[1] ऊ ई भीड़ के देखके पहाड़ पर चढ़ गेलथी, अउर जब बइठलथी तब उनखर चेलवन उनखा भीरी अयलन।
[2] आउर अप्पन मुँह से उनका ई उपदेस देवे लगलथी:
[3] धन्न हथ ऊ, जे मन से गरीब हथ, काहेकि सरग के राज उनकरे हे।
[4] धन्न हथ ऊ, जे सोक करऽ हथ, काहेकि ऊ सानि्त पाय तन।
[5] धन्न हथ ऊ, जे नमर हथ, काहेकि ऊधरती के अधिकारी होतन।
[6] धन्न हथ ऊ, जे धरम के भूखल-आउर पीयासल हथ, काहे कि ऊ तिरपित कयल जयतन।
[7] धन्न हथ ऊ, जे दयावान हथ, काहेकि उनको पर दया कयल ज इतई।
[8] धन्न हथ ऊ, जि नकर मन साफ हे, काहेकि ऊ परमेसर के दरस न पइतई।
[9] धन्न हथ ऊ, जे मेल करावेवाला हथ, काहेकि ऊ परमेसर के बेटा कहलय तन।
[10] धन्न हथ ऊ, जे धरम के लेल सतावल जा हथ, काहेकि सरग के राज उनकरे हे।
[11] धन्न हऽ तूँ, जे आमदी हमरा ओझह से तोर निन्दा करय, आउर स तावय आउर भ्फूठ बोल-बोलके तोहर बिरोध् में सब तरह के खराब बात कहय।
[12] तब खुस आउर मगन होइहें, काहेकि तोरा लेल सरग में बड़का फर हे। एहिसे कि ऊ ओ भविसवक्तन के जे तोरा से पहिले हलन एहि तरह से सतावल गेलन हल।
[13] “तूँ धरती के नीमक हु बाकि जे नीमक के सोआद बिगड़ जाए, तब ऊ फिन कउन चीज से नमकीन कयल जाय तइ? फिन ऊ कउनो काम के नञ, खाली एतना कि बाहर फेंकल जाय आउर आमदी के पइर तरे कुचा जाय।
[14] तूँ संसार के रोसनी हु। जे सहर पहाड़ पर बस ल हे ऊ लुका नञ स कऽहे।
[15] आउर लोग दीया बार के माप ना के नीचे नञ बाकि दीय ट पर रक्खऽ हथ, तब ओकरा से घर के सभ लोग के इंजोर मिलऽ हे।
[16] ओय सही तोर इंजोर आमदी के सामने चमके कि ऊ तोर भल काम के देखके तोहर पिता के, जे सरग में हथ, बड़ाइ करथिान।
[17] ई नञ बुभ्फहु, कि हम बेवसथा चाहे भविसवक्ता के कितबवन के लुका देवे आयल ही, लुकावे नञ, बाकि पूराबे आयल ही।
[18] काहेकि हम तोरा से सच कहऽ हियो, कि जबले असमान आउर धरती गायब न हो जाए तबले बेबसथा से एगो रत्ती चाहे एगो बिन्दुओ बिना पुरा होले नञ घसकतई।
[19] एहिसे जे कोइ ई छोट से छोट आग्यां में से केकरो तोड़तई, आउर ओय स ने लोग के सि खय तई, ऊ सरग के राज मे सब से छोट कहलइतइ; बाकि जे कोइ ओ आग्यां के मानतइ आउर ओकरा सि खइतइ, उहे सुरग के राज में महान कहलइतइ।
[20] काहेकि हम तोरा से कहऽ हियो कि जे तोहर धरम के काम सास तिरिय न आउर फरीसियन के धारमिक काम से बढ़के नञ होय, त तूँ सरग के राज में कहियो पइस नञ स कबहु।
[21] “तूँ सुन चुकलहु होबहु, कि पहिले के बखत के लोग से कहल गेलइ हल कि ‘हतिया नञ करिय हु’ आउर जे कोय हतिया करतइ, ऊ कचहरी में सजा जोग होतइ’।
[22] बाकि हम तोरा से ई कहऽ हियो कि जे कोय अप्पन भाय पर किरोध् करतइ, ऊ कचहरी में सजा के जोग होतय, आउर जे कोय अप्पन भाय के निकम्मा कहतइ ऊ सबसे ऊँचा कचहरी में सजा के जोग होतइ, आउर जे कोय कहतई ‘रे मुरू ख’ ऊ नरक के आग के दण्ड के जोग होतइ,
[23] एहिसे जे तूँ अप्पन भेंट बेदी पर लाअ लऽ, आउर हुआँ तूँ धियान करे, कि तोर भाय के मन में तोरा ला कुछ बिरोध् हे,
[24] तब अप्पन भेंट हुअें बेदी के सामने छोड़ देहु आउर जाके पहिले अपन भाय से मेल मिलाप करहु अउर तब जाके अपन भेंट चढ़ावऽ।
[25] जबले तूँ अपन मुद्दइ के जौरे राहे में हे, ओकरा से तुरत मेल-मिलाप कर लऽ नञ तो अ य स न नञ हो कि मुद्दइ तोरा हाकिम के सँउपे, आउर हाकिम तोरा सि पाही के सँउप दे, अउर तूँ जेहल भेज देवल जा।
[26] हम तोरा से सच्चे कहऽ हियो कि जबले तूँ पाइ-पाइ भर न देवहु तब ले हुआँ से छूटियो न पाय बऽ।
[27] “तूँ सुन चुकलहु कि कहल गेलइ हल, ‘बेभिचार नञ करिअहु।’
[28] बाकि हम तोरा से ई कहऽ हियो, कि जे कोइ कउनो अउरत पर कुदिरीस टी डाले ऊ अप्पन मन में ओकरा से बेभिचार कर चुकलय हे।
[29] जे तोर दहिना आँख तोरा ठेस लगवाओ, त ओकरा निकास के पेंफक देहु, काहेकि तोरा लागी इहे भल हे कि तोहर अंगो में से एगो खतम हो जाओ आउर तोहर स उँसे देह नरक में नञ झोंकल जाय।
[30] जे तोहर दहिना हाँथा तोरा ठेस लगवाओ, त ओकरा काटके पेंफक देहु काहेकि तोरा ला इहे भल हे कि तोहर अंगो में से एगो खतम हो जाय आउर तोहर स उँसे देह नरक में नञ भ्फोंकल जाय।
[31] “ईहो कहल गेलइ हल, जे कोय अपन मेहरारू के तलाक देवे के चाहे, त ओकरा तियाग पतर दे।’
[32] बाकि हम तोरा से ई कहऽहियो कि जे कोय अप्पन मेहरारू के बेभिचार के अ लावे कउनो आउर ओज ह से छोड़ दे, त ऊ ओकरा से बेभिचार करवावऽ हे आउर जे कोय ऊ तियागल से बियाह करय, ऊ बेभिचार करऽ हे।
[33] “फिन तूँ सुन चुकलहु कि पुरखैन दिया कहल गेलइ हल, ‘भुफठे स मय नञ खइहऽ, बाकि परभु लगी अप्पन सपथ के पूरा करिय हु।’
[34] बाकि हम तोरा से ई कहऽ हियो कि कब्बो सपथ नञ खइहऽ, नञ त सरग के, काहेकि ऊ परमेसर के सिंहास न हे,
[35] नञ धरती के, काहेकि ऊ उनखर पइर के चौकी हे नञ यरूसलेम के, काहेकि ऊ महाराजा के सहर हे।
[36] अप्पन माथो के सपथ मत खाइहे काहेकि तूँ एगो केस के नञ उज्जर नञ करिया कर स कऽ हे।
[37] बाकि तोहर बात हाँ के हाँ, चाहे नञ के नञ होय, काहेकि जे कुछ एकरा से बेसी होबऽ हइ ऊ बुराइ से होबऽ हइ।
[38] “तूँ सुन चुकलहु कि कहल गेलइ हल, आँखि के बदला में आँखि, आउर दाँत के बदला में दाँत।’
[39] बाकि हम तोरा से ई कहऽ हियो कि बुरा के सामना नञ करिअहु, बाकि जे कोइ तोहर दहिना गाल पर थप्पर मारे, ओकरा दन्न दोस रो फेर देहु।
[40] जे कोइ तोरा पर मोकदमा करके तोहर कुरता लेवे चाहो, तो ओकरा दोहरो ले लेवे देहु।
[41] जे कोइ तोरा कोस भर बेगार में ले जाव, तो ओकरे जोरे दू कोस चल जा।
[42] जे कोइ तोरा से माँगे, ओकरा देहु आउर जे तोरा से उधारि लेवे के चाहे, ओकरा से मुँह नञ फेरिहऽ।
[43] “तूँ सुन चुकलहु कि कहल गेलइ हल, ‘अप्पन परोसि या से परेम रखिय हु, आउर अपना बैरी से बैर।’
[44] बाकि हम तोरा से ई कहऽ हियो कि अप्पन बैरियो से परेम रक्खऽ आउर अप्पन स तावेबाला लगी परारथा कहु,
[45] जेकरा से तूँ अप्पन स रगीय पिता के बेटा कहलाव, काहेकि ऊ भला आउर बूरा दुन्नो पर अप्पन सूरू ज उगावऽ हे, आउर धरमी आउर अध् रमी दुन्नो पर मेघ बरसावऽ हे।
[46] काहेकि तूँ अप्पन परेम रक्खेवालन से परेम रखिय हु, त तोहरा ला का फर होतई? का चुँगी लेवे बाला अइस ने नञ करऽ हइ?
[47] “जे तूँ खाली अप्पन भाइवने के नमस ते करहु, त कउन बड़ काम करऽ हु? का आन जात अइसन नञ करऽ हे?
[48] एहिसे चाहि कि तूँ सिध बनहु, ज इस न तोहर स रगीय पिता सिध हथ।