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[1] यहोवा परमेसर ह जतेक बन पसु बनाय रिहिस, ओ सब म सांप ह जादा धूर्त रिहिस। ओह माईलोगन ले पुछिस, “का परमेसर ह सही म कहे हवय, ‘तुमन ये बगीचा के कोनो रूख के फर ला झन खाहू’?”

[2] माईलोगन ह सांप ला जबाब दीस, “हमन ये बगीचा के रूखमन के फर खा सकत हन,

[3] पर जऊन रूख ह बगीचा के मांझा म हवय, ओकर फर के बारे म परमेसर ह कहे हवय कि न तो तुमन ओला खावव अऊ न ही ओला छुवव, नइं तो तुमन मर जाहू।”

[4] तब सांप ह माईलोगन ला कहिस, “तुमन निस्चय नइं मरव।

[5] बरन परमेसर खुद जानत हे कि जऊन दिन तुमन ये फर ला खाहू, ओहीच दिन तुम्हर आंखी ह उघर जाही, अऊ तुमन भला अऊ बुरा के गियान पाके परमेसर के सहीं हो जाहू।”

[6] त जब माईलोगन ह देखिस कि रूख के फर ह खाय बर बढ़िया अऊ देखे म मनभाऊ, अऊ बुद्धि देय बर पसंद के लईक हे, त ओह ओमा ले कुछू ला टोरके खाईस, अऊ कुछू अपन घरवाला ला घलो दीस, जऊन ह ओकर संग रिहिस, अऊ ओह घलो खाईस।

[7] तब ओ दूनों के आंखी उघर गीस, अऊ ओमन ला महसूस होईस कि ओमन नंगरा हवंय; एकरे बर ओमन अंजीर के पानमन ला जोड़-जोड़के अपन बर ढपनी बना लीन।

[8] तब यहोवा परमेसर, जऊन ह दिन के ठंडा समय बगीचा म घुमय, ओकर अवाज ओमन ला सुनई दीस। तब आदम अऊ ओकर घरवाली बगीचा के रूखमन के बीच म यहोवा परमेसर ले लुका गीन।

[9] पर यहोवा परमेसर ह हांक पारके आदम ला पुछिस, “तें कहां हस?”

[10] ओह जबाब दीस, “में बारी म तोर अवाज ला सुनके डर गेंव, काबरकि में नंगरा रहेंव; एकरसेति में लुका गेंव।”

[11] परमेसर ह कहिस, “तोला कोन कहिस कि तें नंगरा हस? जऊन रूख के फर खाय बर मेंह तोला मना करे रहेंव, का तेंह ओकर फर ला खाय हस?”

[12] आदम ह कहिस, “जऊन माईलोगन ला तेंह मोर संग रहे बर देय हस—ओही ह ओ रूख के फर मोला खाय बर दीस अऊ मेंह ओला खांय।”

[13] तब यहोवा परमेसर ह माईलोगन ले कहिस, “ये तें का करे हस?” माईलोगन ह जबाब दीस, “सांप ह मोला बहका दीस, त मेंह खांय।”

[14] तब यहोवा परमेसर ह सांप ला कहिस, “काबरकि तेंह अइसने करे हस, “एकरसेति तें जम्मो घरेलू-पसु, अऊ जम्मो बन पसु ले जादा सरापित अस! तेंह पेट के बल म रेंगबे, अऊ तेंह जिनगी भर माटी खावत रहिबे।

[15] अऊ मेंह तोर अऊ ये माईलोगन के बीच म, अऊ तोर बंस अऊ एकर बंस के बीच म, बईरता उपजाहूं, ओह तोर मुड़ ला कुचरही, अऊ तें ओकर एड़ी ला डसबे।”

[16] फेर माईलोगन ला ओह कहिस, “में तोर गरभवती होय के समय के पीरा ला अब्बड़ बढ़ाहूं; अऊ छेवारी होय के समय, तेंह पीरा सहके लइका जनमाबे। तोर लालसा तोर घरवाला बर होही अऊ ओह तोर ऊपर परभूता करही।”

[17] अऊ आदम ला ओह कहिस, “काबरकि तेंह अपन घरवाली के बात ला माने, अऊ जऊन रूख के बिसय म मेंह तोला हुकूम देय रहेंव कि तें ओकर फर ला झन खाबे, ओला तेंह खाय हस। “भुइयां ह तोर कारन सरापित हे; तें एकर ऊपज अपन जिनगी भर दुख के संग खाय पाबे।

[18] अऊ येह तोर बर कांटा अऊ कंटिला पऊधा उपजाही, अऊ तें खेत के ऊपज ला खाबे।

[19] अऊ अपन माथा के पसीना के कमई तेंह खाय पाबे, अऊ आखिर म माटी म मिल जाबे; काबरकि तोला ओही म ले लिये गे हवय, तें तो माटी ही अस, अऊ माटी म ही फेर मिल जाबे।”

[20] आदम ह अपन घरवाली के नांव हवा रखिस, काबरकि जम्मो जीयत मनखेमन के ओही ह दाई होईस।

[21] अऊ यहोवा परमेसर ह आदम अऊ ओकर घरवाली बर चमड़ा के पहिरावा बनाके ओमन ला पहिरा दीस।

[22] फेर यहोवा परमेसर ह कहिस, “मनखे ह भला अऊ बुरा के गियान पाके अब हमर म के एक झन सहीं हो गे हवय। एकरसेति अब अइसने झन होवय कि ओह हांथ लमाके जिनगी के रूख के फर ला घलो टोरके खा लेवय अऊ सदाकाल तक जीयत रहय।”

[23] एकरसेति यहोवा परमेसर ह ओला अदन के बगीचा ले निकाल दीस कि ओह ओ भुइयां म काम करय, जेमा ले ओह बनाय गे रिहिस।

[24] आदम ला निकाले के बाद, ओह जिनगी के रूख के रसता के रखवारी करे बर, अदन के बगीचा के पूरब दिग म करूबमन ला अऊ चारों कोति किंदरनेवाला आगी के तलवार ला घलो रख दीस।

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