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[1] “ऊपर अऊ खाल्हे यरूसलेम के गलीमन म जावव, चारों कोति देखव अऊ बिचार करव, ओकर चऊकमन म खोजव। यदि एक जन भी तुमन ला अइसने मिल जाय, जऊन ह ईमानदारी से काम करथे अऊ सच्चई के खोजी अय, त मेंह ये सहर ला छेमा कर दूहूं।

[2] हालाकि ओमन कहिथें, ‘यहोवा के जिनगी के कसम,’ अभी भी ओमन झूठा कसम खावत हंय।”

[3] हे यहोवा, का तोर नजर सच्चई ऊपर नइं रहय? तेंह ओमन ला मारे, पर ओमन ला पीरा नइं होईस; तेंह ओमन ला कुचरे, पर ओमन नइं सुधरिन। ओमन अपन चेहरा ला पथरा ले घलो जादा कठोर कर लीन अऊ पछताप करे ले इनकार करिन।

[4] मेंह सोचेंव, “येमन सिरिप गरीब अंय; येमन मुरूख अंय, काबरकि येमन यहोवा के रद्दा ला, अऊ अपन परमेसर के जरूरत ला नइं जानंय।

[5] एकरसेति मेंह अगुवामन करा जाके ओमन ले बात करहूं; खचित ओमन यहोवा के रद्दा अऊ अपन परमेसर के जरूरत ला जानथें।” पर एक मन होके, ओमन घलो जुड़ा ला अऊ करार ला टोर दे रिहिन।

[6] येकरे कारन जंगल के सिंह ह ओमन ऊपर हमला करही, निरजन जगह के एक भेड़िया ह ओमन के नास कर दीही, एक चीतवा ह ओमन के नगरमन के लकठा म घात लगाय रहिही ताकि यदि कोनो जोखिम उठाके बाहिर निकले, त फारके ओला कुटा-कुटा कर दे, काबरकि ओमन के बिदरोह ह बहुंत अय अऊ ओमन के पाछू पलटई भी बहुंत।

[7] “मेंह तुमन ला काबर छेमा करंव? तुम्हर लइकामन मोला तियाग दे हवंय अऊ ओ देवतामन के किरिया खाय हवंय, जेमन देवता नो हंय। मेंह ओमन के जम्मो जरूरत ला पूरा करेंव, तभो ले, ओमन बेभिचार करिन अऊ बेस्यामन के घरमन म भीड़ के भीड़ जावत रिहिन।

[8] ओमन बने खवाय-पीयाय, वासना से भरे घोड़ामन सहीं अंय, ओमा के हर एक जन आने मनखे के घरवाली बर हिनहिनावत रहिथें।

[9] का मेंह ये काम बर ओमन ला सजा नइं देवंव?” यहोवा ह घोसना करत हे। का मेंह अइसने जाति ले खुद बदला नइं लंव?

[10] “ओमन के अंगूर के बारीमन म जा अऊ ओमन ला नास कर दे, पर ओमन ला पूरा नास झन कर। ओकर डालीमन ला काटके अलग कर दे, काबरकि ये मनखेमन यहोवा के नो हंय।

[11] इसरायल के मनखे अऊ यहूदा के मनखेमन मोर संग बहुंत बिसवासघात करे हवंय,” यहोवा ह ये घोसना करत हे।

[12] ओमन यहोवा के बारे म लबारी बात कहे हवंय; ओमन कहिन, “ओह कुछू नइं करही! हमर कुछू हानि नइं होही; हमन न तो कभू तलवार ले मारे जाबो अऊ न ही हमर इहां अकाल पड़ही।

[13] अगमजानीमन हवा सहीं अंय अऊ ओमन म परमेसर के बचन नइं ए; ओमन जो बात कहिथें, ओमन संग वइसने करे जावय।”

[14] एकरसेति यहोवा सर्वसक्तिमान परमेसर ह ये कहत हे: “काबरकि ये मनखेमन ये बचन कहे हवंय, मेंह अपन बचन ला तोर मुहूं म आगी अऊ ये मनखेमन ला कठवा सहीं बना दूहूं, अऊ येह ओमन ला भसम कर दीही।”

[15] यहोवा ह ये घोसना करत हे, “हे इसरायल के मनखेमन, मेंह तुम्हर बिरूध म दूरिहा ले एक अइसने देस ला लानत हंव— जऊन ह एक पुराना अऊ बने रहनेवाला देस ए, अइसने मनखे, जेमन के भासा ला तुमन नइं जानव, अऊ ओमन के बोली ला तुमन नइं समझव।

[16] ओमन के तरकसमन एक खुला कबर सहीं अंय; ओमा के जम्मो झन सूरबीर अंय।

[17] ओमन तुम्हर फसल अऊ तुम्हर जेवन ला खा जाहीं, ओमन तुम्हर बेटा-बेटीमन ला खा जाहीं; ओमन तुम्हर भेंड़-बकरी अऊ गाय-बईलामन ला खा जाहीं, ओमन तुम्हर अंगूर के नार अऊ अंजीर के रूखमन ला खा जाहीं। ओमन तलवार ले ओ गढ़वाले सहरमन ला नास कर दीहीं, जेमा तुमन भरोसा रखथव।”

[18] यहोवा ह ये घोसना करत हे, “तभो ले ओ दिनमन म घलो, मेंह तुमन ला पूरा नास नइं करंव।

[19] अऊ जब मनखेमन पुछहीं, ‘यहोवा हमर परमेसर ह हमन ले ये जम्मो काम काबर करे हवय?’ तब तें ओमन ला बताबे, ‘जइसने कि तुमन मोला तियाग दे हवव अऊ अपन खुद के देस म आने देवतामन के सेवा करे हवव, वइसने ही अब तुमन परदेस म परदेसीमन के सेवा करहू।’

[20] “येला याकूब के संतानमन ला घोसना करके बतावव अऊ यहूदा म ये परचार करव:

[21] हे मुरूख अऊ निरबुद्धि मनखेमन, ये बात ला सुनव, तुमन करा आंखी हवय पर नइं देखव, तुमन करा कान हवय पर नइं सुनव:

[22] का तुमन ला मोर डर नइं ए?” यहोवा ह ये घोसना करत हे। “का तुमन मोर आघू म नइं थरथरावव? मेंह बालू ला समुंदर के सीमना ठहिरांय, येह सदाकाल बर एक सीमना अय, जेला समुंदर ह नाहक नइं सकय। पानी के लहरामन ओकर ऊपर आ सकत हें, पर ओमन ओला जीत नइं सकंय; ओमन गरज सकत हें, पर ओमन ओला पार नइं कर सकंय।

[23] पर ये मनखेमन करा जिद्दी अऊ बिदरोही हिरदय हवय; ओमन अलग होके दूरिहा चल दे हवंय।

[24] ओमन अपनआप ला ये नइं कहंय, ‘आवव, हमन ओ यहोवा हमर परमेसर के भय मानन, जऊन ह समय म, सरद अऊ बसन्त रितु के बारिस देथे, जऊन ह फसल कटई के नियमित हप्तामन के भरोसा देवाथे।’

[25] तुमन के गलत काममन, येमन ला दूरिहा कर दे हवंय; तुमन के पाप ही के कारन, तुम्हर भलई नइं होवय।

[26] “मोर मनखेमन के बीच म दुस्ट मनखेमन हवंय जऊन मन अइसने ताक म रहिथें जइसने चिरई मरइयामन रहिथें अऊ येमन ओमन सहीं अंय, जऊन मन मनखेमन ला पकड़े बर फांदा लगाथें।

[27] चिरईमन ले भरे पिंजरामन सहीं, ओमन के घर ह छल-कपट ले भरे रहिथे; ओमन धनवान अऊ बलवान हो गे हवंय

[28] अऊ ओमन मोटहा अऊ चिकना हो गे हवंय। ओमन के दुस्ट काममन के कोनो सीमना नइं ए; ओमन नियाय के परवाह नइं करंय। ओमन अनाथमन के नियाय नइं चुकावंय; ओमन गरीबमन के हक के बचाव नइं करंय।

[29] का मेंह ओमन ला ये बातमन के सजा नइं दंव?” यहोवा ह ये घोसना करत हे। “का मेंह अइसने जाति ले खुद बदला नइं लंव?”

[30] एक भयंकर अऊ चोट देवइया बात देस म होय हवय:

[31] अगमजानीमन झूठ-मूठ के अगमबानी करथें, पुरोहितमन अपन खुद के अधिकार ले हुकूम चलाथें, अऊ मोर मनखेमन ला ये बात बहुंत बने लगथे। पर अन्त के बेरा म तुमन का करहू?

यरमियाह — Chapters