा में चाहे सबत के दिन भागे नञ पड़ो।
[21] काहेकि तखनी अय स न भारी बिप त होतइ, जयस न संसार के सुरू आत से नञ अबले होलइ आउर नञ कहियो होतइ।
[22] जे ओ दिन घटावल नञ जयतइ तो कोइ परानी नञ बचतइ, बाकि चुनल के ओज ह से ओ दिन घटावल जयतई।
[23] उ बखत जे कोइ तोरा से कहो, ‘देखहु, मसीह हीयाँ हे! चाहे ‘हुआँ हे!’ तो बिसवास नञ करिहऽ।
[24] “काहे कि झूठ्ठा मसीह आउर झूठ्ठा भबिस वक्ता खड़ा होतइ, आउर बड़ चिन्हासी, आउर अज गुत काम देखउतई कि जे हो स के तो चुनलो के भरमा दे।
[25] देखहु, हम पहिले से तोरा से ई सभ कुछ कह देलियो हे।
[26] एहिसे जे ओ तोरा से कहो, ‘देखहु उ जंगल में हे’ तो बाहिर न निकस ज इअहु चाहे ‘देखहु, उ कोठरिय न में हे, तो बिसवास न करिय हु।
[27] “काहेकि जइसे बिजुरी पुरूब से निकस के पछिम ले चमकनाय हे, ओय सही आमदी के बेटो के आनाय होतइ।
[28] ज हाँ माँस होतइ, हूएँ गिध् जमा होतइ।
[29] “तखनी के दुख के तुरते बाद सूरू ज अन्धार हो जयतइ, आउर चाँद के इंजोर खतम हो जयतइ, आउर तारा अकास से गिर पड़तइ आउर अकास के ताकत हिलावल ज य तई।
[30] तब आमदी के बेटा के चिन्हासी अकास में देखाय देतइ, आउर तब ध् रती के सभ कुल के लोग छाती पीटतइ; आउर आमदी के बेटा के बड़का स मारथा अउर ऐस वरय के जोरे अकास के बादल पर आवइत देखतइ।
[31] उ तुरही के जोरदार आवाज जोरे अप्पन दूतवन के पेठइतइ, आउर ओ अकास के ई छोर से ओ छोर ले चारो कोना से ओकर चुनल के जमा करतइ।
[32] “अंजीर के फेड़ से ई परभ्फो सीखहू: जब ओकर डाँड़ कोमल हो जाय आउर प त्ता निकसे लगऽ हइ तो तूँ जान लेहू कि गरमी के बखत नगीच हे।
[33] ईहे तरे ज ब तूँ ई सब बात के देखहु, त जान लेहू कि उ नगीच हे, बाकि दुआर पर हे।
[34] हम तोरा से सच कहऽ हियो कि जबले ई सब बात पूरा नञ हो जाय, तबले ई पीढ़ी के अन्त नञ होतइ।
[35] अकास आउर ज मीन घस क जयतई, बाकि हमर बात कहियो न टस कतई।
[36] “ऊ दिन आउर उ बखत के बारे में कोइ नञ जानइत हे, नञ सरग के दूत आउर नञ बेटा, बाकि खाली पिता।
[37] जइसे नूह के दिन हलइ, ओय सही आमदी के बेटा के अनाइयो होतई।
[38] काहेकि जइसे पानी के परलय से पहिले के दिन में जे दिन ले कि नूह ज हाज पर नञ चढ़लन, ओ दिन ले लोग खाय त-पीय त हलन, आउर उनका में बियाह होवइत हल।
[39] आउर जबले पानी के परलय आके ओ सब के बहा ले गेलइ, तबले उनका कुच्छो मालूम नञ पड़लइ, ओय सेही आमदी के बेटा के अनाइयो होतइ।
[40] तखनी दूगो मजूर खेत में होतई, एगो लेले ज य तई आउर दोसर छोड़ देल जयतई।
[41] दूगो मेहरारू चक्की पीस इत रहतई, एगो ले लेवल जयतइ अउर दोसर छोड़ देल जयतई।
[42] एहिसे जागइत रहऽ, काहेकि तूँ नञ जानइत हू कि तोहर परभु कउन दिन अ य तन।
[43] बाकि ई जान लेहू कि जे घर के मालिक जानइत होतइ कि चोर कउन पहर अ य तइ त जागइत रहतइ, आउर अप्पन घर में सेंध् लगे नञ देतइ।
[44] एहिसे तूहों तैइयार रहऽ काहेकि जे बखत के बारे में तूँ सोचइतो न होबऽ, उहे बखत आमदी के बेटा आ जयथिान। बिसवास जोग दास आउर दुष्ट दास
[45] “ई से उ बिसवास जोग आउर होसि यार दास कउन हे, जेकरा मालिक अप्पन नउकर-चाकर के परधान बनइलन कि बखत पर उनका खाना दे?
[46] ध् न्न हे उ नउकर, जेकरा ओकर मालिक आके अइस ने करइत पय तई।
[47] हम तोरा से स च कहऽ हियो, ऊ ओकरा अप्पन स उँसे स म्प ति्त के अधिकारी बनइतई।
[48] बाकि जे उ दुष्ट नउकर सोचतई कि हमर मालिक के आवे में देर हे,
[49] आउर अप्पन संगतिया नउकर के पीटे लगलय आउर पि य क्कडमन के जौरे खाय-पीये।
[50] तो उ नउकर के मालिक अयसन दिन अय तइ, जब उ ओकर बाट नञ जोहइत होय, आउर अय स न बखत जेकरा उ नञ जानइत हो,
[51] तब ऊ ओकरा बेसी डाँटतई अउर ओकर हिस्सा कप टिय न के जौरे बाँटतइ: हुआँ रोनाय आउर दाँत पीस नाय होतई।