[1] “सरग के राज ओ दस कुमारिय न के नियन होतई जे अप्पन मसाल लेके दूल्हा से भेंट करे निकस ली।
[2] उनका में पान गो मुरू ख अउर पान गो समभ्फदार हलथी।
[3] मुरू खवन अप्पन मसाल त लेलथी, बाकि अपना संगे तेल नञ लेलथी,
[4] बाकि समभ्फदारवन अप्पन मसालवन के संग अप्पन कुपि्प य न में तेलो भर लेलथी।
[5] जब दूल्हा के आवे में देर होलई, त ओ सब औंघे लगलथी आउर सुत गेलथी।
[6] “आधा रात के हल्ला होलई “देखहु, दुल्हा आ रहल हे। उनका से भेंट करे चलहु।” तब ओ सब कुमारिय न उठके अप्पन-अप्पन मसाल ठीक करे लगलथिान।
[8] आउर मुरू खवन समभ्फदारवन से कहली, “अप्पन तेल में से कुछ हमनियो के देहु, काहेकि हमनी के मसाल बुताइत हइ।”
[9] बाकि समभ्फदारवन ज बाब देलथी, ‘साइत ई हमनी आउर तोहनी लेल पूरा नञ हो ठीक तो ई हे कि तूँ बेचेवाला के भीरी जाके अपना लेल किन लेहु।’
[10] जब ओ किने जा रहलथी हल तो दुल्हा पहुँचलइ, आउर जे तैयार हलथी, ओ उनका जोरे बिआह के घर में चल गेलथी आउर दरवाजा बन्द कैल गेल।
[11] एकरा बाद ओ दोसर कुमारिय नो आके कहे लगली, ‘हे स्वामी, हे स्वामी, हमनी लगी दरवाजा खोल्हु।’
[12] ओ ज बाब देलन, “हम तोरा से सच कहऽ हियो, हम तोरा नञ जानइत ही।
[13] एहिसे जागइत रहु, काहेकि तूँ नञ ओ दिन के जानइत ह, नञ उ बखत के।
[14] “काहेकि ई उ आमदी नियन दसा हे जे परदेस जाय बखत अप्पन नउकरवन के बोलाके अप्पन जाय दाद ओकरा सौंप देलन।
[15] उ एगो के पानगो तोड़ा, दोसर के दूगो, अउर तेसर के एगो माने सभ के ओकर स मारथा नियन देलन, आउर तब परदेस चल गेलन।
[16] तब, जेकरा पानगो तोड़ा मिललइ हल, उ तुरते जाके ओकरा से लेन-देन कय लक, आउर पान तोड़ा आउर कमय लक।
[17] एहि तरे जेकरा दूगो मिललइ हल, उहो दूगो आउर कमय लक।
[18] बाकि जेकरा एगो मिललइ हल, उ जाके मट्टी कोड़लन, अउर अप न मालिक के रू पया लुका देलक।
[19] “ढ़ेर दिन के बाद ओ नउकरवन के मालिक आके उनका से हिसाब लेवे लगलन।
[20] जेकरा पान तोड़ा मिललइ हल, उ पान तोड़ा आउर लाके कहलकय, ‘हे मालिक, तूँ हमरा पानगो तोड़ा देल्हु हल, देखहु हम पान तोड़ा आउर कमय ली।’
[21] ओकर मालिक ओकरा से कहलन, ‘ध् न्न, हे नीमन आउर विस वास जोग नउकर, तूँ थोरे में बिसवास जोग रहलहू हम तोरा ढेरमनी चीज के मालिक बनइबो। अप्पन मालिक के खुसी में सामिल होवऽ।’
[22] “आउर जेकरा दूगो तोड़ा मिललइ हल, उहो आके कहलकय, हे मालिक, तूँ हमरा दूगो तोड़ा देलहू हल, देखहु, हम दूगो तोड़ा आउर कमय ली।
[23] ओकर मालिक ओकरा से कहलन, ध् न्न, हे नीमन आउर बिसवास जोग नउकर, तूँ थोरे में बिस वास जोग रहलहू; हम तोरा ढ़ेर चीज के मालिक बनइबो। अप्पन मालिक के खुसी में सामिल होवऽ।
[24] “तब जेकरा एगो तोड़ा मिललई हल, उ आके कहलकय, ‘हे मालिक हम तोरा जानइत हलिए कि तूँ कड़ा आमदी हऽ: तूँ ज हिं कहीं नञ बोबऽ हु हुआँ छेवऽ हु, आउर जहिं नञ छींटऽ हुआँ से बटोरऽ हु।
[25] एहिसे हम डेरा गेली आउर जाके तोहर तोड़ा मट्टी में लुका देलिअइ। देखहु, जे तोर हे, उ ई हे।’
[26] ओकर मालिक ओकरा ज बाब देलन, ‘हे दुष्ट आउर आस कती नउकर, ज ब तूँ ई जानइत हल कि जहिं हम नञ बोय ली हुआँ से छेवऽ ही, आउर ज हाँ हम नञ छींटली हुआँ से बटोरऽ ही,
[27] तो तोरा चाहित हल कि हमर रू पया स र्राप फवन के दे देतऽ हल, तब हम आके अप्पन धन सूद सहित ले लेतिअइ।
[28] एहिसे उ तोड़ा ओकरा से ले लेहु, आउर जेकर भीरी दस तोड़ा हे, ओकरा दे देहु।
[29] काहेकि जेकरा पाले हे, ओकरा आउर देल जयतई, आउर ओकरा पाले ढेर हो जएतई: बाकि जेकरा पाले नञ हे, ओकरा से उहो जे ओकरा पाले हे, ले लेल जयतई।
[30] आउर ई आस कती नउकर के बाहिर के अन्धार में रख देहू, ज हाँ रोनाय आउर दाँत पीस नाय होतइ।’
[31] “जब आमदी के बेटा अप्पन महिमा में अय तथी आउर सब स रगदूत उनखा जोरे अय तइ, त ऊ अप्पन महिमा के सिंहास न पर बिराज मान होतथी।
[32] आउर सभ देस उनखा सामने इक्ट्ठा कयल जयतई, आउर जइसे चरवाहा भेड़मन के बकरिय न से अलग कर दे हे, ओय सही ऊ ओखनी के एक दोस रा से अलग करतथी।
[33] ऊ भेड़मन के अपना दहिना दन्न आउर बकरिय न के बायां दन्न खड़ा करतथी।
[34] तब राजा अप्पन दहिना दन्न वालन से कहतथी, ‘हे हमर पिता के धन्न लोग आहु, उ राज के अधिकारी हो जा, जे दुनिया के सि रज न से तोहनी लेल तइयार कयल गेल हे।
[35] काहेकि हम भूखाय ल हली, आउर तूँ हमरा खाय लगी देलहु, हम पि यास ल हली, आउर तूँ हमरा पानी पि य लहू, हम परदेसी हलिए, आउर तूँ हमरा अपना घरे ठहरय लऽ,
[36] हम लंगा हलिए, आउर तूँ हमरा कपड़ा पहिरय लऽ, हम बेमार हलिए, आउर तूँ हमर सुध् लेलऽ, हम जेहल में हली, आउर तूँ हमरा से मिले अय लऽ।’
[37] “तब धरमी उनखा ज बाब देतई, ‘हे परभु, हमनी कहिया तोरा भूखाय ल देखली आउर खिलय ली? चाहे पि यास ल देखली आउर पानी पि अय ली?
[38] हमनी कहिया तोरा परदेसी देखली आउर अप्पन घरे ठहरय ली? चाहे लंगा देखली आउर कपड़ा पहिरय ली?
[39] हमनी कहिया तोरा बेमार चाहे जेहल में देखली अउर तोरा से मिले अय ली?’
[40] तब राजा उनका ज बाब देथिान, ‘हम तोरा से सच कहऽ हियो कि तूँ जे हमर ई छोट से छोट भाय मन में से कउनो एगो के जोरे कय लहू, उ हमरे जोरे कय लहू।’
[41] ‘तब ऊ बायां दन्न वालन से कहतई, ‘हे स राप ल लोग, हमरा सोझा से उ अनन्त आगी में चल जाहू, जे सैतान आउर ओकर दूतमन लेल तैयार कयल गेलइ हे।
[42] काहेकि हम भुखाय ल हली, आउर तूँ हमरा खाय ला नञ देलहू, हम पि यास ल हली, आउर तूँ हमरा पानी न पि अय लऽ,
[43] हम परदेसी हली, तूँ हमरा अप्पन घरे नञ ठहरय लऽ हम लंगा हली, आउर तूँ हमरा कपड़ा नञ पहिरय लऽ, हम बेमार हलिए आउर जेहल में हली, आउर तूँ हमर सुध् न लेलऽ।’
[44] “तब उ ज बाब देतई, ‘हे परभु, हमनी तोरा कब भूखाय ल, चाहे पि यास ल, चाहे परदेसी, चाहे बेमार, चाहे जेहल में देखली, आउर तोरा सेवा टहल नञ कय ली?’
[45] तब ऊ ओखनी के ज बाब देतथी, ‘हम तोरा से सच कहऽहियो कि तूँ जे ई छोट से छोट में से कोइ एगो के जोरे नञ कय लऽ, उ हमरो जोरे नञ कय लऽ।’
[46] आउर इ नञ असीम सजा भोगतई बाकि धरमी अनन्त जि नगी में पइस तई।”