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[1] अब ऊ सेवा के बारे में जे साति्वक लोग लागी कयल जा हे, हमरा तोहनी के लिखनाय जरू री नञ।

[2] काहेकि हम तोहनी के मन के तइयारी के जानऽ ही, जेकरा ओज ह से हम तोहनी के बारे में मकिदुनिया के रहबैइया के सामने घमण्ड देखावऽ ही कि अखया के लोग एक बरिस से तइयार होलन हे, आउर तोहनी के उछाह से आउर ढ़ेरेक के उभारलन हे।

[3] बाकि हम भाइवन के एहिसे भेज ली हे कि हम जे घमण्ड तोहनी के बारे में देखय ली, ऊ ई बात में बेअरथा नञ होय; बाकि ज इसे हम कहली ओय सही तोहनी तइयार रहु,

[4] अयसन नञ हो कि जे कोइ मकिदुनिया के रहबैइया हमरा जोरे आवय आउर तोहनी के तइयार नञ पावय, त हो स कऽ हे कि ई भरोसा के ओज ह से हम (ई नञ कहऽ ही कि तूँ) बेइज्ज त होय अई।

[5] एहिसे हम भाइवन से ई बिनती करनाय जरू री स मझली कि ओ पहिले से तोहनी भीरी जाथा, आउर तोहनी के उदारता के फर जेकरा बारे में पहिले से बचन देल गेल हल, तइयार करके रखय कि ई दबाव से नञ बाकि उदारता के फर के नियर तइयार होय।

[6] बाकि बात ई हइ: जे थोरे बोवऽ हे, ऊ थोरेक छेवतई, आउर जे ढेर बोवऽ हे, ऊ ढेर छेवतइ।

[7] हरेक आमदी जयस न मन में ठाने ओय सही दान करय; नञ कुढ़-कुढ़ के आउर नञ दवाब से, काहेकि परमेसर खुसी से देवेवाला से परेम रखऽ हथ।

[8] परमेसर सब तरह के किरपा तोहनी के बेसी दे स कऽ हथ जेकरा से हर बात में आउर हर बखत, स भकुछ, जे तोहनी के जरू री हो, तोहनी भीरू रहे आउर हरेक नीमन काम ला तोहनी भीरी ढ़ेरेक हो।

[9] जयस न लिखल हे, “ऊ छिटलथी, ऊ कंगालवन के दान देलथी, उनकर धरम हरमेसा बनल रहतई।”

[10] ईसे जे बोवेवाला के बीया आउर खाना ला रोटी दे हइ, ऊ तोहनी के बीया देतइ, आउर ओकरा फरइबो करतइ; तोहनी के धरम के फर के बढ़ाय तइ।”

[11] तोहनी हर बात में सब तरह के उदारता लेल जे हमनी दिया परमेसर के धनबाद करवावऽ हे, ध् निक कयल जाहू।

[12] काहेकि ई सेवा के पूरा करे से नञ खाली साति्वक लोग के जरू रत पूरा होवऽ हे, बाकि लोग के दन्‍न से परमेस रो के ढेर धनबाद होवऽ हे।

[13] काहेकि ई सेवा के स बूत स कार के ओ परमेसर के महिमा परगट करऽ हथ कि तोहनी मसीह के सुभसमाचार के मानके उनकर अधीन रहऽ हू, आउर उनकर आउर सभ के मदत करे में उदारता परगट करइत रहऽ हु।

[14] आउर ओ तोहनी ला प रारथा करऽ हथ; आउर एहिसे कि तोहनी पर परमेसर के बड़ किरपा हे, तोहनी के लालसा करइत रहऽ हथ।

[15] परमेसर के, ओकर उ दान ला जे बरनन से बाहिर हे, ध् नवाद हो।

2 कुरिनि्थयन — Chapters