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[1] तब यीसु भीड़ से अउर अप्पन चेलमन से कहलथी,

[2] “सास तिरी आउर फरीसी मूसा के गद्‌दी पर बइठल हथ;

[3] एहिसे ओ तोहनी से जे कुछ कहथुन उ करिय हु आउर मानिय हु, बाकि उनके नियन काम नत करिय हु काहेकि ओ कहऽ त हथ बाकि करऽ त नञ हथ।

[4] ओ एगो अ य स न भारी बोभ्फा के जेकरा उठाना मोस किल हे, बाँध् के आमदी के कन्धा पर ध् इत हथ; बाकि ओकरा अप्पन अंगुरीयो से घस कावे न चाहऽ हथ।

[5] ओ अप्पन सब काम लोग के देखावे लेल करऽ हथ ओ अप्पन ताबीज वन के चौड़ा करऽ आउर अप्पन कपड़ा के कोर बढावऽ हथ।

[6] भोज में मुख-मुख जगह आउर स भा में मुख-मुख आस न,

[7] बजार में नमस्कार, आउर आमदी में रब्बी कहाना उनका भावऽ हे। बाकि तूँ रब्बी नञ कहइहऽ, काहेकि तोहर एक्‍के गो गुरू हे, आउर तूँ सब भाइ हउ।

[9] धरती पर केकरो अप्पन पिता न कहिय हु, काहेकि तोर एक्‍केगो पिता हे जे सरग में हे।

[10] आउर सोआमी नञ कहइहऽ, काहेकि तोहर एक्‍केगो सोआमी हे, माने मसीह।

[11] जे तोहनी में बड़ हो, उ तोहनी के दास बने। जे कोइ अप्पना के बड़ बनइतइ, उ छोट कयल जयतई: आउर जे कोइ अपनही अपना के छोट बनइतइ, उ बड़ कयल जयतई।

[13] हे कप टी सास तीरिय न आउर फरीसियन, तोहनी पर धिक्‍कार! तोहनी आमदिय न लेल सरग के राज के दुआर बन्द करइत हऽ, नञ त अप नेही ओकरा में प इस इत हऽ आउर नञ ओकरा में पइस वइया के पइसे देइत हऽ।

[14] [हे कप टी सास तीरिय न आउर फरिसीय न, तोहनी पर धिक्‍कार! तूँ बिध् वामन के घर के हड़प जा हू, आउर देखावे लेल ढेर देर लेल परारथाना करइत रहऽ हूँ: एहिसे तोरा बेसी सजा मिलतो।]

[15] “हे कपटी सास तीरिय न आउर फरीसियन, तोहनी पर धिक्‍कार! तूँ एगो के अप्पन धरम में लावे लेल सँउसे ज ल आउर थाल में मारल चलल, आउर जब उ धरम में आ जा हे त ओकरा अप नो से दूगुणा बदतर बना देहु।

[16] “हे आन्ध्र अगुअमन, तोहनी पर धिक्‍कार! जे कहइत हऽ कि जे कोइ मनि्दल के किरिया खाए त कुछ नञ, बाकि जे कोइ मनि्दल के सोना के किरिया खाए त ओकरा से बन्ध् जयतई।

[17] हे मुरू खवन आउर अंध् मन, कउन बड़ हे, सोना चाहे उ मनि्दल जेकरा से सोना पवित्तर होवऽ हे?

[18] फिन कहऽ हु कि जे कोइ बेदी के किरिया खाए तो कुछ नञ, बाकि जे चढ़ावा ओकरा पर हे, जे कोइ ओकर किरिया खाए त बंध् जयतई।

[19] हे अन्ध् मन, कउन बड़ हे चढ़ावा चाहे बेदी जेकरा से चढ़ावा प वित्तर होवऽ हे?

[20] एहिसे जे बेदी के किरिया खा हे, ऊ ओकरो आउर जे कुछ ओकरा पर हे, ओकरो किरिया खा हे।

[21] जे मनि्दल के किरिया खा हे, ऊ ओकर आउर ओकरा में रहवइया के किरिया खा हे।

[22] जे सरग के किरिया खा हे, उ परमेसर के सिंहास न के आउर ओकरा पर बइठवइयो के किरिया खा हे।

[23] “हे कपटी सास तीरिय न आउर फरीसियन, तोहनी पर धिक्‍कार! तूँ पोदिना, आउर सौंफ, आउर जीरा के दस मा भाग तो देइत ह, बाकि तूँ बेवस्था के गहिर बात के माने नेयाय, आउर दया, आउर बिसवास के छोड़ देलहु हे चाहित हल कि एकरो करइत रहतऽ आउर ओकरो नञ छोड़तहु।

[24] हे आन्ध्र राह बतवइया, तूँ मच्छर के तो छान ले हऽ, बाकि ऊँट के गिल जा हु।

[25] “हे कप टी सास तीरिय न आउर फरीसियन, तोहनी पर धिक्‍कार। तूँ कटोरा आउर थारी के ऊप रे ऊपर मंइज ऽ हु बाकि ओ भीतर अन्धार आउर असंज म से भरल हइ।

[26] हे आन्ध्र फरीसी, पहिले कटोरा आउर थारी के भीतर से मंइज हू कि ओ बाहरो से साप फ होय।

[27] हे कप टी सास तीरिय न आउर फरीसियन, तोहनी पर धिक्‍कार! तूँ चूना पोतल कबरबन नियन हऽ जे ऊपर से तो सुनर देखाइ दे हइ, बाकि भीतर मुर्दामन के हडि्‌डय न आउर सभ तरह के गंदगी से भरल हइ।

[28] एही तरे तूँहो उपर से आमदिय न के धरमी देखाइ दे हऽ, बाकि भीतरी कप ट आउर अध् रम से भरल हऽ।

[29] “हे कपटी सास तीरिय न आउर फरीसियन, तोहनी पर धिक्‍कार! तूँ भबिसवक्तवन के कबरवन के स जावऽ आउर धरमिय न के कबरवन के बनावऽ हू,

[30] आउर कहऽ हउ, ‘जे हमनी अप्पन पूरखन के दिन में होतिए त भबिसवक्तवन के हतिया में उनकर गवाह न होतिअइ’।

[31] एकरा से तो तूँ अपनही पर अप्पने ही गवाही दे हऊ कि तूँ भबिसवक्तवन के हतियारमन के सनतान हऊ।

[32] ईसे तूँ अप्पन के पूरखन के पाप के हडि़या ठीक से भर देहु।

[33] हे साँप वन, हे करैत के पोवन, तूँ नरक के सजा से कइसे बचवहु?

[34] एहिसे देखहु, हम तोरा भीरी भबिसवक्तवन आउर होसि यारवन आउर सास तीरिय न के पेठा दे हियो, अउर तूँ ओकरा में से कुछ के मार देवहु आउर कुरू स पर चढ़एवहु, आउर कुछ के अप्पन आराधनालय में कोड़ा मारवहु आउर एगो सहर से दोसर स हर में खदेड़इत चलवहु।

[35] जेकरा से धरमी हाबील से लेके बीरक्याह के बेटा ज करयाह ले, जेकरा तूँ मनि्दल आउर बेदी के बीच मार देलहु हल, जेतना धरमिय न के लहू ध् रती पर बहावल गेलइ हे उ सब तोहनी के माथा पर पड़तई।

[36] हम तोरा से सच कहऽ हियो, ई सभ बात ई बखत के लोग सभ पर आ पड़तई।

[37] “हे यरूसलेम, हे यरूसलेम! तूँ भबिसवक्तवन के मार देहु, आउर जे तोरा भीरी पेठावल गेलइ, उनका पर ढेला मारऽ हु। कत्ते बेर हम चाहलियो कि जइसे मुरगी अप्पन चूज वन के अप्पन डैना के नीचे इक्ट्‌ठा करइत हे, ओय सही हम्हू तोर लइकन के इक्ट्‌ठा करलिअइ, बाकि तूँ नञ चाहलहु।

[38] देखहु, तोहर घर तोरा लेल उजाड़ छोड़ल जा हे।

[39] काहेकि हम तोरा से कहऽ हियो कि अब से जबले तूँ न कहवहु, ‘ध् न्‍न हे ऊ, जे परभु के नाँव से आवइत हे’ तबले तूँ हमरा फिन कहियो नञ देखवहु।” मनि्दल के बिनास के भविसबानी

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