[1] हमनी जे परमेसर के जोरे काम करे वाला हिअई ईहो स मझावऽ ही कि उनखर किरपा जे तोहनी पर होलइ, ओकरा बेअरथा नञ जाय देहु।
[2] काहेकि ऊ त कहऽ हथ, “अप्पन खुसी के बखत हम तोहनी के सुन लेलियो, आउर उद्धार के दिन हम तोहनी के मदत कय लियो।” देखहु, अखनी ऊ खुसी के बखत हे, देखहु, अखनी उ उद्धार के दिन हे।
[3] हम कोइ बात में ठेस खाय के कोइयो मउका नञ दे ही जे से हमर सेवा पर कोइ दोष नञ आवे।
[4] बाकि सब बात से परमेसर के सेवक नियन अप्पन नीमन गुन के परगट करऽ ही, बड़ धीरज से, दुख से, गरीबी से, संकट से,
[5] कोड़ा खाय से, कइद होला से, हो-हल्ला से, मेहनत से, जागइत रहला से, उपास करे से,
[6] पवित्तरइ से, गियान से, धीरज से, दया से, पवित्तर आतमा से,
[7] स च्चो के परेम से, सच के बोली से, परमेसर के स मारथा से, धरम के काम के हथिायार से जे दहिना बायाँ हाँथा में हइ,
[8] आदर आउर अप मान से, बदनाम आउर सुनाम से। हलाँकि भरमावेवाला जयस न मालूम होवऽ हइ तइयो स च्चा हथ;
[9] अनजान ज इस न हथ, तइयो नामी हथ; मरइत नियन हथ आउर देखहु जि न्दा हथ; मार खाय वाला नियन हथ बाकि जान से मारल नञ जा हथ,
[10] मातम करे वाला नियन हथ, बाकि हरमेसा खुसी करऽ हथ, कंगलवन नियन हथ, बाकि ढेरेक के ध् निक बना दे हथ; अइसन हथ जइसे हमरा पाले कुछ नञ तइयो स बकुछ रखऽ हथ।
[11] ऐ कुरिनि्थाय न, हम खुल के तोहनी से बतिअउली, हमर हिया तोहनी दन्ने खुलल हे।
[12] तोहनी लेल हमर मन में कोइ संकोच नञ, बाकि तोहनिये के मन में संकोच हे।
[13] बाकि अप्पन लइका बुझ के तोहनी से कहऽ हियो कि तोहनियो ओकरा बदला में अप्पन हिया खोल दहु।
[14] अबिस वासी जोरे विषम जूआ में नञ जुतऽ, काहेकि धरम आउर अधरम के का मेल-जोल? चाहे अंजोर आउर अन्धार के का संगति?
[15] आउर मसीह के बलियाल के जोरे का मेल? चाहे बिस वासी के जोरे अबिस वासी के का नाता?
[16] आउर मूरतिवन के जोरे परमेसर के मनि्दल के का नाता? काहेकि हमनी त जि न्दे परमेसर के मनि्दल हिअई ज इस परमेश्वर कहलथिान हे, “हम उनका में बस बई आउर उनका में चलल फिरल करबई; आउर हम उनकर परमेसर होबइ, आउर ओ हमर लोग होतन।”
[17] एहिसे प्ऱभु कहऽ हथ, “उनका बीच से निकसऽ आउर अलग रहु; आउर असुद्ध चीज के मत छूवऽ, त हम तोहनी के स कारवई/गरहन;
[18] आउर हम तोहनी के पिता होबई, आउर तोहनी हमर बेटा आउर बेटी होबऽ। ई स रब स ति्तफमान परभु परमेसर के बचन हे।”